पार्टी ने खराड़ी को मना लिया : उन्होंने पर्चा उठाया।

रावत को लेकर पार्टी को उम्मीद थी कि वे निर्दलीय भरा नामांकन पर्चा वापस उठा लेंगे, लेकिन उन्होंने ऐसा नहीं किया और गुरुवार शाम को पार्टी से इस्तीफ देकर निर्दलीय लड़ने की घोषणा कर दी। प्रदेश अध्यक्ष को भेजे अपने पत्र में रावत ने कहा कि वह चुनाव मैदान में निर्दलीय लड़ रहे हैं, अत: उनका त्यागपत्र स्वीकार किया जाए।
गत दिनों जारी हुई भाजपा की प्रत्याशी सूची में पार्टी ने रावत का टिकट काटते हुए नए चेहरे हकरू मईड़ा को मैदान में उतारा था। तब से ही रावत के समर्थक कार्यकर्ता पार्टी से खफा चल रहे थे और उनके समर्थन में करीब 400 पदाधिकारियों ने पार्टी से इस्तीफे दे दिए थे। इनमें विधानसभा क्षेत्र के 4 ब्लॉक अध्यक्ष भी शामिल थे। अंतत: कार्यकर्ताओं का समर्थन देख कर रावत ने बतौर निर्दलीय और पार्टी प्रत्याशी के तौर पर पर्चा दाखिल कर दिया। भाजपा पार्टी सिंबल नहीं मिलने पर निर्वाचन अधिकारी ने उनका पार्टी से भरा पर्चा निरस्त कर दिया था। अब वे निर्दलीय भरा गया नामांकन पर्चे के आधार पर चुनाव लड़ेंगे।
जानकारी के अनुसार पार्टी से बगावत के बाद से ही रावत को समझाने के लिए पार्टी स्तर पर कई वरिष्ठ नेताओं और पार्टी पदाधिकारियों ने उनको समझाने का प्रयास किया था। कयास लगाए जा रहे थे कि वे पर्चा उठा लेंगे। लेकिन ऐसा नहीं हुआ, इसके विपरीत नामांकन उठाने की समय सीमा से 1/2 घण्टा पहले रावत ने पार्टी को इस्तीफा भेज दिया और निर्दलीय लड़ने की घोषणा कर दी।
खराड़ी ने नाराजगी में दाखिल किया था नामांकन
भाजपा ने जारी पहली सूची में खेरवाड़ा सीट से शंकर लाल खराड़ी को प्रत्याशी घोषित किया था। इस पर वहां के वर्तमान विधायक नाना लाल अहारी के समर्थकों ने विरोध शुरू कर दिया था। इस पर पार्टी ने घोषित प्रत्याशी शंकर लाल खराड़ी की टिकट काट कर नाना लाल अहारी को नया प्रत्याशी घोषित कर दिया था। हालांकि तब तक शंकर लाल नामांकन दाखिल कर चुके थे। पार्टी से सिम्बल नहीं मिलता तो नाराज शंकर लाल ने निर्दलीय नामांकन दाखिल कर दिया था। इस पर पार्टी के वरिष्ठ पदाधिकारियों ने उनको मनाया और पार्टी हित मे समझाया। इस पर वे मान गए और निर्दलीय भरा पर्चा वापस उठा लिया।

