उदयपुर के सज्जनगढ़ बायो-पार्क में 7 साल पहले रणथंभोर नेशनल पार्क से शिफ्ट किया गया था उस्ताद
चिकित्सक बोर्ड ने IVRI को पत्र लिखकर मांगा मार्गदर्शन
लकी जैन, उदयपुर,(एआर लाइव न्यूज)। उदयपुर के सज्जनगढ़ बायोलॉजिकल पार्क में (मानो पिछले सात साल से उम्र कैद की सजा काट रहे) टाइगर टी-24 उर्फ उस्ताद को बोन कैंसर जैसी बीमारी हो गयी है। चिकित्सक टी-24 को ऑस्टियो सारकोमा बीमारी होना बता रहे हैं। उसके पैर में मौजूदा हड्डी के समानांतर हड्डी बढ़ रही है और परेशानी इस बात की है कि टाइगर उस्ताद को हर दिन उस दर्द से गुजरना पड़ रहा है, क्यों कि चिकित्सकों के पास उसे इस दर्द से निजात दिलाने का कोई सटीक इलाज या समाधान नहीं है।
जानकारी के अनुसार उस्ताद की उम्र 18 साल हो चुकी है, वह बूढ़ा हो गया है। इस बीमारी के चलते उस्ताद को चलने-फिरने में दिक्कत हो रही है और एक पैर उठाकर चल रहा है। हालां कि वह भोजन पूरी मात्रा में ले रहा है और आराम से खा-पी रहा है। इस बीमारी का एक ही इलाज है कि ऑपरेशन कर उस अंग को काटकर अलग कर दो। समस्या यह है कि ऑपरेशन कर पैर काटने से उस्ताद की समस्याएं बढ़ने की आशंका ज्यादा है।

पैर काटने से उस्ताद का सर्वाइव करना मुश्किल हो जाएगा
सज्जनगढ़ बायोलॉजिकल पार्क के चिकित्सक डॉक्टर हंस कुमार जैन ने बताया कि टाइगर टी-24 अच्छे से खा-पी रहा है और टहल भी रहा है। उसके पिछले पैर की हड्डी बढ़ रही है, यह एक तरह से बोन कैंसर जैसी बीमारी है। टी-24 के इलाज के लिए चार डॉक्टर्स का का बोर्ड गठित किया हुआ है, जिसमें जयपुर के डॉक्टर अरविंदर माथुर भी हैं। चिकित्सक बोर्ड की मौजूदगी में टी-24 को ट्रंकुलाइज कर एक्स-रे किया गया था, ताकि बीमारी की सही स्थिति पता चल सके।
डॉक्टर ने बताया कि एक्स-रे से ही स्पष्ट हुआ था कि टी-24 के पिछले पैर की हड्डी बढ़ रही है और यह बोन कैंसर जैसी बीमारी है। किसी भी प्रकार के कैंसर को ठीक करने के लिए उस अंग को काट कर शरीर से अलग कर दिया जाता है। लेकिन यहां समस्या यह है कि टी-24 का पैर सर्जरी कर काट दिया तो उसकी समस्याएं बढ़ जाएंगी। पहले तो उसका तीन पैर पर सर्वाइव करना मुश्किल हो जाएगा, इसके अलावा वह एक वाइल्ड एनिमल है, सर्जरी के बाद होश में आने पर उसने पैर की पट्टी हटा दी तो यह सबकुछ उसके जीवन के लिए ज्यादा खतरनाक साबित हो सकता है।

आईवीआरआई का पत्र लिखकर मांगा है मार्गदर्शन
चिकित्सक बोर्ड के मेंबर्स के अनुसार टाइगर टी-24 अभी अच्छे से खा-पी रहा है, ऐसे में हड्डी का सैंपल लेने या उपचार के लिए भी उसके पैर को छेड़ना ठीक नहीं होगा, इससे रोग के तेजी से बढ़ने की आशंका है। उसकी उम्र 18 वर्ष हो चुकी है, हो सकता है कि वह इस स्थिति में सर्वाइव कर ले, लेकिन ऑपरेशन के बाद उसका सर्वाइव करना मुश्किल हो जाएगा। इसलिए ऑपरेशन नहीं कर रहे हैं। इसके अलावा बरेली स्थित इंडियन वेटरनरी रिसर्च इंटीट्यूट को टी-24 की स्थिति के बारे में पत्र लिखकर अवगत कराया गया है और मार्गदर्शन मांगा है।

16 मई 2015 को रणथंभोर से उदयपुर लाया गया था उस्ताद
7 साल पहले 16 मई 2015 को सवाईमाधोपुर स्थित रणथंभोर नेशनल पार्क से टाइगर टी-24 को शिफ्ट कर उदयपुर के सज्जनगढ़ बायोलॉजिकल पार्क लाया गया था। टाइगर टी-24 ने रणथंभोर नेशनल पार्क में दो वनकर्मियों और दो स्थानीय लोगों कुल चार लोगों पर हमला कर मार दिया था। जिसमें आखिरी हमला उसने 8 मई 2016 को एक वनकर्मी पर किया था।
वनकर्मी की मौत के बाद स्थानीय स्तर पर टी-24 को लेकर ग्रामीणों ने विरोध प्रदर्शन शुरू कर दिए थे, दबाव में आकर वन विभाग ने उसे नेशनल पार्क से सज्जनगढ़ बायोलॉजिकल पार्क के एनक्लोजर में शिफ्ट कर दिया था। टी-24 को वापस नेशनल पार्क में लाने के लिए कई वन्यजीव प्रेमियों ने प्रदर्शन किए और कोर्ट में याचिका तक लगाई। यह एक राष्ट्रीय मुद्दा भी बना, लेकिन टी-24 की वापस रिहाई नहीं हो सकी। तब से टी-24 दुनिया की नजरों से दूर उदयपुर में सज्जनगढ़ बायोलॉजिकल पार्क के एनक्लोजर है।



