
गौरतलब है कि 25 नवंबर 2005 को सोहराबुद्दीन को एनकाउंटर में मार गिराया गया था, तब से उसकी पत्नी कौसरबी लापता थी। इसके ठीक एक साल बाद सोहराबुद्दीन के साथी तुलसी राम प्रजापति का भी एनकाउंटर हो गया। इसका सबसे पहले अनुसंधान सीआईडी ने किया था और सोहराबुद्दीन एनकाउंटर के फर्जी होने का दावा किया था।
सोहराबुद्दीन के भाई की सुप्रीम कोर्ट में लगी याचिका पर 2010 में सोहराबुद्दीन एनकाउंटर केस की जांच देश की सबसे बड़ी इनवेस्टिगेशन एजेंसी सीबीआई को सौंप दी गई। सीबीआई ने पूरी जांच सुप्रीम कोर्ट के सुपरविजन में की और इस मुठभेड़ को फर्जी होेने का दावा किया था। सीबीआई ने चार्जशीट में दावा किया था कि यह एक क्रिमिनल-पॉलिटिकल-पुलिस कॉन्सपीरेसी के तहत हुआ फर्जी एनकाउंटर है।
सीबीआई ने चार्जशीट में राजस्थान के मार्बल किंग विमल पाटनी, तत्कालीन गृहमंत्री गुलाब चंद कटारिया, गुजरात के गृहराज्य मंत्री अमित शाह, आईपीएस डीजी बंजारा, राजकुमार पांडियन, दिनेश एमएन, हैदराबाद के आईपीएस सहित अमित शाह के सहयोगी व्यवसायी, फार्म हाउस मालिक, तीन राज्यों के अधिनस्थ पुलिसकर्मी कुल 20 लोगों को आरोपी बनाया था। सीबीआई ने दावा किया था कि आईपीएस ने अधिनस्थ पुलिसकर्मियों के साथ मिलकर राजनेताओं के आदेश की पालना में यह फर्जी एनकाउंटर किए थे।
सोहराबुद्दीन-कौसरबी का हैदराबाद से सांगली के बीच 22-23 नवंबर 2005 को बस से अपहरण किया था। दो दिन फार्म हाउस में अवैध हिरासत में रखने के बाद 25 नवंबर 2005 को सोहराबुद्दीन को एनकाउंटर में मार दिया था, इसके बाद 29 नवंबर तक कौसरबी की भी हत्या कर उसकी लाश को डीजी बंजारा के गांव इलोल में जला कर साक्ष्य खत्म कर दिए थे।
सीबीआई ने चार्जशीट में दावा किया था कि तुलसी सोहराबुद्दीन और कौसरबी के अपहरण का चश्मदीद गवाह था, उस समय तक पुलिस ने उसे नही मारा, लेकिन एक साल बाद 28 दिसंबर 2006 को अहमदाबाद से उदयपुर पेशी से लौटते समय उसे भी एनकाउंटर में मार दिया गया था। सोहराबुद्दीन और तुलसी दोनों केस को मिलाकर सीबीआई ने कुल 38 लोगों के खिलाफ चार्जशीट पेश की थी।
सीबीआई के चार्जशीट पेश करने के बाद 2014 में सबसे पहले केस से अमित शाह बरी हुए थे, इसके बाद गुलाबचंद कटारिया बरी हो गए और ट्रायल शुरू होने से पहले 2017 नवंबर तकएक-एक कर सभी आईपीएस सहित 16 आरोपी बरी हो चुके हैं। केस की ट्रायल गत वर्ष नवंबर 2017 से शुरू हुई थी और एक साल में ट्रायल पूरी हो गई। केस में सीबीआई अभियोजन पक्ष की ओर से 210 गवाह लेकर आई, इसमें से 92 होस्टाइल हो चुके हैं, जो होस्टाइल नहीं हुए उनमें 40 से अधिक दोनों केस के अनुसंधान अधिकारी और एफएसएल साइंटिस्ट रहे हैं।
केस में 19 और 21 नवंबर 2018 को दोनों केस के चीफ आईओ अमिताभ ठाकुर और संदीप तामगड़े के बयान हुए थे। 26 नवंबर से 29 नवंबर के बीच सभी आरोपियों के धारा 313 के तहत बयान हुए और 3 दिसंबर से 5 दिसंबर के बीच प्रकरण पर अभियोजन पक्ष और सभी आरोपियों की ओर से अंतिम बहस भी पूरी हो गई थी। अब 7 दिसंबर को कोर्ट ने फैसले की तारीख तय की है।


