जिला पुलिस ने पुलिस हेल्प कार्ड भी जारी किया।

आईजी विशाल बंसल ने बताया कि जिला पुलिस ने वाट्स-एप हेल्पलाइन नंबर जारी किया है। इस नंबर पर मैसेज कर कोई भी व्यक्ति जिले संबंधी शिकायत कर सकता है और जिले में वह कहीं मुसीबत हैं तो मैसेज कर मदद भी मांग सकता है।
आईजी विशाल बंसल ने बताया टेलीकॉम कंपनियों से संपर्क कर इस बात का भी प्रयास किया जा रहा है, कि कोई भी नंबर उदयपुर में रोमिंग पर प्रवेश करे, तो उसके पास उदयपुर पुलिस की ओर से हेल्पलाइन नंबर का मैसेज चला जाए। इससे उसे एक सुरक्षा का भाव महसूस होगा और उसके पास उदयपुर पुलिस के हेल्पलाइन नंबर होंगे।
एसपी कुंवर राष्ट्रदीप ने बताया कि इस नंबर की मॉनीटरिंग उनके कार्यालय में ही होगी। तीन शिफ्ट में 24 घंटे एक कांस्टेबल वाट्स-एप नंबर पर आने वाले मैसेज को चेक करेगा, इस वॉट्स-एप नंबर पर पुलिस और थानाधिकारियों का एक ग्रुप भी होगा। आमजन की ओर से जो भी मैसेज आएगा, उस पर कार्यवाही के लिए एसपी ऑफिस में संबंधित डीएसपी और थानाधिकारी को सूचित किया जाएगा। कम से कम समय में पुलिस मदद के लिए मौके पर पहुंचेगी, कार्यवाही करेगी। मैसेज पर क्या कार्यवाही की इस संबंध में थानाधिकारी इस वाट्स-एप नंबर पर सूचना देगा। वाट्स-एप नंबर पर आमजन शिकायत के साथ फोटो-वीडियो भी डाल सकते हैं, इससे कार्यवाही करते समय पुलिस को साक्ष्य की कमी भी महसूस नहीं होगी। खासबात यह है कि सूचना देने वाले की पहचान को पूरी तरह गोपनीय रखा जाएगा।
पुलिस हेल्पलाइन कार्ड : एएसपी पारसमल जैन ने बताया कि उदयपुर टूरिस्ट सिटी है, यहां देश-विदेश से हजारों पर्यटक आते हैं। कई बार पर्यटक को मदद की जरूरत होती है, लेकिन उसके पास संपर्क नंबर नहीं होते। ऐसे में पुलिस हेल्पलाइन कार्ड जारी किया गया है। इस कार्ड पर पुलिस हेल्पलाइन नंबर है। यह कार्ड एयरपोर्ट, रेलवे स्टेशन कियोस्क सहित अन्य जगह रखवाए जाएंगे, ताकि पर्यटक इस कार्ड के अपने साथ रख सके और जरूरत पड़ने पर इसका उपयोग भी करे।
“इंतजाम” सॉफ्टवेयर से पुलिस जवान को ड्यूटी पता चलेगी
एसपी ने बताया कि जिला पुलिस में जाब्ते की मॉनीटरिंग और जवाबदेही को ज्यादा पारदर्शी बनाने के लिए इंतजाम सॉफ्टवेयर बनवाया गया है। एडिएसपी पारसमल जैन और साफ्टवेयर इंजीनियर मानस त्रिवेदी की मदद से यह सॉफ्टवेयर डवलप हुआ है। इस सॉफ्टवेयर के जरिए कांस्टेबल से लेकर पुलिस अधिकारी तक हर पुलिसकर्मी को मोबाइल पर मैसेज कर उसकी ड्यूटी, ड्यूटी पॉइंट और सुपरवाइजरी अधिकारी के नंबर बता दिया जाएगा। कोई समस्या महसूस होने पर पुलिसकर्मी सुपरवाइजर अधिकारी को फोन भी कर सकेगा। इस सॉफ्टवेयर से न सिर्फ समय की बचत होगी, बल्कि पुलिसकर्मियों में आपसी समन्वय बढ़ेगा। इस सॉफ्टवेयर का बड़े स्तर पर सबसे पहली बार उपयोग भी इस चुनाव में किया जा रहा है।


