
कुलदीप नैयर काफी दशकों से पत्रकारिता क्षेत्र में सक्रिय थे । उन्होंने कई किताबें भी लिखी थीं । नैयर को आपातकाल के दौरान सरकार के खिलाफ लेख लिखने के कारण जेल भी जाना पड़ा था ।
नैयर 1996 में संयुक्त राष्ट्र के लिए भारतीय प्रतिनिधिमंडल के सदस्य थे। 1990 में उन्हें ग्रेट ब्रिटेन में उच्चायुक्त नियुक्त किया गया था। 1997 में उन्हें राज्यसभा के लिए भी मनोनीत किया गया था। नैयर ने कई किताबें लिखीं, जिसमें उनकी आत्मकथा काफी चर्चित रही थी। उनकी अंग्रेजी में छपी ‘बियांड द लाइंस’ किताब का बाद में हिंदी में अनुवाद ‘एक जिंदगी काफी नहीं’ नाम से प्रकाशित हुआ । इसके अलावा उनकी कई किताबें ‘बिटवीन द लाइन’, ‘डिस्टेंट नेवर : ए टेल ऑफ द सब कान्टिनेंट’, ‘इंडिया आफ्टर नेहरू’, ‘वाल एट वाघा, इण्डिया पाकिस्तान रिलेशनशिप’, ‘इण्डिया हाउस’ भी चर्चित रहीं ।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने वरिष्ठ पत्रकार के निधन पर शोक जताया हुए आपातकाल में सरकार के खिलाफ मुखर आवाज उठाने के लिए नैयर के योगदान की सराहना की और उन्हें श्रद्धांजलि दी।
पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने कुलदीप नैयर के निधन पर शोक व्यक्त करते हुए कहा कि उन्होंने कई क्षेत्रों में बहुत अच्छे तरीके से देश की सेवा की ।
राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ,उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ,मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान सहित राज्य सरकार के अन्य मंत्रियों ने भी गहरा शोक व्यक्त किया । छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह ने शोक जताते हुए कहा कि भारतीय ‘पत्रकारिता के अनमोल रत्न थे कुलदीप नैयर’ ।


