
“मैन टू” आंदोलन की शुरुआत गैर सरकारी संगठन चिल्ड्रंस राइट्स इनिशिएटिव फॉर शेयर्ड पेरेंटिंग (क्रिस्प) ने की है। क्रिस्प के राष्ट्रीय अध्यक्ष कुमार वी ने कहा कि समूह लैंगिक तटस्थ कानूनों के लिए लड़ेगा। उन्होंने मांग की है कि मी टू अभियान के तहत झूठे मामले दायर करने वालों को सजा मिलनी चाहिए।
क्रिस्प के राष्ट्रीय अध्यक्ष कुमार वी ने कहा कि “मी टू” एक अच्छा आंदोलन है, लेकिन झूठे आरोप लगाकर किसी को फंसाने के लिए इसका दुरुपयोग नहीं किया जाना चाहिए। उनका कहना है कि इस आंदोलन का परिणाम समाज में बड़ी मेहनत से अर्जित लोगों के सम्मान को धूमिल करने के रूप में निकला है। “मी टू” में जहां पीड़िताएं दशकों पहले हुए यौन उत्पीड़न की बात बता रही हैं, वहीं इसके विपरीत “मैन टू” आंदोलन में हालिया घटनाओं को उठाया जाएगा। “मीटू” आंदोलन के मुद्दे पर उन्होंने कहा कि यदि यौन उत्पीड़न का मामला सच्चा है तो पीड़िताओं को सोशल मीडिया पर आने की जगह कानूनी कार्रवाई का सहारा लेना चाहिए। इस अवसर पर फ्रांस के पूर्व राजनयिक पास्कल मजूरियर भी मौजूद थेए जिन पर अपनी बेटी के यौन उत्पीड़न का आरोप लगा थाए लेकिन 2017 में अदालत ने उन्हें बरी कर दिया था।
फ्रांस के पूर्व राजनयिक पास्कल मजूरियर ने कहा कि “मैन टू” आंदोलन “मी टू” आंदोलन का जवाब देने के लिए नहीं है, बल्कि यह पुरुषों की समस्याओं का समाधान करेगा जो महिलाओं के अत्याचारों के खिलाफ नहीं बोलते हैं। पास्कल के मुताबिक पुरुषों के पास असली दुख है, वे भी पीड़ित हैं, लेकिन वे महिलाओं और अपने दुराचारियों के खिलाफ खुलकर सामने नहीं आ रहे हैं। उन्होंने कहा महिलाओं की सुरक्षा के लिए कानून बनाते हैं, यह अच्छा है, लेकिन हमें नहीं भूलना चाहिए कि मानवता का आधा हिस्सा पुरुष हैं।
शक्तिशाली शक्तिहीन का करता है शोषण
पास्कल ने कहा यह तो सर्वविदित है कि जो शक्तिशाली होगा वह शक्तिहीन का शोषण करेगा। अभी तक “मी टू” में जितने भी नाम आए है वह अपने अपने क्षेत्र के नामी लोग हैं। हो सकता है कि इनसे कुछ हासिल करने और फिर न मिलने या फिर कुछ चाहत के कारण रजामंदी के चलते वो सबकुछ हुआ जो आज सालों बाद बताया जा रहा है।
देश तथा प्रदेश में पुरुष आयोग के गठन के लिए इलाहाबाद हाईकोर्ट में याचिका दायर करने वाले आइपीएस अधिकारी अमिताभ ठाकुर का मानना है कि उच्च पदों पर कार्यरत महिला अधिकारी पुरुषों का शोषण कर रही हैं। सिविल डिफेंस में आइजी के पद पर कार्यरत अमिताभ ठाकुर ने बताया कि पुरुष आयोग गठन की मांग पर उन्हें मथुरा और विदेशों से भी समर्थन मिल रहा है। उनका मानना है कि पहले के समय में धारणा थी कि पुरुष ही महिलाओं का शोषण किया करते हैं। मगर आज के दौर में महिलाएं भी सशक्त हो चुकी हैं। कई स्थानों पर तो महिलाएं पुरुष से अधिक पावर में हैं। ऐसी महिलाएं पुरुषों का शोषण कर रही हैं। ठाकुर बताते है कि याचिका दायर करने के बाद बहरीन से लेकर मुंबई और मथुरा से भी समर्थन के फोन गए हैं।
आर्टिकल 20 का हवाला देते हुए इलाहाबाद हाईकोर्ट के वकील अभिजीत सक्सेना बताते हैं, “किसी को सजा उस एक्ट के तहत नहीं दी जा सकती जब इंडियन पीनल कोड में उस एक्ट के खिलाफ सजा का कोई प्रावधान न हो”। एम जे अकबर और कई शख्सियत पर लग रहे आरोप साल 2013 के पहले के हैं। इसलिए कानूनी तौर पर उनके खिलाफ सजा का प्रावधान नहीं बनता है। अभिजीत सक्सेना के मुताबिक कुछ हरकतें जो अब सेक्सुअल हैरासमेंट के श्रेणी में आते हैं वो साल 1990 और साल 2000 में अपराध की श्रेणी में नहीं आते थे। जाहिर है मीटू को सामाजिक अभियान से ज्यादा और कुछ समझना बेमानी होगा।


