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ब्रेकिंग- बीएन यूनिवर्सिटी 2013-14 भर्ती: नियुक्ति पाने वाले 100 से अधिक असि. प्रोफेसर सहित अन्य के दस्तावेजों की होगी जांच

भर्तियों में अधिकतर असिस्टेंट प्रोफेसर नियुक्त हुए थे : हरिओम की फर्जी मार्कशीट के बाद अब यूनिवर्सिटी एक्शन मोड में है

arln-admin by arln-admin
January 28, 2020
Reading Time: 1 min read
UdaipurBNUniversityFakeMarksheetCase


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उदयपुर,(ARLive news)। भूपाल नोबल (बीएन) यूनिवर्सिटी में 2013-14 में हुई भर्तियों में फर्जी मार्कशीट के जरिए सहायक लाइब्रेरियन पद पर नियुक्ति पाने वाले हरिओम सिंह शक्तावत के प्रकरण का खुलासा होने और भूपालपुरा थाने में एफआईआर दर्ज होने के बाद अब विश्वविद्यालय उस समय हुई सभी भर्तियों के दस्तावेजों (योग्यता, अनुभव संबंधी और शैक्षणिक दस्तावेज) की जांच कराएगा। इसके लिए एक हाई पावर कमेटी गठित होगी, वह कमेटी भर्ती में नियुक्ति पाने वाले 100 से अधिक असिस्टेंट प्रोफेसर्स सहित अन्य के दस्तावेजों की जांच करेगी।

जानकारी के अनुसार वर्ष 2013-14 में बीएन विश्वविद्यालय में 100 से अधिक भर्तियां हुई थीं, इसमें सबसे ज्यादा पोस्ट असिस्टेंट प्रोफेसर की थीं और कुछ पोस्ट नॉन टीचिंग स्टाफ एलडीसी सहित अन्य पदों की थी। हरिओम के मामले की जांच करने वाली कमेटी ने इन सभी 100 भर्तियों के दस्तावेजों ((योग्यता, अनुभव संबंधी और शैक्षणिक दस्तावेज) की जांच की आवश्यकता जतायी है और इसके लिए हाई पावर कमेट के गठन की अनुशंषा की है।

हाईपावर कमेटी गठित कर नियुक्ति पाने वालों के दस्तावेजों की जांच करवाएंगे

विश्वविद्यालय के रजिस्ट्रार रघुवीर सिंह चौहान ने बताया कि हरिओम सिंह शक्तावत 2014 से यूनिवर्सिटी में सहायक लाइब्रेरियन पद पर नियुक्त है। हरिओम सिंह शक्तावत के फर्जी मार्कशीट मामले की जांच करने वाली जांच कमेटी ने अपनी रिपोर्ट में चार बिंदुओं पर अनुशंषा की है। इसमें चौथी रिकमंडेशन यही है कि 2013-2014 की भर्तियों में विभिन्न पदों पर जितनी भी नियुक्तियां हुई हैं, उन सभी नियुक्ति पाने वालों के सभी दस्तावेजों की जांच होनी चाहिए और इन दस्तावेजों की जांच के लिए एक हाईपावर कमेटी भी गठित होनी चाहिए।

रजिस्ट्रार ने बताया कमेटी की सभी रिकमंडेशन पर एक-एक कर काम किया गया है। इस चौथी रिकमंडेशन पर ही काम होना बाकि है। विश्वविद्यालय और विद्या प्रचारणी सभा के चेयरमैन को इस बारे में अवगत करवाया जाएगा। ताकि कमेटी की रिकमंडेशन के अनुरूप हाई पावर कमेटी गठित हो सके और 2013-14 की भर्तियों में नियुक्ति पाने वाले सभी कैंडीडेट्स के समस्त दस्तावेजों की जांच हो सके।

जहां से पीएचडी और मास्टर डिग्री की उन्हें भी लिखेंगे

विश्वविद्यालय रजिस्ट्रार ने बताया कि भूपालपुरा थाने में हरिओम सिंह शक्तावत के खिलाफ फर्जी मार्कशीट से नियुक्ति पाने और 2014 से अब तक इस पद के लाभ पाने का मामला दर्ज करवाया गया है। गत वर्षों में विश्वविद्यालय को उसकी बेचलर ऑफ लाइब्रेरियन डिग्री के फर्जी होने की शिकायत मिली थी।

इस पर जांच कमेटी गठित की गयी थी। इस जांच कमेटी ने जून 2019 में डिग्री जारी करने वाले कोटा ओपन विश्वविद्यालय से उक्त रोल नंबर की जानकारी मांगने के लिए पत्र लिखा। कोटा ओपन विश्वविद्यालय ने जानकारी दी कि यह रोल नंबर और व्यक्ति रिकॉर्ड के अनुसार रजिस्टर्ड नहीं है। जांच कमेटी ने पाया कि हरिओम शक्तावत ने बैचलर ऑफ लाइब्रेरियन की फर्जी डिग्री के जरिए मास्टर ऑफ लाइब्रेरियन का कोर्स किया और फिर पेसिफिक यूनिवर्सिटी से इस सब्जेक्ट में पीएचडी भी कर ली। ऐसे में उसने जहां से मास्टर ऑफ लाइब्रेरियन और पीएचडी की है, उन्हें भी पत्र लिखेंगे, ताकि वे भी हरिओम के खिलाफ कानूनी कार्यवाही कर सकें।

जब हरिओम ने फर्जीवाड़ा किया तो दूसरे भी कर सकते हैं..!

2013-14 में हुई भर्तियों में विश्वविद्यालय को जिन मानकों का ध्यान रखकर भर्तियां करनी थी, उसमें कई पैरामीटर्स को पूरा नहीं किया गया था। सबसे महत्वपूर्ण यह है कि जितनी भी भर्तियां हुईं उसमें नियुक्ति पाने वालों के दस्तावेजों की जांच नहीं करवायी गयी थी।

हरिओम नियुक्ति पाने के बाद नौकरी कर रहा था। लेकिन उसकी मार्कशीट के फर्जी होने का किसी को पता नहीं चला। गत वर्षों में जब उसकी मार्कशीट के फर्जी होने की शिकायत हुई, तब काफी हड़कंप मचा और जांच कमेटी गठित हुई। जांच कमेटी  ने 2019 में कोटा ओपन विश्वविद्यालय से हरिओम की मार्कशीट की जानकारी मांगी तो मामला खुला। अगर शिकायत नहीं होती तो हरिओम जीवनभर इस पद पर काम कर समस्त परिलाभ प्राप्त करता रहता। सवाल यह है कि जब हरिओम ऐसा कर सकता है तो दूसरा कैंडीडेट क्यों नहीं कर सकता। इसलिए नियुक्ति पाने वाले सभी केंडीडेट्स के दस्तावेजों की जांच जरूरी हो गयी है।

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