सनातन विरोधी बताकर कर रहे थे ताराचंद का विरोध
देवेंद्र शर्मा,उदयपुर, (एआर लाइव न्यूज)। उदयपुर शहर से भाजपा प्रत्याशी ताराचंद जैन को गला फाड़ फाड़ कर सनातन विरोधी बताने वाले उपमहापौर पारस सिंघवी आखिरकार गुरुवार देर रात उन्ही ताराचंद जैन के राजनीतिक कुनबे में जा मिले। या फिर यह कहे तो गलत नहीं होगा कि दिन के उजाले में विरोध जताने वाले पारस सिंघवी रात के अंधेरे में ताराचंद जैन की शरण में आ गए। यह राजनीतिक करिश्मा जैन के नामांकन जुलूस शुरू होने की नई सुबह से ठीक पहले हुआ।
विधानसभा चुनाव में 21 अक्टूबर को ताराचंद जैन का उदयपुर शहर से टिकट फाइनल होते ही खुलकर विरोध में आए उप महापौर पारस सिंघवी ने गुरूवार देर रात सोशल मीडिया पर एक पोस्ट डालकर यह एलान किया कि वे ताराचंद जैन के साथ है। यह जिक्र भी किया कि पार्टी मेरे प्राण में बसी है। पोस्ट में सिंघवी और प्रमोद सामर ताराचंद जैन के साथ नजर आए। सामर भी ताराचंद जैन को टिकट मिलने के बाद से उनसे दूरी बनाकर चल रहे थे।

ताराचंद की रणनीति काम आई
इस पूरे राजनीतिक घटनाक्रम में कहीं न कहीं ताराचंद जैन की रणनीति काम आई। जिसके लिए वे राजनीतिक क्षेत्र में माहिर माने जाते है। प्रत्याशी घोषित होने के बाद से ही पारस सिंघवी खुलकर जैन की खिलाफत में उतर आए थे, इसके बावजूद ताराचंद जैन प्रचार अभियान को गति देते हुए पारस के विरोध को नजर अंदाज करते चले।
ताराचंद जैन ने शहर में अपना चुनाव कार्यालय खोला तो उसके उद्घाटन में भी पारस नहीं आए तो जैन ने उसकी परवाह भी नहीं की। माना जा रहा है कि इसी रणनीति के चलते ताराचंद जैन नामांकन रैली से ठीक पहले पारस सिंघवी को अपने साथ जोड़ने में सफल हो गए। सिंघवी शुक्रवार को नामांकन रैली से लेकर नामांकन सभा के दौरान पूरे समय ताराचंद जैन के साथ नजर आए। हालांकि इस दौरान भाजपा कार्यकर्ताओं में इस मिलन को लेकर काफी सुगबुगाहट भी रही।

जैन के बहाने कटारिया को भी ललकारा था
21 अक्टूबर को भाजपा ने शहर विधानसभा सीट से ताराचंद जैन को प्रत्याशी घोषित किया था। जैन का नाम घोषित होते ही उप महापौर पारस सिंघवी खुलकर विरोध पर उतर आए है। सिंघवी ने चार दिनों में विरोध बैठक भी की और शहर में स्वाभिमान रैली भी निकाली। हर बार उन्होंने अपने विरोध में एक ही बात सबसे ज्यादा दोहराई कि ताराचंद जैन सनातन विरोधी है और सनातन विरोधी को टिकट दिया है वह स्वीकार नहीं है। इस दौरान सिंघवी ने असम के मौजूदा राज्यपाल एवं उदयपुर के पूर्व विधायक गुलाबचंद कटारिया को भी ललकारा था। इसका तमाम फीडबैक उदयपुर से असम तक भी पहुंच गया।

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