उदयपुर से जगदीश तेली ने S-9श्रेणी 100 मीटर बेक मेन्स में सिल्वर मेडल जीता
उदयपुर,(एआर लाइव न्यूज)। जो आपके पास नहीं है, उस पर दुखी होने के बजाए, जो है उस पर फोकस करेंगे तो सफल होने से कोई नहीं रोक सकता। यह सोच उन प्रतिभागियों की है, जिन्होंने अपनी दिव्यांगता को कमजोरी नहीं बनने दिया और अपनी प्रतिभा से राष्ट्रीय ही नहीं, अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर कई मेडल जीत परिवार, समाज और देश का नाम रोशन किया।
पैरालिम्पिक कमेटी ऑफ इंडिया और नारायण सेवा संस्थान के तत्वावधान में शुक्रवार से शुरू हुई तीन दिवसीय 21वीं नेशनल पैरा.स्वीमिंग चैंपियनशिप ये प्रतिभाएं हिस्सा लेने आई हैं। हम आज आपसे ऐसी ही कुछ प्रतिभाओं के बारे में बताएंगे जिन्होंने असंभव को संभव कर दिखाया।
दृष्टिहीनता के अंधेरे से लड़ीं और अब अपने व्यक्तित्व से दुनिया रोशन कर रहीं

महाराष्ट्र के नागपुर से आयीं कंचन माला पांडे पहली महिला हैं जिन्होंने वर्ल्ड लेवल चैंपियनशिप में ब्लाइंड कैटेगरी में हिंदुस्तान के लिए गोल्ड मैडल जीता हो। कंचन को उनकी तैराकी में मिली सफलाओं के बाद आरबीआई में जॉब मिली और आज कंचन रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया में असिस्टेंट मैनेजर हैं। कंचन बताती हैं कि वे जन्म से ही दृष्टिहीन हैं, उनके पिता नेशनल खिलाड़ी थे, इसलिए खेलों के प्रति उनका रूझान था। उन्होंने दस साल की उम्र से ही तैराकी शुरू कर दी थी, इसके बाद वे जीतती गयीं। कंचन बताती हैं कि उनके जीते हुए मैडल ही उनके मोटीवेशन बने। कंचन ने बताया कि वे वर्ल्ड चैंपियनशिप में उनकी कैटेगरी में गोल्ड जीतने वाली पहली महिला है। वे हर काम प्लानिंग के साथ करती हैं।
कंचन कहती हैं कि उनके पति विनोद देशमुख उन्हें बहुत सपोर्ट करते हैं। 6 महीने पहले उन्होंने एक संतान को जन्म दिया है और जैसे ही डॉक्टर्स ने उन्हें फिटनेस सर्टिफिकेट दिया, उन्होंने तुरंत स्वीमिंग प्रेक्टिस दोबारा शुरू की और वे अगली इंटरनेशनल पैरालिम्पिक तैराकी चैम्पियशिप की तैयारी कर रही हैं।
125 मैडल जीतकर सुयश ने अपने पिता का सपना पूरा किया

सुयश नारायण जाधव आज अपने तैराकी के दम पर पुणे में जिला खेल अधिकारी हैं। 2004 में उनके भाई की शादी के दौरान करंट लगने से उनके दोनों हाथ काटने पड़े थे। वे स्वीमिंग तो बचपन से करते थे, लेकिन इस हादसे ने उनकी जिंदगी बदल दी थी। सुयश बताते हैं कि उनके पिता नारायण जाधव ने उन्हें हिम्मत दी कि मैं बिना हाथ के भी कुछ भी कर सकता हूं। सुयश ने बताया कि उनके पिता स्वीमर थे और नेशनल लेवल पर मैडल जीतना चाहते थे, उन्होंने मुझे अपना सपना बताया और उनका सपना पूरा करना मेरा उद्देश्य बन गया। सुयश इंटनरेशनल लेवल पर 5 गोल्ड सहित 21 मैडल जीत चुके हैं और राष्ट्रीय और स्टेट चैंपियनशिप सभी मिलाकर अब तक 125 मैडल जीत चुके हैं।
डेढ़ साल की उम्र से तैरना शुरू किया

19 साल की देवांशी सतीजा बताती हैं कि उन्होंने डेढ़ साल की उम्र से ही तैरना शुरू कर दिया था। उनमें दिव्यांगता जन्म के साथ ही थी, लेकिन घर में उन्हें अच्छा माहौल मिला। देवांशी बताती हैं कि उन्होंने बहन को देखकर स्वीमिंग सीखना शुरू किया। इंटरनेशनल लेवल पर गोल्ड जीतने वाली वे सबसे कम उम्र की पहली महिला तैराक हैं। वे 15 साल की थीं तो उन्होंने इंटरनेशनल लेवल पर पहला गोल्ड मैडल जीता था।
देश के पहले दिव्यांग तैराक जिसे मिला तेनजिंग नोर्गे राष्ट्रीय साहसिक पुरस्कार
ग्वालियर मध्यप्रदेश के रहने वाले सतेंद्र सिंह दोनों पैरों से बामुश्किल चल पाते हैं। उन्होंने बताया कि बचपन में गांव के पास वेसली नदी में तैरते रहते थे। गांव वाले दिव्यांगता पर ताने मारते थे, लेकिन उन्होंने कभी खुद को निराश नहीं होने दिया। 2007 में डॉ. वीके डबास से मिले और फिर जिंदगी को मिशन और मंजिल मिल गयी।
सतेंद्र बताते हैं कि डबास सर के नेतृत्व में तैराकी सीखकर 2009 से राष्ट्रीय पैरालम्पिक में एक के बाद एक 24 गोल्ड मैडल जीत चुका हूं। जून 2018 को अपनी पैरा रिले टीम के माध्यम से इग्लिश चैनल को तैरकर पार किया। अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर पैरालिम्पिक तैराक चैंपियनशिप में एक गोल्ड के साथ तीन मेडल हासिल किये है। राज्य सरकार ने विक्रम अवार्ड से नवाज़ा। वर्ष 2020 में राष्ट्रपति ने तेनजिंग नोर्गे राष्ट्रीय साहसिक पुरस्कार से सम्मानित किया। यह पुरस्कार पहली बार किसी दिव्यांग पैरा तैराक खिलाडी को दिया गया है। वर्तमान में इंदौर में कमर्शियल टैक्स विभाग के अधीन कार्यरत है
पहले दिन राजस्थान के पैरा तैराकों ने 8 गोल्ड और 1 सिल्वर जीते
आज की प्रतियोगिता में 24 इवेंट हुए। S-1 से लेकर S-10 शारिरिक असक्षम दिव्यांग, S-11,S-12 के नेत्रहीन एवं S-14 बौद्धिक अक्षम के बालक बालिकाओं ने 23 प्रदेशों से भाग लिया। जिसमें राजस्थान के 15 स्विमर ने हौसला दिखाया। 100मीटर बेक और फ्री स्टाइल दोनों में किरण टांक ने 2 गोल्ड,तथा साधना मलिक, जिया गमनानी, कंचन बाला ने फ्री स्टाइल में 1-1 गोल्ड जीते। जूनियर गर्ल्स S-10 100 मीटर बेक स्टोक में सरोज ने व पूजा ने S-9 में गोल्ड पर कब्जा किया। पुरुषों में उदयपुर से जगदीश तेली ने S-9श्रेणी 100 मीटर बेक मेन्स में सिल्वर मेडल जीता और अपनी प्रतिभा से सबका मन भी जीत लिया।


