जमीन का मुआवजा नहीं मिलने से थे नाराज, ध्यान आकर्षित करने का था इरादा
उदयपुर,(एआर लाइव न्यूज)। उदयपुर-अहमदाबाद रेलवे ट्रैक के जावरमांइस थाना क्षेत्र के केवड़े की नाल स्थित ओडा रेलवे पुल पर हुए विस्फोट मामले में राजस्थान एसओजी ने खुलासा कर 4 आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया है। इसमें तीन बालिग हैं, जबकि एक नाबालिग अपचारी है। मुख्य आरोपी की जमीन को रेलवे विभाग ने अधिग्रहित किया था, लेकिन इन्हें उसका मुआवजा नहीं मिला था। इसी विवाद को लेकर ये आरोपी सरकार का ध्यान इस ओर आकर्षित करना चाहते थे।
एसओजी एडीजी अशोक राठौड़ ने बताया कि मामले में जावरमांइस थाना क्षेत्र के एकलिंगपुरा गांव निवासी धूलचंद मीणा (32), प्रकाश मीणा (18) को गिरफ्तार किया है, जबकि इनके साथ शामिल एक अपचारी को डिटेन किया गया है। प्रकाश मीणा भी 20 दिन पहले 23 अक्टूबर को ही बालिग हुआ है।
आरोपियों ने पूछताछ में बताया कि उनका मकसद सिर्फ मुआवजे को लेकर ध्यान आकर्षित करना था, किसी भी प्रकार की कोई जनहानि करने का उनका इरादा नहीं था। एडीजी ने बताया कि इन्होंने एकलिंगपुरा में ही अंकुश सुहालका नाम के व्यक्ति से विस्फोटक लिया था, उसे भी पकड़ लिया गया है।
ऐसी घटना का विचार आना भी गंभीर है, मामला UAPA में ही रहेगा
एडीजी अशोक राठौड़ ने कहा कि किसी को भी मांग मनवाने के लिए कानून हाथ में लेने का अधिकार नहीं है। अगर किसी के दिमाग में इस तरह का कृत्य कर ध्यान आकर्षित करने का विचार भी आता है, तो यह गंभीर है। ध्यान आकर्षित करने के कानूनी दायरे में रहकर दूसरे तरीके भी हो सकते हैं। ऐसे में यह कृत्य UAPA की धाराओं में ही दर्ज रहेगा। इस पूरे मामले के खुलासे में उदयपुर एसपी विकास शर्मा और उनकी टीम का बड़ा योगदान रहा है।

धूलचंद की जमीन का था विवाद
पुलिस के अनुसार आरोपियों ने पूछताछ में बताया कि धूलचंद की जमीन रेलवे ने अधिग्रहित की थी, लेकिन उसे इसका मुआवजा नहीं मिला था और इसको लेकर लंबे समय से विवाद चला रहा था। धूलचंद ने मुआवजे के लिए कई प्रयास किए, लेकिन मुआवजा नहीं मिला था। ऐसे में वह यह घटना कारित कर सबका ध्यान इस ओर आकर्षित करना चाहता था।

धूलचंद ने ही गांव के दो लड़कों प्रकाश व एक अन्य नाबालिग को साथ लिया। जब उदयपुर से असारवा अहमदाबाद जाने वाली ट्रेन ट्रैक से निकल गयी, तो ये तीनों एक ही बाइक पर ट्रैक के पास पहुंचे। प्रकाश बाइक लेकर नीचे खड़ा रहा। वहीं धूलचंद व एक अपचारी ट्रैक पर गए और विस्फोटक बांध डेटोनेटर से कनेक्ट किया, जिसके बाद ट्रैक पर विस्फोट हुआ।
माइनिंग एरिया होने से बहुत सस्ते में आसानी से मिल जाता है विस्फोटक
एडीजी ने बताया कि यह पूरा क्षेत्र माइनिंग खनन एरिया है। ऐसे में यहां पर विस्फोटक बहुत सस्ते में और बहुत आसानी से मिल जाता है। क्षेत्र में ज्यादातर ग्रामीण माइंस में मजदूरी करते हैं, तो इनको विस्फोटक लगाना, डेटोनेटर से कनेक्ट करना आता है।

जगह-जगह मिली जिलेटिन की छड़ों का इससे कोई कनेक्शन नहीं
पुलिस ने बताया कि डूंगरपुर में मिली जिलेटिन की छड़ों का रेलवे ब्रिज विस्फोट से कोई कनेक्शन नहीं है। इस घटना के बाद से अवैध विस्फोटक को लेकर पुलिस जगह-जगह चेकिंग कर रही थी।
अवैध खनन के लिए ज्यादातर अवैध विस्फोटक का उपयोग ही होता है, ऐसे में जो लोग अवैध खनन के लिए अवैध विस्फोटक का संग्रहण या सप्लाई करते हैं, उन्होंने पुलिस में पकड़े जाने के डर से उनके पास मौजूद अवैध विस्फोटक को इधर-उधर फेंक दिया। संभावना है कि डूंगरपुर में मिली जिलेटिन की छड़े भी अवैध खनन के लिए संग्रहित किए गए अवैध विस्फोटक ही था। हालां कि पुलिस मामले की जांच कर रही है।
मामले के खुलासे में इस पुलिस टीम की रही मुख्य भूमिका
एसपी विकास शर्मा के निर्देशन में एडि.एसपी मुकेश सांखला, एटीएस एडिएसपी अनंत कुमार, डीएसपी राजेन्द्र सिंह जैन, जावरमांइस थानाधिकारी अनिल कुमार विश्नोई, टीडी थानाधिकारी कमलेन्द्र सिंह, इंस्पेक्टर लीलाधर मालवीया सहित उदयपुर जिले की पुलिस टीम की मामले के खुलासे और आरोपियों की गिरफ्तारी में मुख्य भूमिका रही है।



