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लक्ष्मी विलास पैलेस विनिवेश मामला: हाईकोर्ट से लक्ष्मी विलास पैलेस होटल को सीज करने के आदेश पर रोक

arln-admin by arln-admin
September 22, 2020
Reading Time: 1 min read
government take possession of laxmi vilas hotel udaipur


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विपक्षियों के गैर जमानती-वारंट जमानती-वारंट में तब्दील

उदयपुर/जोधपुर,(ARLive news)। लक्ष्मी विलास पैलेस विनिवेश मामले में जोधपुर हाईकोर्ट से आज मंगलवार को भारत होटल्स की प्रबंध निदेशक ज्योत्सना, विनिवेश मंत्रालय के पूर्व सचिव पूर्व आईएएस बैजल और लाजार्ड इंडिया लिमिटेड नई दिल्ली के तत्कालीन प्रबंध निदेशक आशीष गुहा को बड़ी राहत मिली है। हाईकोर्ट के न्यायाधीश दिनेश मेहता ने इनकी याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए सीबीआई कोर्ट के आदेश पर अंतरिम रोक लगा दी है।

हाईकोर्ट ने इन विपक्षियों के विरूद्ध सीबीआई कोर्ट की ओर से जारी किए गए गैर जमानती वारंट को जमानती वारंट तब्दील कर दिया है, साथ ही लक्ष्मी विलास पैलेस होटल को सीज करने के आदेश पर रोक लगा दी है। इससे इन तीनों की गिरफ्तारी का संकट टल गया है।

हालां कि हाईकोर्ट के आदेश की विस्तृत कॉपी जारी होने के बाद ही पता चलेगा कि “लक्ष्मी विलास पैलेस होटल को सीज करने के आदेश पर रोक” लगने पर अब क्या व्यवस्था रहेगी।

पूर्व केन्द्रीय मंत्री की याचिका पर नहीं हुई सुनवाई

हाईकोर्ट में पूर्व केन्द्रीय मंत्री अरूण शौरी की ओर से प्रस्तुत याचिका पर सुनवाई नहीं हो सकी। अरूण शौरी की याचिका रजिस्टर्ड नहीं थी, ऐसे में हाईकोर्ट ने इस पर सुनवाई करने से इनकार कर दिया।

वकील साल्वे ने लंदन से वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए पैरवी की

हाईकोर्ट में भारत होटल्स लिमिटेड की प्रबंध निदेशक ज्योत्सना की ओर से सुप्रीम कोर्ट के सीनियर वकील हरीश साल्वे व राजस्थान हाईकोर्ट के वकील उमेश कांत ने पैरवी की। साल्वे अभी लंदन में हैं, तो उन्होंने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए पैरवी। साल्वे ने हाईकोर्ट में कहा सीबीआई कोर्ट का आदेश सीबीआई जांच एजेंसी के जुटाए साक्ष्यों और क्लोजर रिपोर्ट के बिलकुल विपरीत और त्रुटिपूर्ण है।

उन्होंने कहा कि सीबीआई द्वारा 13 अगस्त 2019 को पेश की गई फाइनल रिपोर्ट में स्पष्ट उल्लेख किया गया है, कि इस मामले में अभियोजन पक्ष के पास कोई साक्ष्य नहीं हैं। सीबीआई कोर्ट ने उसे अस्वीकार करते हुए जांच करने के आदेश दिए। इसके बाद जांच कर 5 जून 20 को सीबीआई ने फिर इसमें पूरक फाइनल रिपोर्ट पेश की और केस बंद करने का आग्रह किया। इसके बावजूद उसे स्वीकार नहीं कर याचिकाकर्ता के खिलाफ क्रिमिनल केस दर्ज करने तथा गिरफ्तारी वारंट से उपस्थित करने के आदेश दिए जो कि पूरी तरह से विधि विरूद्ध है।

