
विरल ने केन्द्रीय बेंक की स्वतंत्रता की मांग की। नीतिगत मुद्दों पर केंद्र और केन्द्रीय बेंक के बीच उभरते मतभेद इस बात का गवाह है की दोनों के बीच सबकुछ ठीकठाक नहीं। इनसे पहले सीबीआइ के मुखिया आलोक वर्मा ने भी सुप्रीम कोर्ट में जो अपनी याचिका लगाईं हैए उस में कहा है की सरकार का हस्तक्षेप हो रहा है। तीसरी एक और जांच एजन्सी इडी में भी ऐसा ही कुछ हो रहा है।
जहां देखो वहाँ सरकार के हस्तक्षेप की फ़रियाद उठ रही है। आरबीआई में तो इस साल कम से कम आधा दर्जन नीतिगत मामले में दोनों के बीच मतभेद उभरकर सामने आ चुके है। सीबीआइ का मामला सुप्रीम में पहुँच चूका है। कही ऐसा न हो की आरबीआई भी अदालत में न जाए।

