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अनोखी परंपरा : ग्रामीणों ने एकत्रित किये 30 क्विंटल दूध की खीर बनाकर की बारिश और खुशहाली की कामना

arln-admin by arln-admin
September 16, 2018
Reading Time: 1 min read


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शौभागपुरा स्थित धर्मराज बावजी मोटा देवरा मंदिर की परंपरा।
रात्रि जागरण से हुई शुरुआत, बंटी खीर प्रसादी

गांव के 600 घरों से इकट्ठा हुआ दूध।

गांव के हर घर की खुशहाली और बारिश की कामना के लिए भावदी छठ को रात्री जागरण होता है, अगले दिन हर घर से दूध इकट्ठा होता है, खीर बनती है, प्रसाद चढ़ता है और फिर प्रसादी हर बच्चे, बड़े, बुजुर्ग और महिला में बिना किसी भेदभाव के बंटती है।

यह अनोखी और खास परंपरा उदयपुर शहर से सटे शौभागपुरा गांव की है। यहां रविवार को गांव और आस-पास के 600 घरों से 30 क्विंटल दूध इकट्ठा हुआ। इस दूध की खीर बनाई गई और धर्मराज बावजी मोटा देवरा मंदिर में प्रसाद चढ़ाया गया।

हर वर्ष की तरह इस वर्ष भी भादवी छठ को शनिवार रात रात्री जागरण, भजन-कीर्तन के साथ इसकी शुरुआत की गई। शोभागपुरा स्थित धर्मराज बावजी मोटा देवरा मंदिर में लोगों के सहयोग से रात्री जागरण रखा गया। रातभर गांव के हर घर से इकट्ठे हुए लाेगों ने भजन-कीर्तन किया और धर्मराज बावजी से गांव में खुशहाली बनाए रखने और बारिश करने की कामना की। रातभर भजन-कीर्तन और श्रद्धा से भरे माहौल के बाद सुबह सभी ने पूजा की और फिर हर घर से दूध आने का सिलसिला शुरू हुआ। शोभागपुरा पूर्व सरपंच सीताराम डांगी बताते हैं कि रविवार दोपहर तीन बजे तक समाज, गांव व आस-पास के 600 घरों से 30 क्विंटल दूध इकट्ठा हुआ है। इस दूध की सभी ग्रामीण मिलकर खीर बना रहे हैं। इसके बाद यह प्रसाद धर्मराज बाऊ जी को अर्पित किया गया और शाम को 6 बजे से 8 बजे के बीच प्रसादी पूरे गांव के सर्व समाज में वितरित की जाएगी।

गांव में आज नहीं बिकता दूध

ग्रामीणों ने बताया कि आज के दिन गांव में कोई भी दूध नहीं बेचता है। घरों में भी एक दिन पहले का दूध उपयोग होता है। जितने भी दूध बेचने का काम करते हैं, वे आज दूध नहीं बेचते हैं और सारा दूध मंदिर में दिया जाता है। घरों में भी मामूली चाय के लिए दूध उपयोग होता है, बचा हुआ दूध मंदिर में अर्पित किया जाता है।

इकट्ठे होते हैं 5 हजार से ज्यादा लोग

ग्रामीणों ने बताया कि यह एक ऐसा मौका है कि गांव के हर घर का हर शख्स यहां मंदिर आता है। इस दिन कम से कम 5 हजार से ज्यादा लोग यहां आते हैं और आपस में मिलकर एक-दूसरे की खुशहाली की कामना करते हैं। इससे गांव में एक-दूसरे के बीच सहयोग और पारस्परिक सद्भाव की भावना भी बढ़ती है।

Tags: अनोखी परंपराग्रामीणों ने बनाई खीर

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