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यूआईटी से हस्तांतरित हुए खाली भूखंड खूर्द बूर्द होने के मामले में बनी कमेटी भंग

Devendra Sharma by Devendra Sharma
March 15, 2022
Reading Time: 1 min read
nagar nigam


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निगम की जांच कमेटी ने मेयर को सौंपी रिपोर्ट, यूआईटी को ही बता दिया जिम्मेदार

उदयपुर(एआर लाइव न्यूज)। यूआईटी से नगर निगम को हस्तांतरित हुए रिक्त भूखंडों में से कई भूखंड के फर्जी दस्तावेजों के आधार पर खूद बूर्द होने के मामले में जांच पूरी होने के बाद मेयर जीएस टांक ने मंगलवार को यह कमेटी भंग कर दी। मेयर ने ही यह कमेटी बनाई थी।

रिक्त भूखंड जांच कमेटी की मंगलवार को निगम में हुई बैठक में प्रकरण की समस्त जांच कर निगम अधिकारियों द्वारा अपनी रिपोर्ट कमेटी अध्यक्ष पारस सिंघवी को प्रस्तुत की। यह रिपोर्ट सिंघवी ने मेयर जीएस टांक को पेश की। इसके बाद मेयर ने अब इस कमेटी का औचित्य नहीं होने का तर्क देते हुए इसको भंग कर दिया। सिंघवी ने कहा कि 272 भूखण्डों की सूची के सम्बध में कोई भी तथ्यात्मक प्रमाणिकता नहीं है। निगम ने हर तथ्य को सामने रख जांच की है

जांच कमेटी का तर्क :

जांच कमेटी के अध्यक्ष एवं डिप्टी मेयर ने बताया कि यूआईटी की विभिन्न योजनाओं में 6046 भूखण्डो की पत्रावलियां नगर निगम में हस्तान्तरित हुई। जबकि प्रोपट्री रजिस्टर अनुसार कुल प्रविष्टिया 12115 उपलब्ध हैं। इससे यह कही पर भी स्पष्ट नहीं हो सकता कि शेष सभी भूखण्डों पर अवैध कब्जे किये गए हो। क्योंकि उक्त हस्तान्तरित भूखण्डों के अतिरिक्त शेेष भूखण्ड निजी खातेदारी भूमि होकर यूआईटी द्वारा 90 ख की कार्यवाही पूर्व में भी की गई हैं। नगर निगम को इन सभी योजनाओं का हस्तान्तरण वर्ष 2004 में किया गया था। उन योजनाओं में से नीमचमाता योजना, किशन पोल योजना आदि में नगर निगम को हस्तान्तरित पत्रावलियों के अतिरिक्त क्षैत्र योजना क्षैत्र के रूप में विकसित ही नहीं हुए है। सेक्टर 3, 4, 5, 6 योजना क्षेत्रों में यूआईटी से जिन भूखण्ड़ों की पत्रावलियां हस्तान्तरित नहीं हुई उन सभी भूखण्डों के सम्बन्ध में मौके का भौतिक सत्यापन करवाया गया। ऐसे अहस्तान्तरित भूखण्डों मे अधिकाश भूखण्डों पर यूआईटी द्वारा नगर निगम को हस्तांतरण के पश्चात पट्टे आवंटन जारी किए गए।

यूआईटी से हस्तान्तरित योजना में भी नगर निगम को अभी तक हस्तान्तरित एंव अहस्तान्तरित क्षेत्रों का वर्गीकरण यूआईटी द्वारा उपलब्ध नहीं करवाया गया। जबकि योजना अधिसूचित होने के उपरान्त उनमें संशोधन किए गए। नगर निगम के पास हस्तान्तरण के पश्चात संषोधित ले-आउट की कोई जानकारी उपलब्ध नही हैं। सेक्टर 3,सेन्ट्रल एरिया योजना क्षेत्र ब्ल्यूप्रिन्ट में दर्शाए गए उद्यान एवं रिजर्व क्षेत्रों में भी यूआईटी द्वारा हस्तान्तरण पश्चात भी ले आउट स्वीकृत किए गए हैं। सिंघवी ने सख्त लहजे में कहा कि 272 भूखण्डों की सूची के सम्बध में कोई भी तथ्यात्मक प्रमाणिकता नहीं है। केवल शहर की जनता के मन में भ्रामकता पैदा करने एवं निजी हित को साधने के लिए इस तरह के हथकंडे अपनाए जा रहे हैं। इस संबंध में मेयर द्वारा यूआईटी को पत्र लिखकर भी जानकारी मांगी गई,लेकिन यूआईटी द्वारा यह स्पष्ट किया गया कि तथा कथित 272 भूखण्डो की कोई सूची यूआईटी के पास उपलब्ध नहीं है, एवं प्रोपर्टी रजिस्टर के अवलोकन से ही रिक्त भूखण्डों का पता लगाया जा सकता हैै।

