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देश पर गिरी है गाज..! क्यों मौन है सरकार ?

arln-admin by arln-admin
August 21, 2019
Reading Time: 1 min read
recession economy


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लकी जैन,(ARLive news)। देश में लोकसभा चुनाव बीते और “एक बार फिर मोदी सरकार” को आए हुए तीन महीने ही हुए हैं, कि देश को भयंकर मंदी का सामना करना पड़ रहा है। देश पर “बेरोजगारी की गाज गिरी गिर रही है। ऑटो मोबाइल इंडस्ट्री में लाखों युवाओं की नौकरियां जा चुकी हैं, देश की सबसे बड़ी रोजगार इंडस्ट्री टेक्सटाइल में मंदी इस चरम सीमा तक पहुंच गयी कि उनकी एसोसिएशन ने तो विज्ञापन छपवा कर मंदी को जगजाहिर कर दिया। अंतराष्ट्रीय स्तर पर रूपए की वेल्यू गिर रही है। देश आर्थिक मंदी से घिर चुका है। युवा बेरोजगार हो रहे हैं, लेकिन हमारी प्रिय सरकार चुप है। विपक्ष भाजपा सरकार की इस चुप्पी पर सवाल तो कर रहा है, लेकिन उसे कोई सुनने वाला नहीं।

हिंदुस्तान को युवाओं का देश कहा जाता है और आज की स्थितियों में देश का युवा बेरोजगार है, तो सवाल यह है कि क्या इसी बेरोजगार हिंदुस्तान के लिए जनता ने सरकार को पूर्ण बहुमत के साथ दोबारा चुना था ?

“बेरोजगारी का मुद्दा जब भी राष्ट्रीय स्तर पर उठा है, मोदी सरकार ने कभी एयर स्ट्राइक, तो कभी आर्टिकल 370 को निष्क्रिय करने जैसे हीरो बनने वाले एक्शन कर युवाओं सहित देश की जनता का ध्यान राष्ट्रवाद में लगा दिया, ताकि बेरोजगार हो रहे युवा सरकार से कोई सवाल न पूछ सकें..!“ सरकार ने बालाकोट पर एयर स्ट्राइक कर या कश्मीर से आर्टिकल 370 को निष्क्रिय करने का निर्णय सही लिया, लेकिन क्या सिर्फ इन्हीं मुद्दों से देशभक्ति और राष्ट्रवाद साबित होगा..? 

ध्यान हो लोकसभा चुनाव से पहले जनवरी में बेरोजगारी को लेकर नेशनल सैंपल सर्वे ऑफिस के पीरियॉडिक लेबर फोर्स सर्वे की रिपोर्ट आयी थी, इसमें खुलासा हुआ था कि पिछली मोदी सरकार के दौरान देश में साल 2017-18 में बेरोजगारी दर 6.1 फीसदी रिकॉर्ड की है जो कि पिछले 45 साल में सबसे ज्यादा है।

बेरोजगारी की यह रिपोर्ट जनवरी में आयी। इस रिपोर्ट के बाद विपक्ष इस पर सरकार को घेरता या जनता सरकार से सवाल करती, इससे पहले ही फरवरी में सरकार ने पुलवामा में हुए आतंकी हमले का बदला लेने के नाम से पीओके के बालाकोट में एयर स्ट्राइक करवा दी और मीडिया के जरिए प्रचारित हुआ कि इस हमले में 200 से 300 आतंकी मारे गए। मारे गए आतंकियों के आंकड़ों की पुष्टि तो नहीं हुई, लेकिन पूरा देश राष्ट्रवाद और देशभक्ति की धारा में एकतरफा बह चला। चुनाव के समय बेरोजगारी, सहित अन्य विकास के अहम मुद्दों से देशवासियों का ध्यान भटक गया।

अब जबकि “फिर एक बार मोदी सरकार” का नारा सफल हो गया और मोदी ने प्रधानमंत्री की शपथ ले ली, तो उम्मीद जागी कि शायद अब युवा हिंदुस्तान के युवाओं के लिए रोजगार के द्वार खुलेंगे। लेकिन ऐसा कुछ नहीं हुआ। 

अब जब फिर एक बार देश भयंकर मंदी का सामना कर रहा है, ऑटो मोबाइल इंडस्ट्री और टेक्सटाइल इंडस्ट्री में लाखों युवाओं की नौकरी जा चुकी है, देश में बेरोजगारी दर चरम पर पहुंच चुकी है। इस बार भी विपक्ष या बेरोजगार होते हिंदुस्तान की जनता सरकार से कोई सवाल करती, इससे पहले सरकार ने कश्मीर से 370 को निष्क्रिय करने का निर्णय लेकर देश वासियों के लिए राष्ट्रवाद और देशभक्ति की गंगा के गेट खोल दिए हैं।

