संभाग स्तरीय चर्चा बैठक में आए कई सुझाव
उदयपुर,(एआर लाइव न्यूज)। राजस्थान में आगामी बजट सत्र का पहली बार कृषि बजट अलग से पेश होगा। बेहतर कृषि बजट तैयार करने के लिए सरकारन ने राज्य भर में इसको लेकर सुझाव लेने शुरू कर दिए हैं। इसी क्रम में गुरूवार को उदयपुर में संभागस्तरीय चर्चा बैठक हुई। इसमें कृषि मंत्री लालचंद कटारिया ने वर्चुल माध्यम से हिस्सा लिया। बैठक में शामिल विशेषज्ञों ने उदयपुर संभाग के जनजाति क्षेत्र की भौगोलिक परिस्थितियों के अनुसार सुझाव दिए।
मंत्री लाल चंद कटारिया ने कहा कि कृषि से संबंधित विभिन्न विभागों, काश्तकारों, जनप्रतिनिधियों, प्रबुद्धजनों आदि से रूबरू होकर सुझाव लिए जा रहे हैं और इन सुझावों के आधार पर आगामी बजट में कृषक हितकारी बजट प्रस्तुत किया जाएगा ताकि अधिकाधिक किसानों का इसका लाभ मिल सके।
ये सुझाव आए

मेवाड़ अंचल के लिए आए सुझाव
मेवाड़ अंचल में पशुपालन को बढ़ावा देने के लिए उन्नत नस्ल के पशु उपलब्ध कराने, कम ब्याज दर पर ऋण उपलब्ध कराने, ऋण प्रक्रिया को सरल बनाने, पशुओं के लिए चारा-पानी-दवाई की सुविधाएं, बीमा सुविधा देने के साथ तहसील स्तर पर बायोगैस प्लांट बनाने का सुझाव दिया।
पॉली हाउस टारगेट बढ़ाने, कृषि यंत्रों पर अनुदान जल्द उपलब्ध कराने, तारबंदी एकल कृषकों को उपलब्ध कराने, बीज मिनीकिट की संख्या बढ़ाने, टीएसपी के सामान्य कृषकों को भी अनुदान उपलब्ध कराने, न्यूनतम समर्थन मूल्य पर खरीद लेम्प्स स्तर पर करवाने, झाड़ोल में उद्यानिकी व सफेद मूसली की खेती को बढ़ावा देने, कूट्टी काटने की मशीन व कल्टीवेटर पर छूट देने, सब्जी बीज दर निर्धारित करने, जिप्सम उपलब्ध कराने सुझाव आए।
पंचायत समिति स्तर पर मंडियों की स्थापना करने, पाइप लाइन पर सब्सिडी बढ़ाने, उदयपुर में पशु आहार सयंत्र स्थापित करने, दुग्ध अनुदान 2 रुपये से 5 रुपये करने, कामधेनु योजना में जिले में लाभार्थियों की संख्या 1 के स्थान पर 100 करने, कृषि व वन मंडी बनाने, मधुमक्खी पालन को प्रोत्साहित करने, अपनी मंडी योजना पुनः शुरू करने, पशुपालकों को केसीसी देने, वर्मी बेड व फव्वारा अनुदान कम जमीन पर उपलब्ध कराने, पशुओं के लिए तहसील स्तर पर मोबाईल एंबुलेंस उपलब्ध कराने, गुलाब की खेती को प्रोत्साहित करने, जैविक उत्पाद प्रमाणीकरण लेब स्थापित करने के सुझाव दिए।
वागड़ अंचल के लिए आए सुझाव

वागड़ अंचल के कृषकों ने माही नहर के सुदृढ़ीकरण करवाने, पहाड़ियों पर एनीकट बनाने, परंपरागत अनाज जैसे माल, कुरी, बटी, कोदरा के उत्पादन को प्रोत्साहित करने, बांसवाड़ा में कृषि महाविद्यालय खोलने, जायद मूंग की फसल को प्रोत्साहित करने, रबी मक्का के मिनिकिट वितरण प्रारंभ करने, बांसवाड़ा में सीड टेस्टिंग लेब व कोल्ड स्टोरेज स्थापित करने, कुशलगढ़ क्षेत्र में माही के पानी को पहुंचाने, नॉन कमांड क्षेत्र में कुओं में ब्लास्टिंग करवाने सुझाव दिए।
पॉली हाउस के लिए एग्रोनॉमिस्ट लगाने, पशु आहार गुणवत्ता संयंत्र स्थापित करवाने, डेयरी के माध्यम से हरे चारे के मिनीकिट देने, कृषि विज्ञान केन्द्रों व डूंगरपुर के कृषि महाविद्यालय को सुदृढ़ बनाने, डूंगरपुर में हल्दी व अदरक की खेती को प्रोत्साहित करने जैसे कई सुझाव दिए गए।
इन्होंने चर्चा बैठक में लिया हिस्सा
बैठक में ये शामिल हुए
चर्चा बैठक में कृषि विभाग के प्रमुख शासन सचिव दिनेश कुमार, रजिस्ट्रार मुक्तानंद अग्रवाल, संभागीय आयुक्त राजेन्द्र भट्ट, एमपीयूएटी के कुलपति एनएस राठौड़, कृषि विपणन निदेशक सोहनलाल शर्मा तथा अतिरिक्त संभागीय आयुक्त एलएन मंत्री, सभी जिलों से प्रगतिशील कृषक, प्रगतिशील पशुपालक, कृषि प्रसंस्करण सहित कृषि उद्यमों के प्रमुख प्रतिनिधि, सिंचाई जल प्रबन्धन इकाइयों के प्रतिनिधि, प्रगतिशील मत्स्य पालक, कृषक उत्पादन संगठनों के प्रतिनिधि, सहकारी समितियों के प्रतिनिधियों ने भाग लिया और कृषि, पशुपालन और डेयरी तंत्र को सुदृढ़ बनाने के लिए कई महत्वपूर्ण सुझाव दिए।


