उदयपुर,(ARLive news)। उदयपुर संभाग में भारतीय ट्राइबल पार्टी बीटीपी की ताकत अचानक से सामने आयी है। विधानसभा चुनाव में दो विधायकों के जीतने के बाद अब लोकसभा चुनाव में बीटीपी ज्यादा उत्साह के साथ उभर रही है। बीटीपी ने कांग्रेस और बीजेपी दोनों प्रत्याशियों की चिंता बढ़ाई हुई है, बीटीपी की ताकत का अंदाजा तब ही लग गया था, जब बांसवाड़ा में बीटीपी प्रत्याशी के नामांकन रैली में हजारों की संख्या में आदिवासी शामिल हुए थे। स्थिति यह हो गई थी कि जहां तक नजर जाए महिला-पुरूष ही दिखाई दे रहे थे।
बीटीपी की चिंता सिर्फ बांसवाड़ा ही नहीं उदयपुर के प्रत्याशियों को भी सता रही है। वहीं बीटीपी नेताओं का दावा है कि वे उदयपुर सीट से 2 लाख वोट लेकर आएंगे। खासबात है कि कांग्रेस प्रत्याशी रघुवीर मीणा और भाजपा प्रत्याशी अर्जुनलाल मीणा दोनों का गृह क्षेत्र सलूंबर है। ऐसे में दोनों के लिए चिंता का विषय यह है कि कहीं बीटीपी दोनों प्रत्याशियों को इनके ही गृह क्षेत्र सलूंबर में पटखनी न दे दे।
उदयपुर संसदीय क्षेत्र के जिले की खेरवाड़ा, सलूंबर, डूंगरपुर की आसपुर और प्रतापगढ़ की धरियावाद विधानसभा क्षेत्र में बीटीपी की अच्छी पकड़ बतायी जा रही है। ये आदिवासी बाहुल्य क्षेत्र हैं। राजनीतिक विशेषज्ञों की माने तो बीटीपी से कांग्रेस प्रत्याशी को नुकसान ज्यादा होगा, क्यों कि भाजपा की उदयपुर शहर, ग्रामीण, गोगुंदा, झाड़ोल और धरियावाद में यहां के विधायकों के चलते स्थिति काफी अच्छी और मजबूत है। उदयपर संसदीय क्षेत्र में धरियावाद ऐसी विधानसभा सीट हैं, जहा भाजपा, कांग्रेस के बजाए भाजपा और बीटीपी की टक्कर बताई जा रही है।
अनूठी सोच के साथ बनी बीटीपी इसलिए हर आदिवासी इससे जुड़ रहा है
हर आदिवासी परिवार समाज, संस्कृति के संरक्षण में बीटीपी को कर रहा सहयोग
बीटीपी के नेताओं ने बताया कि हम हर आदिवासी परिवार से एक वोट और एक नोट का वादा लेते हैं। यह इसलिए है कि पार्टी को संचालित किया जा सके। किसी भी आदिवासी मतदाता पर यह दबाव नहीं है कि वह कितनी राशि दे। वह अपनी स्थिति के अनुसार छोटी से छोटी और बड़ी से बड़ी राशि का नोट दे सकता है। हमारे प्रचार में दिखावा नहीं होता, बहुत कम गाड़ियों के साथ हम प्रचार पर जाते हैं। बीटीपी का राजनीति में आने का उद्देश्य आदिवास समाज और संस्कृति का संरक्षण करना है। इसलिए हर आदिवासी हमसे जुड़ रहा है, क्यो कि हम अन्य पार्टियों के नेताओं की तरह अपने विकास के लिए नहीं, बल्कि समाज और संस्कृति के संरक्षण के लिए राजनीति में आए हैं।
प्रचार में सभा करनी होती है तो मंच नहीं बनाते, बल्कि सबके साथ में जाजम पर बैठते हैं। हम धरती पुत्र हैं और प्रकृति संरक्षण का संदेश देने के लिए हम संबोधन में जय जौहार कहते हैं। हम किसी पार्टी या नेता की जय नहीं बोलते, इसलिए सभा में प्रत्याषी या जनप्रतिनिधि के तिलक से पहले हम धरती को तिलक लगाते हैं।
एक बार बना विधायक दोबारा प्रत्याशी नहीं बनेगा, ताकि हर बार मिले नया नेतृत्व
भारतीय ट्राइबल पार्टी के प्रदेशाध्यक्ष डॉ. वेलाराम घोघरा ने बताया कि हमारी पार्टी ने सर्वसम्मति से यह नियम बनाया है कि जो प्रत्याशी एक बार विधायक, सांसद या किसी पद पर जनप्रतिनिधि बन जाता है, तो अगले चुनाव में उसे प्रत्याशी नहीं बनाया जाएगा। इसका मकसद है कि समाज के हित में नया नेतृत्व तैयार हो और नयी सोच मिले।

भारतीय ट्राइबल पार्टी (बीटीपी) का दिसंबर 2017 में गुजरात में हुए विधानसभा चुनावों से दो महीने पहले रजिस्ट्रेशन हुआ था। करीब 18 महीने पहले देश में अस्तित्व में आयी बीटीपी ने राजस्थान में दिसंबर में हुए विधानसभा चुनावों में आदिवासी बाहुल्य चार सीटों पर अपने प्रत्याशी उतारे थे। इनमें से दो सीट चौरासी और सागवाड़ा में बीटीपी प्रत्याशियों ने विजय हासिल की थी और विधायक बने हैं।


