
कोर्ट में सीबीआई के डीएसपी एनएस राजू ने बताया कि उन्होंने अनुसंधान के दौरान आईपीएस हिंगलाज दान, ,आजम की पत्नी रिजवाना, दिनेश एमएन के डाइवर पूरणमल, हामिदलाल के भाई मजीद मोहम्मद, सोहराबुद्दीन के साथी मोहम्मद रफीक, फिरोज खान, हिस्ट्रीशीटर शराफत उर्फ कालू सहित कई लोगों के बयान लिए थे। इसके अलावा आजम-सिलवेस्टर की हिस्ट्रीशीट, पुलिस लाइन का रोजनामचा, तुलसी एनकाउंटर में शामिल नारायण सिंह, युदवीर, करतार, दलपत सिंह की छुट्टी की एप्लीकेशन, हामिदलाल हत्याकांड के दस्तावेज, जेल से तुलसी का रिकाॅर्ड, जेल हिस्ट्रीशीट, बैरक रजिस्टर सहित अन्य दस्तावेज भी इकट्ठे किए थे। कलेक्टर से अनुमति लेकर जेल में तुलसी के साथ रहे कैदी अब्दुल सत्तार, राजू दास और अयूब शाह के बयान भी लिए थे, हालां कि इन तीनों के बयान अभी तक कोर्ट में नहीं हुए हैं। सभी बयान और दस्तावेज जब्त करने के बाद मैंने अनुसंधान रिपोर्ट सीबीआई एसपी चीफ आईओ अमिताभ ठाकुर को सौंप दी थी।
क्राॅस में बचाव पक्ष के वकील के पूछने पर एनएस राजू ने बताया कि चीफ आईओ ने अनुसंधान के संबंध में मेरे कभी बयान नहीं लिए और तुलसी की चार्जशीट जिस समय कोर्ट में पेश की गई, उस समय भी मैं मौजूद नहीं था, ऐसे में मुझे यह याद नहीं है कि चीफ आईओ ने मेरे द्वारा किए गए अनुसंधान के कौन से दस्तावेज चार्जशीट में शामिल किए हैं। आज यहां कोर्ट में गवाही देने आने से पहले भी मैंने किसी भी गवाह के कोई स्टेटमेंट नहीं पढ़े हैं। मैंने जो भी साक्ष्य और दस्तावेज जब्त किए वह किसी आरोपी की सूचना पर नहीं किए और दस्तावेजों से संबंधित लोगों के बयान भी नहीं लिए थे। इसके अलावा अनुसंधान के दौरान मैंने सीआईडी आॅफीसर्स और तुलसी के भाई से भी कभी पूछताछ नहीं की और न ही उनके बयान लिए।
जिनके कोर्ट में बयान कराए थे, उनके अब तक यहां बयान हीं हुए
कोर्ट में एनएस राजू ने बताया कि उन्होंने अनुसंधान के दौरान सोहराबुद्दीन-तुलसी के साथी आजम, शराफत उर्फ कालू सहित 5 से 6 लोगों के सीआरपीसी की धारा 164 के तहत बयान भी करवाए थे। गौरतलब है कि इनमें से ट्रायल कोर्ट में शराफत उर्फ कालू के अलावा अभी तक किसी भी गवाह के बयान नहीं हुए हैं।


