सुविवि का दीक्षांत समारोह : 105 स्वर्ण पदक और 180 पीएचडी डिग्रियां बांटी
उदयपुर(एआर लाइव न्यूज)। राज्यपाल कलराज मिश्र ने कहा है कि विश्वविद्यालयों को चाहिए कि वे बदलते वक्त के साथ अपने पाठ्यक्रम भी समय-समय पर अपडेट करते रहें। पुस्तकालयों में भी नवीनतम ज्ञान की पुस्तकों का समावेश करें। सुखाडिय़ा विश्वविद्यालय उच्च शिक्षा का उत्कृष्ट केन्द्र बने,इसके लिए यहां ऐसे विषयों पर शोध की परम्परा विकसित की जानी चाहिए, जिनका दायरा व्यापक हो।
राज्यपाल मिश्र ने बुधवार को विवेकानंद सभागार में मोहनलाल सुखाडिय़ा विश्वविद्यालय के 29 वें दीक्षांत समारोह में यह बात कही। राज्यपाल ने 105 स्वर्ण पदक और 180 पीएचडी डिग्रियां प्रदान की। जिसमें कुल 51 छात्राओं ने गोल्ड मेडल प्राप्त किया। इनमें 8 विद्यार्थियों को चांसलर मेडल मिला जिनमे 4 छात्राएं थीं। गत शैक्षणिक सत्र में उत्तीर्ण हुए 45861 स्नातक एवं 13132 स्नातकोत्तर विद्यार्थियों को डिग्री प्रदान करने का अनुमोदन भी राज्यपाल ने किया।
राज्यपाल ने कहा कि कोरोना महामारी के दौरान सूचना तकनीकी की जो भूमिका सामने आई है, उसने परम्परागत शिक्षण प्रविधियों के समानान्तर एक नया मार्ग खोल दिया है। स्वर्ण पदक में छात्राओं की संख्या आशानुरूप होने पर राज्यपाल ने कहा कि छात्राएं छात्रों से आगे निकल रही है यह बालिका शिक्षा के लिए शुभ संकेत है। उच्च शिक्षा मंत्री राजेंद्र सिंह यादव ने कहा कि भविष्य में शैक्षिक चुनौतियों से निपटने के लिए विश्वविद्यालय तकनीकी सहयोग के जरिए नवाचार युक्त तैयारी करें, ताकि रोजगार की नई संभावनाएं पैदा की जा सके। संचालन रजिस्ट्रार सीआर देवासी ने किया।
सुविवि को विश्व स्तरीय बनाना ही लक्ष्य : कुलपति

कुलपति अमेरिका सिंह ने कहा कि सुविवि को विश्व स्तरीय बनाना ही मेरा लक्ष्य हैं। नाथद्वारा के पास चित्र बिलोदा गांव में विश्वविद्यालय का नया कैंपस बनाया जा रहा है जो अगले शिक्षा सत्र से शुरू हो जाएगा। ऑनलाइन समारोह से जुड़े उच्च शिक्षा संस्थान मैरीलैंड यूएसए के सलाहकार डॉ.फ्रैंक एफ इस्लाम ने छात्रों से कहा कि कुछ भी असंभव नहीं है। आप असंभव को संभव कर सकते हैं। भारतीय चिकित्सा अनुसंधान परिषद के महानिदेशक प्रो.बलराम भार्गव ने कहा कि हम सभी को अपनी शिक्षा को देश के नव निर्माण और समाज के उन्नयन में लगाना चाहिए
दीक्षांत रजिस्टर शुरू करने वाला पहला विश्वविद्यालय बना

कुलपति ने बताया कि पहली बार दीक्षांत रजिस्टर की शुरुआत भी की गई जिसमें दीक्षांत अवसर पर दी गई डिग्रियों एवं स्वर्ण पदक विजेताओं की सूचना दर्ज की गई। यह अपनी तरह की पहल करने वाला पहला विश्वविद्यालय है।


