आरंभिक खोज परिणामों के अनुसार देश का 95 प्रतिशत पोटाश भंडार राजस्थान में संभावित
जयपुर,(एआर लाइव न्यूज)। राज्य के खान विभाग ने चूरु जिले के घड़सीसर और करौली सपोटरा के खीदरपुर पोटाश ब्लॉक के कंपोजिट लाइसेंस के लिए ई-ऑक्शन की प्रक्रिया आरंभ कर दी है(potash block mining in rajasthan)। देश में यह पहला मौका होगा जब पोटाश के दो ब्लॉकों के सीएल के लिए ऑक्शन की पहल की गई है। वर्तमान में भारत पोटाश के लिए पूर्णतः आयात पर निर्भर है, क्योंकि भारत में खनिज पोटाश का कहीं भी खनन नहीं हो रहा है।
एसीएस माईंस वीनू गुप्ता ने बताया कि मुख्यमंत्री अशोक गहलोत की पहल पर खनिज पोटाश के कंपोजिट लाइसेंस के ई-ऑक्शन की प्रक्रिया आरंभ कर राजस्थान देश को बड़ी सौगात देने जा रहा है। देश में यह पहला मौका होगा जब पोटाश के दो ब्लॉकों के सीएल के लिए ऑक्शन की पहल की गई है। भारत सरकार के ईपोर्टल पर ई-ऑक्शन की प्रक्रिया 4 सितंबर को बोली लगाने की अंतिम तिथि के साथ पूरी होगी।

देश का 95 प्रतिशत से भी अधिक पोटाश भण्डार राजस्थान में संभावित
देश में पोटाश का अभी तक खनन नहीं हो रहा है और देश पूरी तरह से विदेशों से आयात पर निर्भर है। देश में करीब दस हजार करोड़ से अधिक के पोटाश का मुख्यतः कनाड़ा, बेलारुस, रसिया, जॉर्डन आदि से आयात किया जा रहा है। कुछ मात्रा में इजराइल, सउदी अरब, जर्मनी आदि से भी आयात होता है। देश में पोटाश खनिज डिपाजिट्स के आरंभिक खोज परिणामों के अनुसार देश का 95 प्रतिशत से भी अधिक पोटाश के भण्डार राजस्थान में संभावित है। बीकानेर संभाग और करौली के आसपास पोटाश के भंडार के संकेत मिले है।
आयात पर निर्भरता कम होगी
निदेशक माइंस एवं पेट्रोलियम संदेश नायक ने बताया कि घडसीसर पोटाश ब्लॉक सरदार शहर तहसील से लगभग 30 किमी उत्तर-पश्चिम में स्थित है एवं इसका क्षेत्रफल 11.72 वर्ग किमी है। खीदरपुर ब्लॉक गंगापुर, जिला सवाईमाधोपुर से लगभग 20 किमी दूरी पर स्थित है एवं इसका क्षेत्रफल 9.464 वर्ग किमी है। प्रदेश में पोटाश खनिज के खनन से आयात पर निर्भरता कम होने के साथ ही हजारों करोड़ की विदेशी मुद्रा की भी बचत हो सकेगी।
कृषि क्षेत्र में उर्वरक के रूप में प्रमुखता से होता है उपयोग
पोटाश का उपयोग कृषि क्षेत्र में उर्वरक के रूप में प्रमुखता से होता है। पोटाश, नाईट्रोजन व फास्फोरस के बाद तीसरा महत्वपूर्ण घटक है । उर्वरक के अलावा पोटाश का अन्य उपयोग ग्लास, बारूद, रसायन व पेट्रोरसायन आदि बनाने में भी किया जाता है।


