होली पर मौसम को नैसर्गिक रंगों से भरने आदिवासी महिलाएं तैयार कर रही हैं 5हजार किलो गुलाल।

डीएफओ ओपी शर्मा ने बताते हैं कि जिले के कोटड़ा, ग्वालियाबेरी, डांग, मेरपुर देवला, कूकावास, मावली के मान सिंह जी की बावड़ी, भींडर के सेमलिया, कानोड़, उदयपुर ग्रामीण के कोड़ियात, जोरमा सायरा, गोगुंदा, सूरजगढ़ में हर्बल गुलाल बनाने का काम किया जा रहा हैं। इन स्थानों की वन सुरक्षा एवं प्रबंध समितियों में शामिल महिला समूह ही हर्बल गुलाल तैयार कर रहे हैं। हर समूह में 12 से 15 महिलाएं काम कर रही हैं। पेड़ों से फूल, पत्ते लेने, सुखाने, ग्राइंडिंग करने, गुलाल तैयार करने से लेकर पैकिंग तक की पूरी प्रक्रिया महिलाएं ही कर रही हैं।
पांच रंग में बन रहा हर्बल गुलाल

: पलास के फूल से नारंगी गुलाल
: अमलतास फूल से पीला गुलाल
: पेड़ के पत्तों से हरा गुलाल
: चुकंदर से बैंगनी गुलाल
5000 किलोग्राम गुलाल तैयार कर रही महिलाएं
वन समूहों में शामिल महिलाओं ने बताया कि यह गुलाल हम 100 प्रतिशत फूल-पत्तियों से बनाते हैं, इसलिए इससे त्वचा को कोई नुकसान नहीं पहुंचता है। इसलिए लोग इसे ज्यादा पसंद कर रहे हैं।
अहमदाबाद, दिल्ली, उदयपुर शहर और राजसमंद की बड़ी-बड़ी कॉरपोरेट कंपनियों और रंग का व्यापार करने वाले व्यापारियों से मिले ऑर्डर के अनुसार हम अभी 5 हजार किलो हर्बल गुलाल तैयार कर रहे हैं। गुलाल के 200-200 ग्राम के पैकेट्स सप्लाई के लिए तैयार हैं। रिटेल में 35 रूपए का एक पैकेट और होलसेल में 30 रूपए का एक पैकेट बेच रहे हैं। ।


