जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के सचिव बालगृह की अनियमितता देख बाल कल्याण समिति पहुंचे, तो वहां न तो अध्यक्ष मिले, न समिति सदस्य
उदयपुर,(एआर लाइव न्यूज)। जिला विधिक सेवा प्राधिकरण द्वारा मंगलवार को बालगृहों का औचक निरीक्षण किया गया तो कई अनियमितताएं मिलने के साथ ही चौकाने वाले खुलासे हुए। सामाजिक न्याय अधिकारिता विभाग एवं बाल अधिकारिता विभाग की मिलीभगत से बालगृहों में ऐसे बच्चे भी मिले, जो निराश्रित नहीं हैं, लेकिन उन्हें निराश्रित बताकर बालगृहों में रखा जा रहा है, ताकि सरकार से अनुदान प्राप्त किया जा सके।
बालगृह में बालकों को न तो समय पर नाश्ता, भोजन दिया जाता है और जो खाने को मिलता है, उसमें भी कीड़े निकलते हैं। बच्चे इसकी वार्डन से शिकायत करें तो उल्टा बच्चों को ही धमकाया जाता है।
जहां गए, वहां मिली अनियमितताएं और अव्यवस्था
जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के सचिव एडीजे कुलदीप शर्मा ने बताया कि सुखेर स्थित जीवन ज्योति संस्थान के औचक निरीक्षण में कई अनियमितताएं पायी गयी। इस पर हम बाल कल्याण समिति के कार्यालय पहुंचे। लेकिन वहां समिति के अध्यक्ष और सदस्य कोई नहीं मिला। लेकिन वहां मीरा निराश्रित गृह (महिला मंडल) की 5 बालिकाएं समिति सदस्यों के आने का इंतजार कर रही थीं। उनसे बात की तो उन्होंने मीरा निराश्रित गृह महिला मंडल की अनियमितताओं के बारे में बताया।
एडीजे कुलदीप शर्मा ने कहा कि अनुदानित गृहों में जो बालक-बालिकाए निराश्रित नहीं है, उन्हे भी निराश्रित बताकर रखा हुआ है, ताकि उनके नाम पर सरकार से अनुदान लिया जा सके। वास्तव में जो निराश्रित नहीं है, उन्हे बालगृहो में रखा जाना सरकारी अनुदान का दुरूपयोग है। उदयपुर जिले में संचालित समस्त बाल-गृहो को पिछले 5 वर्षो का डेटा सहायक निदेशक बाल अधिकारिता विभाग उदयपुर से मंगाया जाकर नियमानुसार कार्यवाही की जाएगी, ताकि सरकारी अनुदान के दुरूपयोग को रोका जा सके।

वाॅट्स-एप ग्रुप में फोटो नहीं आयी तो एडीजे खुद पहुंच गए बालगृह
एडीजे कुलदीप शर्मा ने बताया कि निगरानी के लिए बालगृहों में दिये जाने वाले सुबह के नाश्ते, लंच एवं डीनर के फोटोग्राफस को वाट्सएप ग्रुप में मंगवाया जा रहा है। मंगलवार को वाट्सएप ग्रुप में जीवन ज्योति संस्थान ने सुबह के नाश्ते के फोटो पोस्ट नहीं किए थे, संदेह होने पर सुबह जीवन ज्योति अनुदानित बाल गृह का औचक निरीक्षण किया। निरीक्षण के दौरान कई अनियमितताएं मिलने पर बाल गृह के स्टाॅफ रजिस्टर को दस्तियाब किया गया है।

यह मिली अनियमितताएं
सुखेर स्थित जीवन ज्योति बालगृह
- निरीक्षण के दौरान पाया गया कि मुख्य द्वार पर चैकीदार नहीं है ।
- अनुदानित बालगृह एवं सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता विभाग द्वारा संचालित छात्रावास एक ही भवन में संचालित है।
- बालगृह में स्वीपर की कोई व्यवस्था नहीं है, उपस्थित स्टाॅफ शौचालय एवं मूत्रालय की सफाई के बारे में संतोषजनक जवाब नहीं दे सके।
- सुबह 8.00 बजे दिये जाने वाले नाश्ते के बारे में पूछा तो बच्चों ने बताया कि उन्हें नाश्ता नहीं दिया गया है, जबकि आज उन्हें दूध और पोहा दिया जाना था।
- जीवन ज्योति अनुदानित बाल गृह है, जहां निरााश्रित बच्चों को रखा जाना चाहिए। बालको के उपस्थिति रजिस्टर की जांच करने पर पता चला, यहां रहे रहे बच्चे निराश्रित नहीं है, इसके बावजूद उन्हें बाल गृह में रखा गया है।
- बाल गृह में 50 बालको पर 15 का स्टाफ स्वीकृत है, लेकिन मौके पर केवल दो रसोईयें और दो केयर टेकर मिले। जबकि राज्य सरकार द्वारा प्रत्येक स्टाॅफ के लिए मासिक आधार पर तनख्वाह दी जाती है, जिसका दुरूपयोग किया जा रहा है।

मीरा निराश्रित गृह (महिला मंडल)
बाल कल्याण समिति कार्यालय के बाहर परिजनों के साथ खड़ी मीरा निराश्रित गृह की 5 बालिकाओं ने एडीजे के सामने शिकायतो का अंबार लगा दिया। बालिकाओं ने एडीजे को बताया कि वे बालिकाएं दीपावली पर अपने घर गई थी। लेकिन वे वापस अनुदानित गृह लौटीं, तो उन्हें दोबारा बाल कल्याण समिति से आदेश लेकर आने को कहा गया है और गृह में प्रवेश नहीं दिया गया।
बालिकाओं ने बताया कि पिछले 4 से 5 वर्ष से बालिकाएं अनुदानित गृह में आवासित है। बेड शीट स्वयं धोती है। खाने में कीडे आने पर शिकायत करने पर निर्मला नाम की वार्डन उन्हे डराती धमकाती है।


