सीबीआई ने कोर्ट में पुर्सिस(केस क्लोजिंग रिपोर्ट) पेश की।
कई अहम गवाह के बयान नहीं करवाए सीबीआई ने।

सीबीआई के स्पेशल पीपी बीपी राजू ने कोर्ट में लिखित में पुर्सिस पेश की और स्पष्ट किया कि अब सीबीआई अभियोजन पक्ष की ओर से और गवाह नहीं लाएगी। उसके गवाह पूरे हो गए हैं। जबकि कोर्ट में अभी भी तुलसी प्रजापति की माँ नर्मदा बाई के बयान नहीं हुए हैं। गिरफ्तारी वारंट जारी होने के बावजूद उन्हें कोर्ट नहीं लाया गया और 19 नवम्बर को कोर्ट ने यह कहते हुए कि नर्मदा बाई के बयान करवाने के पर्याप्त मौके दिए जा चुके हैं। कोर्ट ने नर्मदा बाई के बयानों को ड्राप कर दिया।
जबकि नर्मदा बाई ने ही अपने बेटे की मौत पर संदेह जाहिर करते हुए सुप्रीम कोर्ट में याचिका लगाकर तुलसी एनकाउंटर की जांच की मांग की थी। इसके अलावा नर्मदा बाई तुलसी से मिलने जेल गयी थी, तब तुलसी ने सोहराबुद्दीन एनकाउंटर और कौसरबी के गायब होने की पूरी सच्चाई बताई थी। इस लिहाज से नर्मदा बाई महत्वपूर्ण गवाह है।
वहीं सोहराबुद्दीन के भाई रुबाबुद्दीन ने गत सप्ताह कोर्ट में हुए बयानों के बाद सीबीआई को कोर्ट में 4 गवाहों की सूची पेश की थी और केस में इनके बयान करवाने के लिए कहा था। ताज्जुब की बात है कि महत्वपूर्ण गवाह होने के बावजूद सीबीआई ने इन्हें समन तक नहीं किया है।
इन चार गवाहों में सीआईडी में पुलिस अधिकारी रहे रजनीश रॉय है, जिन्होंने सबसे पहले इस केस को अनुसंधान कर इसे फेक एनकाउंटर बताया था, दूसरे गवाह सोहराबुद्दीन का भाई शाहनवाजुद्दीन है, जिससे सीबीआई ने तुलसी के हस्ताक्षरशुदा कागज तो बरामद किए लेकिन उसे समन नहीं किया। गत महीनों में वह खुद वकील के साथ कोर्ट आया था और गवाह सूची में शामिल करने का निवेदन किया था। सीबीआई ने उसे 1-2 बार समन किया, उस तारीख पर वह नही आ सका तो कोर्ट ने उसे भी ड्राप कर दिया था। तीसरे और चौथे गवाह है अहमदाबाद के व्यापारी रमन और दशरथ भाई पटेल। ये वही पॉपुलर बिल्डर के मालिक है जिनके कार्यालय पर फायरिंग करवाई थी और दो दिन पहले चीफ आईओ ने भी कोर्ट में बताया था कि इनके यहाँ फायरिंग आर्थिक फायदे के लिए डीजी बंजारा ने करवाई थी।
सीबीआई ने 700 में से मात्र 210 गवाहों के बयान ही करवाए है औऱ इनमे भी 92 होस्टाइल हो चुके हैं। जो होस्टाइल नहीं हुए हैं, उनमें करीब 40 सीबीआई और सीआईडी के अनुसंधान अधिकारी और एफएसएल करने वाले साइंटिस्ट हैं। बचे में कुछ ऐसे गवाह भी है जो होस्टाइल नहीं हुए लेकिन उन्होंने कोर्ट में बयान दिया कि सीबीआई ने धमका कर उनसे झूठे बयान लिए थे। 700 में से 410 गवाहों को सीबीआई ने कभी समन नहीं किया। इनमें कई ऐसे महत्वपूर्ण गवाह हैं, जिनके बयान सीधे तौर पर बरी हो चुके आईपीएस अधिकारियों और नेताओं को लगते हैं तो सीबीआई ने इन्हें समन तक नहीं किया।
महत्वपूर्ण गवाहों के बयान करवाए बगैर ही सीबीआई ने केस क्लोज करने की रिपोर्ट कोर्ट में पेश कर दी। वहीं कोर्ट अब सोमवार से मुलजिम बयान शुरू करने वाली है।
ऐसे में इस सवाल का जवाब तो सीबीआई ही दे सकती है कि उसे केस क्लोज करने की इतनी जल्दी क्यों है।
बचाव पक्ष ला सकता है गवाह
पुर्सिस पेश करने के बाद अब सीबीआई कोई नए गवाह पेश नहीं करेगी। लेकिन अभी बचाव पक्ष की ओर से भी डिफेंस में गवाह लाये जा सकते है।


