कानपुर,(ARLive news)। उत्तर प्रदेश के कानपुर के चौबेपुर में गुरूवार देर रात हिस्ट्रीशीटर को पकड़ने गयी पुलिस टीम पर बदमाशों ने अंधाधुंध फायरिंग कर हमला कर दिया। हमले में एक डीएसपी, तीन थानेदार सहित 8 पुलिसकर्मियों की मौत हो गयी है और 7 से अधिक पुलिसकर्मी घायल है। इस मुठभेड़ में हिस्ट्रीशीटर विकास दुबे के दो साथी भी मारे गए हैं।
घटना की सूचना राज्य के पूरे पुलिस महकमे में आग की तरह फैल गयी। पुलिस में इस घटना को लेकर काफी रोष है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने एसटीएफ की टीम को कार्रवाई के निर्देश दिए हैं। पुलिस ने यूपी के सभी बॉर्डर सील कर दिए हैं।
ऐसे चला पूरा घटनाक्रम
जानकारी के अनुसार हिस्ट्रीशीटर विकास दुबे पर करीब 60 आपराधिक मुकदमें दर्ज हैं। वह कुछ दिन पहले ही जमानत पर रिहा हुआ था। आते ही उसने वारदातें करना शुरू कर दिया था, जिससे वह हत्या के प्रयास के मामले में वांछित था। गुरूवार रात को बिल्हौर पुलिस को विकास दुबे के चौबेपुर के दिकरू गांव के एक घर में छुपे होने की सूचना मिली। इस पर बिल्हौर डीएसपी देवेन्द्र मिश्रा ने चौबेपुर थाना पुलिस टीम के साथ दिकरू गांव में दबिश दी। पुलिस को रोकने के लिए बदमाषों ने पुलिस जीप के आगे जेसीबी लगा दी। पुलिस कुछ करती इससे पहले ही घर की छत से बदमाशों ने पुलिस पर अंधाधुंध फायरिंग करनी शुरू कर दी। पुलिस ने काउंटर में फायरिंग की। इसमें दो बदमाश मारे गए, लेकिन हिस्ट्रीशीटर और उसके अन्य साथी मारे गए और घायल पुलिसकर्मियों से उनके हथियार लूट कर मौके से फरार हो गए।
ये पुलिसकर्मी हुए शहीद
बिल्हौर के सीओ देवेंद्र कुमार, शिवराजपुर के थाना प्रभारी महेश चंद्र यादव व सब इंस्पेक्टर नेबू लाल और मंधना के चौकी इंचार्ज अनुप कुमार, कांस्टेबल सुल्तान सिंह, कांस्टेबल राहुल, कॉन्स्टेबल जितेंद्र और कांस्टेबल बबलू की मौत हो गई है। इसके अलावा बिठूर थाना प्रभारी कौशलेंद्र प्रताप सिंह समेत 7 पुलिसकर्मियों को गोली लगी है। इनका इलाज रीजेंसी हॉस्पिटल में चल रहा है।
प्रधान और जिला पंचायत सदस्य भी रह चुका है विकास दुबे
विकास उत्तरप्रदेश का कुख्यात बदमाश है। इसके खिलाफ थाने में घुस कर हत्या करने जैेसे संगीन अपराध सहित 60 से अधिक आपराधिक मामले दर्ज हैं। एसटीएफ ने विकास दुबे को 31 अक्टूबर 2017 को लखनऊ के कृष्णानगर क्षेत्र से गिरफ्तार किया था। कानपुर पुलिस ने उसके खिलाफ 25 हजार का इनाम घोषित कर रखा था। वह कुछ दिन पहले जेल से बाहर आया था।
विकास ने 2001 में थाने में घुसकर भाजपा नेता और राज्यमंत्री संतोष शुक्ला की हत्या की थी। हालां कि कोई गवाह नहीं मिलने के कारण वह इस केस से बरी हो गया था।
अपने आपराधिक दबदबे के कारण पंचायत और प्रधान चुनावों में उसका राजनेताओं से भी मिलना-जुलना था। चुनाव में नेतओं के लिए कई काम करता था। थाने में हत्या के मामले के बाद उसने राजनीति में एंट्री की थी और वह प्रधान और जिला पंचायत सदस्य भी रह चुका है।


