- क्वालिफिकेशन परसेंटाइल “0” करने के निर्णय को चुनौती देने वाली याचिका सुप्रीम कोर्ट में खारिज
- चुनावी साल में केन्द्र सरकार का निजी मेडिकल कॉलेजों को फायदा पहुंचाने वाला निर्णय.?
- डिस्क्वॉलिफाईड कैंडीडेट के लिए स्पेशलिस्ट डॉक्टर बनने का मौका
उदयपुर,(एआर लाइव न्यूज)। एमबीबीएस के बाद 2023 में पोस्ट ग्रेजुएशन कोर्स के लिए नीट-पीजी 2023 की क्वालिफिकेशन परसेंटाइल “0 (ZERO)” करने का केन्द्र सरकार का निर्णय चर्चा का विषय बना हुआ है। केन्द्र सरकार के इस निर्णय के खिलाफ दायर जनहित याचिका को आज सोमवार को सुप्रीम कोर्ट ने खारिज कर दिया है। मुख्य न्यायाधीश डीवाई चंद्रचूड़, न्यायमूर्ति मनोज मिश्रा और न्यायमूर्ति जेबी पारदीवाला की पीठ ने केन्द्र सरकार के नीट-पीजी 2023 की कट-ऑफ को जीरो करने के निर्णय को चुनौती देने वाली जनहित याचिका पर सुनवाई की और उसे खारिज कर दिया।
20 सितंबर को केन्द्र सरकार के स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय के सचिव सुनील कुमार गुप्ता ने लेटर जारी किया था। जिसमें उन्होंने एमबीबीएस के बाद 2023 में पोस्ट ग्रेजुएशन कोर्स के लिए नीट-पीजी 2023 की क्वालिफिकेशन परसेंटाइल “0 (ZERO)” करने का निर्णय लिया है। मतलब नीट-पीजी परीक्षा में जीरो परसेंटाइल स्कोर करने वाले स्टूडेंट भी पोस्ट ग्रेजुएशन कोर्स कर सकेंगे। जबकि इससे पहले पोस्ट ग्र्र्रेजुएशन कोर्स करने के लिए इससे पहले काउंसलिंग के पहले दो राउंड के दौरान पीजी सीटों पर प्रवेश के लिए कट-ऑफ प्रतिशत अनारक्षित श्रेणी के लिए 50, पीडब्ल्यूडी विकलांग व्यक्ति श्रेणी के लिए 45 और आरक्षित श्रेणी के छात्रों के लिए 40 था।

अब क्या निजी मेडिकल कॉलेज में होगी पीजी सीट की नीलामी.?
मेडिकल क्षेत्र में चर्चा है कि चुनावी वर्ष में इस प्रकार का निर्णय केन्द्र सरकार ने निजी मेडिकल कॉलेजों को सीधे तौर पर फायदा पहुंचाने के लिए लिया है। मेडिकल एजुकेशन से जुड़े विशेषज्ञों का कहना है कि सरकार के इस तरह के निर्णय ने नीट-पीजी एग्जाम का मजाक बना दिया है। प्राईवेट मेडिकल कॉलेज की मोटी फीस देकर कोई भी डिस्क्वालिफाईड कैंडीडेट एमडी एमएस की डिग्री हासिल कर ही लेगा। इससे अप्रत्यक्ष रूप से प्राइवेट मेडिकल कॉलेजों में पीजी सीट की नीलामी को भी खुली छूट मिलेगी.? चर्चा है जो पीजी सीट 2 करोड़ रूपए में जाती थी, वह अब 4 करोड़ रूपए में जाएगी।
गत वर्ष पीजी की करीब 4000 सीटें खाली रह गयी थीं
इस निर्णय के पक्ष में होने वाले विशेषज्ञों को कहा है कि पिछले साल काउंसलिंग के आखिरी दौर के लिए क्वालीफाइंग परसेंटाइल को घटाकर 30 कर दिया गया था, इसके बावजूद 4000 सीटें खाली रह गई थी। ज्यादातर कैंडीडेट एनाटॉमी, फिजियोलॉजी, बायोकैमिस्ट्री, माइक्राबायोलॉजी, फार्माकोलॉजी जैसे नॉन क्लीनिकल और रीसर्च सब्जेक्ट्स में जाना पसंद नहीं करते हैं, जबकि क्लीनिकल प्रेक्टिस वाले सब्जेक्ट्स की सीटें तुरंत भर जाती हैं।
ऐसे में एमबीबीएस के दौरान नॉन क्लीनिकल सब्जेक्ट्स को पढ़ाने के लिए मेडिकल कॉलेजों को टीचिंग स्टाफ की कमी से जूझना पड़ रहा है। मंत्रालय का मनना है कि जीरो परसेंटाइल करने के निर्णय से नॉन क्लीनिकल विषयों और टीचिंग में जो छात्र रूचि रखते हैं, उन्हें मौका मिलेगा। नॉन क्लीनिकल सब्जेक्ट्स की यह स्थिति हो गयी है कि कुछ निजी मेडिकल कॉलेज फ्री फीस पर भी एडमीशन देने को तैयार हैं, लेकिन कोई छात्र इन विषयों में पीजी नहीं करना चाहता है।