यूआईटी पर ही डाली जिम्मेदारी

जांच कमेटी अध्यक्ष सिंघवी का तर्क है कि यूआईटी द्वारा नगर निगम को प्रेषित प्रत्युत्तर में साबित हो रहा है जिन भूखंडों के संबंध में कूटरचित आवंटन पत्र राशि जमा संबंधित कार्यालय टिप्पणी पर तैयार की गई है उनकी सत्यता की जांच के लिए यूआईटी ही मूल रूप से सक्षम है। क्योंकि उक्त कूट रचित दस्तावेज पर यूआईटी के अधिकारी कर्मचारी के मोहर हस्ताक्षर किए गए हैं जो कि तत्कालीन समय उक्त पदों पर पदस्थापित थे या नहीं इसकी पुष्टि यूआईटी द्वारा ही की जा सकती है। नगर निगम अपने स्तर पर कोई जांच नहीं कर सकता है। सिंघवी ने बताया कि यूआईटी की विवरणिका के अतिरिक्त दर्ज पत्रावलियों के संचालन एवं संधारण के लिए संबंधित बाबूओं के विरूद्ध नियमानुसारअनुशासनात्मक कार्यवाही की गई है।

सिंघवी बोले,निगम ने तो कर दी है यह कार्रवाई

सिंघवी ने बताया कि जांच कमेटी द्वारा कुल 41 प्रकरणों को संदेहास्पद माना गया है, इसमें 13 प्रकरणों की लीज डीड निरस्त की गई, 13 प्रकरणों में यूआईटी से कुल राशि जमा की पुष्टि की प्राप्ति प्राप्त हुई हैए वही 28 प्रकरणों में यूआईटी से मूल राशि जमा की पुष्टि शेष है। कुल 41 में से 12 पत्रावली यूआईटी से प्राप्त हुई है। कमेटी द्वारा अभी तक 16 प्रकरणों में एफ आई आर दर्ज करवाई जा चुकी है। उक्त सभी पत्रावलियों में नगर विकास प्रन्यास को मूल जमा की पुष्टि हेतु पत्र प्रेषित किये गए हैए जिनके प्रत्युत्तर आने पर नियमानुसार कार्यवाही की जावेगी।

ऐसी पत्रावलियां जिनको नगर निगम में फर्जी दस्तावेज के साथ प्रस्तुत किया गया है ऐसे समस्त 14 प्रस्तुतकर्ताओं के खिलाफ भी नगर निगम द्वारा एफ आई आर दर्ज करवाई जा चुकी है। इसमें निगम द्वारा सख्त कार्रवाई की जाएगी। यूआईटी से हस्तांतरित पत्रावलीयो के अतिरिक्त शेष रहे सभी क्षेत्रों का निगम द्वारा भौतिक सत्यापन कर रिक्त रहे भूखंडों पर नगर निगम स्वामित्व के बोर्ड लगाए जा रहे है। शेष रहे रिक्त भूखंडों में नियमानुसार जांच कर नीलामी की कार्रवाई की जाएगी।

जांच कमेटी अध्यक्ष ने शिकायकर्ता पर ही उठा दिए सवाल

जांच कमेटी बैठक में पारस सिंघवी ने कहा कि महापौर गोविंद सिंह टाक द्वारा गठित जांच समिति की दूसरी बैठक में शिकायत कर्ता द्वारा यह कहा गया था कि उनके द्वारा 272 प्लॉट प्रकरण में सम्बन्धित पत्रावलियां एवं इनडेक्स की प्रतिलिपियां वर्ष 2010 से 2014 में सूचना के अधिकार अधिनियम के तहत प्राप्त कर ली गई थी, यदि शिकायत कर्ता को यह तथ्य उस समय से ज्ञात था एवं उनके पास उक्त भूखण्डों से सम्बन्धित पत्रावलियों की प्रतिलिपियां थी तो वर्ष 2021 तक उनके द्वारा उक्त तथ्यों दस्तावेजों को प्रकट क्यों नही किया गया यह भी जांच एवं विचार का बिन्दु है।

बैठक में भी शिकायतकर्ता से पूछने पर इस प्रकरण में कभी कोई सूची प्रस्तुत नहीं की गई बल्कि समय-समय पर कुछ भूखंडों के बारे में बताया जा रहा है इससे यह ज्ञात होता है कि या तो शिकायतकर्ताके पास ऐसी कोई सूची उपलब्ध नहीं है अथवा उसकी सत्यता प्रमाणित नहीं है अन्यथा उनके द्वारा संपूर्ण तथ्य एक बार में प्रस्तुत किए जाने थे उपरोक्त जांच एवं विश्लेषण से यह प्रकट हो रहा है कि तथाकथित 272 भूखंडों की सूची के संबंध में प्रमाणिकता नहीं है।

Tags: Municipal Corporation udaipuruit udaipur

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