कहीं आरोपी जेईएन को फायदा पहुंचाना तो नहीं रहा नोट बदलने का उद्देश्य ?
उदयपुर,(ARLive news)। सरकारी विभागों में भ्रष्टाचार को तो एसीबी (भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो) पकड़ता है, लेकिन मामला अगर एसीबी के अंदर का ही हो, उसका क्या किया जाए। इन दिनों उदयपुर एसीबी में डेढ़ साल पहले झल्लारा में विद्युत विभाग के जेईएन कैलाश गौतम को रिश्वत लेते गिरफ्तार करते समय जब्त की गयी राशि के नोटों के गायब होने और बदलने का मामला चर्चा का विषय बना हुआ है।
सीज किए गए नोटों का बदलना एसीबी की चूक है या आरोपी को लाभ पहुंचाने के लिए किया गया भ्रष्टाचार, इस बात की तफ्तीश विभाग में शुरू हो गयी है। एसीबी की स्पेशल यूनिट के एडिशनल एसपी सुरेन्द्र सिंह भाटी मामले की जांच कर रहे हैं। हालां कि मामला अनुसंधानरत होने से एडि. एसपी भाटी अभी इस मामले में कोई भी टिप्पणी करने से इनकार किया है।
तीन हाथों से गुजरे हैं ये नोट
अब तक यह तो स्पष्ट है कि यह लापरवाही या गड़बड़ी तीन स्तर के लोगों तक ही संभव हो सकती है। क्यों कि मौके पर की कार्यवाही से लेकर चालान तक के बीच नोट तीन लोगों के हाथों से गुजरे हैं। अब यह तो अनुसंधान में ही पता चलेगा कि नोट बदलने की गड़बड़ी या लापरवाही “1. जेईएन के मौके पर रिश्वत लेते गिरफ्तार होने के तत्काल बाद हुई सीजर कार्यवाही करने वाले एसीबी अधिकारी-कर्मचारी, 2. मालखाने में रखने वाले एसीबी कर्मचारी या फिर, 3. इस मामले के अनुसंधान अधिकारी ने की है। अब एडिशनल एसपी सुरेन्द्र सिंह भाटी की जांच रिपोर्ट ही तय करेगी कि इस नोट बदलू कांड की गाज किस पर गिरती है।
हुआ यूं कि 18 नवंबर 2017 को उदयपुर एसीबी की इंटेलीजेंस यूनिट ने झल्लारा विद्युत स्टेशन पर कार्यरत जेईएन कैलाश गौतम और एक बिचौलिए को विद्युत स्टेशन पर ही 5 हजार रूपए की रिश्वत लेते रंगे हाथों गिरफ्तार किया था। जेईएन कैलाश गौतम बिचौलिए के जरिए एक किसान से उसके खेत पर डीपी लगाने और नयी केबल लाइन बिछाने की एवज में 5 हजार रूपए रिश्वत ले रहा था।
ट्रेप के बाद एसीबी टीम ने जईएन कैलाश गौतम पुत्र शालिग्राम गौतम के सलूंबर स्थित मकान पर देर रात तक तलाशी में बाद 8 लाख 17 हजार 600 रुपए बरामद हुए थे। यह मामला तब भी इसलिए चर्चा में रहा था कि घर से बरामद हुए 8 लाख से ज्यादा रूपए की गिनती करते करते एसीबी टीम को पूरी रात लग गयी थी। क्यों कि इतनी बड़ी राशि 10, 20, 50 और 100 के नोटों में थी। किसान अपनी पाई-पाई जोड़कर इकट्ठी की गयी मेहनत की कमाई इस जेईएन को बतौर रिश्वत देने को मजबूर थे। ऐसे जेईएन के मामले में भी एसीबी की चूक या गड़बड़ी गंभीर विषय है।
जब्त करते समय लिखी नोटों की सीरीज नंबर अब के नोट से मिलान नहीं खा रहे
इस मामले में जेईएन के रिश्वत लेते गिरफ्तार होने के बाद एसीबी ने हाथ धुलवाने, सैंपल लेने, रिश्वत राशि के नोटों की सीरीज लिखने के साथ ही नोट सीज करने, सहित अन्य सीजर कार्यवाही पूरी की थी। इसके बाद मामले में एसीबी प्रक्रिया के तहत अग्रिम अनुसंधान हुआ। पिछले दिनों एसीबी ने केस में चालान पेश करने की प्रक्रिया शुरू की। चालान से पहले समस्त दस्तावेजों को अंतिम बार चेक किया गया तो मौके से जब्त हुए रिश्वत राशि के नोटों पर लिखे सीरीज नंबर और वर्तमान में केस फाइल में शामिल रिश्वत राशि के नोटों की सीरीज में अंतर पाया गया।
नोटों की सीरीज का मिलान नहीं होने की सूचना जैसे ही अधिकारियो को लगी विभाग में हड़कंप मच गया। मामला गंभीर होने से उच्च अधिकारियों ने तत्काल मामले की जांच एडि. एसपी सुरेन्द्र सिंह भाटी को सौंप दी और यह सब कैसे हुआ इसकी तफ्तीश के निर्देश दिए।
लापरवाही हो या भ्रष्टाचार, आरोपी जेईएन को मिल सकता है लाभ
एसीबी में इस तरह का मामला होना इसलिए भी बड़ी बात है कि इसका सीधा फायदा कोर्ट में आरोपी जेईएन को मिल सकता है। वरिष्ठ वकील धर्मेन्द्र सिंह पंवार ने बताया कि नोट बदल गए हैं तो जब ये मामला कोर्ट में जाएगा तो बेनिफिट ऑफ डाउट (संदेह का लाभ) आरोपी पक्ष को मिलेगा। गौरतलब है कि ऐसे कई केस हुए हैं, जिनमें संदेह के लाभ के तहत आरोपी मामले में बरी तक हो गए।


