
खबरों के मुताबिक केवल 2018 में ही कम से कम आधे दर्जन नीतिगत मसलों पर सरकार और रिजर्व बैंक के बीच मतभेद उभरकर सामने आए। सरकार की नाराजगी ब्याज दरों में कटौती नहीं किए जाने को लेकर भी रही है। रिपोर्ट में कहा गया है कि नीरव मोदी की धोखाधड़ी सामने आने के बाद भी सरकार और केंद्रीय बैंक में तनाव की स्थिति पैदा हुई थी। पटेल चाहते हैं कि सरकारी बैंकों पर नजर रखने के लिए आरबीआई के पास और शक्तियां होनी चाहिए। आरबीआई के डिप्टी गवर्नर विरल आचार्य ने शुक्रवार को कहा था कि केंद्रीय बैंक की स्वायत्ता को नजरअंदाज करना विनाशकारी हो सकता है। आरबीआई की नीतियां नियमों पर आधारित होनी चाहिए। उनके भाषण को आरबीआई की वेबसाइट पर भी पोस्ट किया गया है।
सूत्रों के अनुसार उर्जित पटेल ने अपना पक्ष सरकार के सामने रख दिया है। उर्जित पटेल ने सरकार से कह दिया है कि वो आरबीआई के रिजर्व पर पर रेड न करे। सरकार चाहती है कि अगर पटेल इस्तीफा देते हैं तो अगला गवर्नर कोई ब्यूरोक्रेट हो। सरकार ने अब तक आरबीआई एक्ट के सेक्शन 7 को लागू नहीं किया है। पिछले कुछ समय से सरकार और रिजर्व बैंक के बीच कुछ भी ठीक नहीं चल रहा है। आरबीआई के डिप्टी गवर्नर विरल वी आचार्य ने भी बीते शुक्रवार को कहा था कि केंद्रीय बैंक की आजादी की उपेक्षा करना ‘बड़ा घातक’ हो सकता है।
कहा जा रहा है कि वर्तमान हालात का असर उर्जित पटेल के भविष्य पर भी पड़ सकता है। अगले साल सितंबर में उर्जित पटेल के 3 साल का कार्यकाल पूरा हो रहा है। पटेल के सेवा विस्तार की बात तो दूर की है उनके बाकी के कार्यकाल पर भी सवाल उठ रहे हैं। राज्यसभा सांसद सुब्रमण्यम स्वामी ने पटेल के लिए अपना समर्थन दिखाया और ट्वीट किया कि यदि भारतीय रिजर्व बैंक के गवर्नर ने इस्तीफा दिया तो यह बढ़ते एनपीए के लिए वित्त मंत्री द्वारा उन्हें आरोपी ठहराए जाने का नतीजा होगा। उन्होंने कहा कि पटेल अर्थशास्त्र के एक आत्म सम्मानित विद्वान हैं (येल से बैंकिंग में पीएचडी)। उन्हें इस पद पर रहने के लिए राजी किया जाना चाहिए।


