नई दिल्ली,(ARLive news)। अयोध्या में विवादित स्थल पर मालिकाना हक से जुड़े केस में सुप्रीम कोर्ट ने शनिवार को फैसला सुनाया। सीजेआई सहित पांच जजों की बैंच ने फैसला देते हुए कहा की राम मंदिर वहीं बनेगा, मुस्लिमों के लिए दूसरी जगह पांच एकड़ जमीन दी जाएगी।
अयोध्या जमीन विवाद मामला देश के सबसे लंबे चलने वाले केस में से एक रहा है। मगर क्या आपको पता है कि इस विवाद की नींव कब पड़ी…? अयोध्या में विवाद की नींव करीब 400 साल पहले पड़ी थी, जब वहां मस्जिद का निर्माण हुआ। आइए आपको बताते हैं कि अयोध्या में विवाद कब से शुरू हुई और कब-कब क्या हुआ…?
400 साल, तब से अब तक
1528 : मुगल बादशाह बाबर ने (विवादित जगह पर) मस्जिद का निर्माण कराया। इसे लेकर हिंदुओं को दावा है कि यह जगह भगवान राम की जन्मभूमि है और यहां पहले एक मंदिर था।
1853-1949 तक : 1853 में इस जगह के आसपास पहली बार दंगे हुए। 1859 में अंग्रेजी प्रशासन ने विवादित जगह के आसपास बाड़ लगा दी। मुसलमानों को ढांचे के अंदर और हिंदुओं को बाहर चबूतरे पर पूजा करने की इजाजत दी गई।
1949 : असली विवाद शुरू हुआ 23 दिसंबर 1949 को, जब भगवान राम की मूर्तियां मस्जिद में पाई गईं। हिंदुओं का कहना था कि भगवान राम प्रकट हुए हैं, जबकि मुसलमानों ने आरोप लगाया कि किसी ने रात में चुपचाप मूर्तियां वहां रख दीं। यूपी सरकार ने मूर्तियां हटाने का आदेश दिया, लेकिन जिला मैजिस्ट्रेट के. के. नायर ने दंगों और हिंदुओं की भावनाओं के भड़कने के डर से इस आदेश को पूरा करने में असमर्थता जताई। सरकार ने इसे विवादित ढांचा मानकर ताला लगवा दिया।
कोर्ट में दाखिल हुई अर्जी
1950 : फैजाबाद सिविल कोर्ट में दो अर्जी दाखिल की गई। इसमें एक में राम लला की पूजा की इजाजत और दूसरे में विवादित ढांचे में भगवान राम की मूर्ति रखे रहने की इजाजत मांगी गई। 1959 में निर्मोही अखाड़ा ने तीसरी अर्जी दाखिल की।
1961 : यूपी सुन्नी वक्फ बोर्ड ने अर्जी दाखिल कर विवादित जगह के पजेशन और मूर्तियां हटाने की मांग की।
1984 : विवादित ढांचे की जगह मंदिर बनाने के लिए 1984 में विश्व हिंदू परिषद ने एक कमिटी गठित की।
1986 : यू. सी. पांडे की याचिका पर फैजाबाद के जिला जज के. एम. पांडे ने 1 फरवरी 1986 को हिंदुओं को पूजा करने की इजाजत देते हुए ढांचे पर से ताला हटाने का आदेश दिया।
1853 के बाद 1992 में दंगे भड़के
6 दिसंबर 1992 : बीजेपी, वीएचपी और शिवसेना समेत दूसरे हिंदू संगठनों के लाखों कार्यकर्ताओं ने विवादित ढांचे को गिरा दिया। देश भर में हिंदू-मुसलमानों के बीच दंगे भड़के गए, जिनमें 2 हजार से ज्यादा लोग मारे गए।
2002 : हिंदू कार्यकर्ताओं को ले जा रही ट्रेन में गोधरा में आग लगा दी गई, जिसमें 58 लोगों की मौत हो गई। इसकी वजह से हुए दंगे में 2 हजार से ज्यादा लोग मारे गए।
2010 : इलाहाबाद हाई कोर्ट ने अपने फैसले में विवादित स्थल को सुन्नी वक्फ बोर्ड, रामलला विराजमान और निर्मोही अखाड़ा के बीच 3 बराबर-बराबर हिस्सों में बांटने का आदेश दिया।
सुप्रीम कोर्ट की भूमिका शुरू हुई
2011 : सुप्रीम कोर्ट ने अयोध्या विवाद पर इलाहाबाद हाई कोर्ट के फैसले पर रोक लगाई।
2017 : सुप्रीम कोर्ट ने आउट ऑफ कोर्ट सेटलमेंट का आह्वान किया। बीजेपी के शीर्ष नेताओं पर आपराधिक साजिश के आरोप फिर से बहाल किए।
8 मार्च 2019 : सुप्रीम कोर्ट ने मामले को मध्यस्थता के लिए भेजा। पैनल को 8 सप्ताह के अंदर कार्यवाही खत्म करने को कहा।
1 अगस्त 2019 : मध्यस्थता पैनल ने रिपोर्ट प्रस्तुत की।
2 अगस्त 2019 : सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि मध्यस्थता पैनल मामले का समाधान निकालने में विफल रहा।
6 अगस्त 2019 : सुप्रीम कोर्ट में अयोध्या मामले की रोजाना सुनवाई शुरू हुई।
16 अक्टूबर 2019 : अयोध्या मामले की सुनवाई पूरी। सुप्रीम कोर्ट ने फैसला सुरक्षित रखा।
आज 9 नवंबर 2019 : सुप्रीम कोर्ट के पांच जाजों की बैंच ने फैसला सुनाया।
सुप्रीम कोर्ट का फैसला
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खबर स्त्रोत: जीएनएस न्यूज एजेंसी


