उदयपुर,(ARLive news)। सोहराबुद्दीन-तुलसी एनकाउंटर केस में गुरूवार को बड़ी खबर आयी है। सोहराबुद्दीन के भाई रूबाबुद्दीन ने मुंबई सेशन कोर्ट के फैसले के खिलाफ हाईकोर्ट में अपील की है।
रूबाबुद्दीन ने बताया कि 21 दिसंबर 2018 को मुंबई की सीबीआई स्पेशल कोर्ट ने केस में सीबीआई द्वारा आरोपी बनाए गए सभी आरोपियों को बरी कर दिया था। कोर्ट के इस फैसले के खिलाफ हमने मुंबई हाईकोर्ट में अपील की है। AR Live news के रिपोर्टर के पूछने पर रूबाबुद्दीन ने बताया कि हमारे वकील गौतम तिवारी कोर्ट में पूरा पक्ष रखेंगे। हम सेशन कोर्ट के फैसले से संतुष्ट नहीं थे, इसलिए हमने अपील की है।
रूबाबुद्दीन के केस में अपील करने की खबर को उन अधिनस्थ पुलिस कर्मियों के लिए चिंताजनक माना जा रहा है, जो लंबे संघर्ष के बाद सेशन कोर्ट से इस केस में बरी हुए थे। 21 दिसंबर 2018 को सेशन कोर्ट ने सभी 22 आरोपियों जिनमें 21 पुलिसकर्मी शामिल थे, को बरी कर दिया था। इनमें राजस्थान के इंस्पेक्टर अब्दुल रहमान, एसआई हिमांशु सिंह, श्याम सिंह, एएसआई नारायण सिंह, कांस्टेबल युद्धवीर सिंह और करतार सिंह सहित गुजरात के 16 पुलिसकर्मी और 1 फार्म हाउस मालिक शामिल हैं।
सेशन कोर्ट के जज एसजे शर्मा ने केस के फैसले में स्पष्ट लिखा था कि सीबीआई ने केस में सच तलाशने का प्रयास नहीं किया और पहले से सोची गई कहानी को स्थापित करने का प्रयास किया और उसी के अनुसार गवाहों के बयान भी लिए। केस में 210 गवाहों के बयान हुए थे, जिनमें से 91 होस्टाइल हुए थे। सीबीआई चार्जशीट में बताई गई कहानी को साबित नहीं कर सकी है, इसलिए सभी को बरी किया जाता है।
नेता, आईपीएस और रसूखात पहले ही हो चुके हैं डिस्चार्ज
केस में बीजेपी राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह, राजस्थान नेता प्रतिपक्ष गुलाब चंद कटारिया, मार्बल व्यवसायी विमल पाटनी, राजस्थान आईपीएस दिनेश एमएन, गुजरात आईपीएस डीजी बंजारा, राजकुमार पांडियन, नरेन्द्र अमीन, अभय चूडास्मा, विपुल अग्रवाल, गीता जौहरी, ओपी माथुर, पीसी पांडे सहित अमित शाह के करीबी बैंकर यशपाल चूडास्मा, अजय पटेल केस की ट्रायल शुरू होने से पहले ही डिस्चार्ज हो चुके हैं। खासबात है कि चार आईपीएस और एक कांस्टेबल के अलावा रूबाबुद्दीन और सीबीआई दोनों ने कभी भी इन नेताओं, रसूखात व्यवसायी और किसी भी आईपीएस के खिलाफ हाईकोर्ट में अपील नहीं की।
अमित शाह के डिस्चार्ज होने के फैसले के खिलाफ रूबाबुद्दीन ने एक बार हाईकोर्ट में अपील की थी, लेकिन अपनी एप्लीकेशन उसने खुद ही वापस ले ली थी। ऐसे में अमित शाह के केस से डिस्चार्ज होने के फैसले के खिलाफ भी हाईकोर्ट में अपील नहीं हुई।
जबकि अब रूबाबुद्दीन ने उन अधिनस्थ पुलिसकर्मियों के खिलाफ हाईकोर्ट में अपील की है, जिनके लिए केस के मुख्य अनुसंधान अधिकारी अमिताभ ठाकुर और संदीप तामगड़े ने सेशन कोर्ट में बयान दिए थे कि सोहराबुद्दीन या तुलसी के एनकाउंटर से इन अधिनस्थ पुलिस कर्मियों को न तो कोई राजनीतिक फायदा हुआ था और न ही कोई आर्थिक फायदा पहुंचा था। अमिताभ ठाकुर और संदीप तामगड़े ने कोर्ट में बयान दिए थे कि सोहराबुद्दीन और तुलसी के एनकाउंटर का राजनीतिक और आर्थिक फायदा अमित शाह, डीजी बंजारा को हुआ था।