देश के बेरोजगार होते युवा से उसकी पीड़ा को सुनने या समझने की किसी को फुर्सत नहीं हैं। देश में बचा नाम मात्र का विपक्ष मंदी पर सवाल पूछ तो रहा है, लेकिन उसकी कोई सुन नहीं रहा।

रोजगार और विकास के मुद्दों पर होनी चाहिए बहस

यहां सबसे ज्यादा निंदनीय भूमिका देश के राष्ट्रीय स्तर के कई समाचार पत्र और न्यूज चैनलों की रही है। आर्टिकल 370 के शगूफे पर डिबेट करने के लिए तो न्यूज चैनलों ने पूरे के पूरे प्रोग्राम प्लान कर दिए, लेकिन देश पर जो बेरोजगारी की स्ट्राइक हो रही है, उस पर किसी ने कोई प्रोग्राम नहीं बनाया, इस बेरोजगारी की स्ट्राइक को अखबारों में भी कोई खास जगह नहीं मिल रही है।

दो दिन पहले संघ प्रमुख मोहन भागवत ने आरक्षण पर एक बयान देकर नयी बहस छेड़ दी। लेकिन आज देश में इन मुद्दों से कहीं ज्यादा बेरोजगारी के मुद्दे पर बहस करनी जरूरी है। असली राष्ट्रवाद तब होगा जब देश के विकास, युवाओं के रोजगार, बच्चों की शिक्षा, लोगों के स्वास्थ्य जैसे मुद्दों पर बहस होगी और इनसे संबंधित समस्याओं के समाधान तलाशे जाएंगे।

सरकार की गलत नीतियां हैं मंदी का कारण

बेरोजगारी पर सरकार भले ही चुप हो, लेकिन भाजपा के ही विधायक अब इस मुद्दे को लेकर सरकार की नीतियों के खिलाफ बोलने लगे हैं। तीन दिन पहले ही भाजपा में अहम कद रखने वाले विधायक सुब्रमण्यम स्वामी ने पुणे में हुए एक कार्यक्रम के दौरान पत्रकारों से बातचीत में कहा था कि देश में आर्थिक मंदी का कारण अरुण जेटली के कार्यकाल के दौरान अपनाई गई गलत नीतियां हैं और यह नीतियां अभी भी लागू हैं।

देश के प्रति अपना फर्ज वे बिजनेस टायकून निभाने के लिए आगे आ रहे हैं, जिनका राजनीति से कोई संबंध नहीं है। देश में लाखों लोगों को रोजगार देने वाले इनफोसिस के को-फाउंडर एनआर नारायण मूर्थी ने देश में बिगड़ते आर्थिक हालात पर युवाओं से अपील की है कि युवा सरकार के खिलाफ आवाज उठाएं। नारायण मूर्थि ने तो यहां तक कह दिया कि यह वो देश नहीं है, जिसके लिए हमारे पूर्वजों ने आजादी की लड़ाई लड़ी थी। इससे पहले कई अन्य बड़े बिजनेस टायकून भी देश की आर्थिक मंदी के लिए सरकार की गलत नितियों को जिम्मेदार ठहरा चुके हैं।

नॉर्दन इंडिया टेक्सटाइल मिल्स एसोसिएशन नामक संगठन ने तो कुछ राष्ट्रीय और स्थानीय अखबारों में “इंडस्ट्री के मंदी” का विज्ञापन छपवाकर सरकार के प्रति अपना विरोध दर्शाया है।

देश की जनता से अब यही अपील है कि….अब भी जाग जाओ….सरकार से देश की आर्थिक मंदी और बेरोजगारी को लेकर सवाल करो….। क्यों कि अब सवाल नहीं किया तो देश में बेरोजगारी के साथ अपराध, अवसाद, आत्महत्याएं, गरीबी, भुखमरी, भ्रष्टाचार चरम पर पहुंच जाएगा और देश का विकास कई दशक पीछे चला जाएगा। कहीं ऐसा न हो जाए कि हमारा सरकार से सिर्फ सवाल नहीं करना, देश को आर्थिक गुलामी की ओर अग्रसर न कर दे…, जिस आजादी के लिए हमारे पुरखों ने न जाने कितनी ही कुर्बानियां दी।

Tags: #EconomyCrisis#RecessionIndia

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