समन जारी करने से पहले ही गिरफ्तारी वारंट जारी नहीं किया जा सकता

पूर्व आईएएस बैजल की ओर से सुप्रीम कोर्ट के वरिष्ठ अधिवक्ता मुकुल रोहतगी व राजस्थान हाईकोर्ट के अधिवक्ता निशांत बोड़ा ने पैरवी की। इन्होंने कहा कि याचिकाकर्ता वर्तमान में 77 साल के है तथा आईएएस से रिटायर्ड है। 35 साल सरकार को बेदाग सेवाएं दी है। वे ट्राई के चेयरमैन, मध्यप्रदेश में चुनाव आयुक्त व विनिवेश विभाग में सचिव जैसे कई महत्वपूर्ण पदों पर रहे।

अधिवक्ता ने इसके बाद तर्क दिया कि बैजल को होटल के विनिवेश के मामले में गिरफ्तारी वारंट जारी नहीं किया जा सकता है। उन्होंने सुप्रीम कोर्ट के पूर्व में जारी किए गए एक आदेश का हवाला देते हुए कहा कि “इंदरमोहन गोस्वामी बनाम उत्तराखंड तथा रघुवंश देवचंद भसीन बनाम महाराष्ट्र मामले में सुप्रीम कोर्ट ने निर्धारित कर रखा है, कि समन जारी करने से पूर्व प्रथम अवस्था में गिरफ्तारी वारंट जारी नहीं किया जा सकता है। चूंकि गैर जमानती वारंट का निष्पादन सीधे रूप से किसी व्यक्ति की स्वतंत्रता का हनन करने से जुड़ा है।”

अधीनस्थ कोर्ट ने बिना दिमाग का इस्तेमाल किए गिरफ्तारी वारंट जारी कर दिए : अधिवक्ता

अधिवक्ता मुकुल रोहतगी ने यह भी तर्क दिया कि ऐसे परिस्थितियों में गैर जमानती वारंट जारी किया जाता है, जब व्यक्ति के स्वेच्छा से कोर्ट में उपस्थित नहीं होने की आशंका हो या पुलिस समन देने के लिए ढूंढ़ने में असमर्थ है या उस व्यक्ति को तुरंत कस्टडी में नहीं लिया तो वह किसी को नुकसान पहुंचा सकता है। उनके याचिकाकर्ता के साथ ऐसी कोई परिस्थिति नहीं थी। अधीनस्थ कोर्ट ने बिना दिमाग का इस्तेमाल किए गिरफ्तारी वारंट के आदेश जारी कर दिए जो कि अनुचित है, इसलिए 15 सितंबर को जारी किए गए आदेश को अपास्त किया जाए।

याचिकाकर्ताओं का पक्ष सुनने के बाद हाईकोर्ट के न्यायाधीश दिनेश मेहता ने 15 सितंबर को सीबीआई कोर्ट द्वारा दिए गए आदेश पर अंतरिम रोक लगा दी। कोर्ट उनके विरूद्ध जारी गैर जमानती वारंट को जमानती वारंट में तब्दील किया है, इससे अब इन तीनों विपक्षियों से इनकी गिरफ्तारी का संकट टल गया है, साथ ही कोर्ट लक्ष्मी विलास पैलेस होटल को सीज करने के आदेश पर रोक लगा दी है।

यह था सीबीआई कोर्ट का 15 सितंबर को जारी आदेश

सीबीआई कोर्ट ने गत 15 सितंबर को प्रसंज्ञान लेते हुए सीबीआई कोर्ट की क्लोजर रिपोर्ट को स्वीकार करने से इनकार कर दिया था। सीबीआई कोर्ट ने 252 करोड़ रुपए के लक्ष्मी विलास पैलेस होटल को महज 7.50 करोड़ रुपए में बेचकर सरकार को 244 करोड़ रुपए का नुकसान पहुंचाने के मामले में पूर्व केंद्रीय मंत्री अरुण शौरी, भारत होटल्स लिमिटेड की प्रबंध निदेशक ज्योत्सना सूरी, पूर्व आईएएस अफसर प्रदीप बैजल, आशीष गुहा व कांतिलाल कर्मसे के खिलाफ आपराधिक मुकदमा दर्ज करने के आदेश दिए थे। इसके अलावा इन सभी को गिरफ्तारी वारंट से तलब भी किया था। सीबीआई का आदेश आते ही हड़कंप मच गया। कोर्ट के आदेश के बाद उदयपुर कलेक्टर ने होटल को अपने पजेशन में ले लिया और संपत्ति का सत्यापन का काम चल रहा है।

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