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सोहराबुद्दीन-तुलसी एनकाउंटर : साथी बदमाश सिलवेस्टर ने कहा सीबीआई ने चूडाश्मा के खिलाफ बयान देने के लिए धमकाया था

arln-admin by arln-admin
August 10, 2018
Reading Time: 1 min read
सोहराबुद्दीन-तुलसी एनकाउंटर : 12 सालों में 11 मुख्य गवाह, पुलिस अधिकारी, जेलर, जज की हो चुकी है मौत….


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उदयपुर में समन वारंट मिलने के बावजूद कोर्ट पहुंचे सिलवेस्टर को नहीं पकड़ पाई पुलिस।

सोहराबुद्दीन-तुलसी एनकाउंटर केस में शुक्रवार को मुंबई की सीबीआई स्पेशल कोर्ट में वांछित कुख्यात बदमाश सिलवेस्टर डेनियल के बयान हुए। उसने बताया कि जून 2010 में सीबीआई अधिकारी डागर ने चूडाश्मा के खिलाफ बयान देने का लालच दिया था और धमकाया भी था। लेकिन मैंने कोई बयान नहीं दिए थे और न ही मैं इस बारे में कुछ जानता हूं। इस पर सिलवेस्टर को सीबीअाई ने होस्टाइल घोषित कर दिया। सीआरपीएफ हेडकांस्टेबल जसविंद सिंह के बयान भी हुए।

सिलवेस्टर ने कोर्ट को बताया कि वह आजम के जरिए तुलसी, सोहराबुद्दीन, रफीक, बंटी, आरिफ जुबेर को जानता था। सोहराबुद्दीन और तुलसी कई मामलों में वांछित थे और मल्लातलाई में छुप कर रहे रहे थे। सोहराबुद्दीन एनकाउंटर के बारे में मैं कुछ नहीं जानता था, जो जानकारी थी वह समाचार पत्रों से मिली थी। 2010 में सीबीआई अधिकारी डागर ने मुझे गुजरात आईपीएस चूडाश्मा के खिलाफ बयान देने के लिए कहा था। चूडाश्मा के खिलाफ बयान देने पर सभी केसों से फ्री करवाने का लालच और नहीं देने पर और ज्यादा फंसाने की धमकी दी थी। मैं चूडाश्मा काे नहीं जानता था, इसलिए मैंने कोई बयान नहीं दिए थे। सीबीआई ने न तो कभी मेरे बयान लिखे और न ही पढ़ कर सुनाए। कुछ कागजों पर हस्ताक्षर जरूर करवाए थे।

तुलसी कहता था मौका लगा तो फरार हो जाऊंगा

सिलवेस्टर ने कोर्ट में आगे बयान दिए कि हामिदलाल हत्याकांड मैं, तुलसी के साथ उदयपुर सेंट्रल जेल करीब सात-आठ महीने रहा था। तब तुलसी अक्सर बोलता था कि अगर वह सोहराबुद्दीन के साथ हैदराबाद जाता तो उसका भी एनकाउंटर हो जाता। नवरंगपुरा फायरिंग मामले में मुझे, तुलसी और आजम को पेशी पर ले जाते थे। तब तुलसी कई बार बोलता था कि मौका मिला तो जेल या पुलिस कस्टडी से फरार हो जाऊंगा। बाद में मेरी जमानत हो गई थी। जमानत पर छूटने के करीब दो महीने बाद मुझे अखबार से तुलसी का एनकाउंटर होने का पता चला था।

समन होने पर भी गिरफ्तार करने मुंबई नहीं पहुंची टीम

सिलवेस्टर बयान देकर चला गया, लेकिन उदयपुर पुलिस समन वारंट होने के बावजूद उसे गिरफ्तार करने समय से नहीं पहुंची। मुंबई कोर्ट ने सिलवेस्टर का 10 अगस्त की तारीख का समन तामील कराने के लिए के लिए उदयपुर एसपी को भेजा था। उदयपुर पुलिस के पास सूचना थी, इसके बावजूद उसे पकड़ा नहीं जा सका। सिलवेस्टर हिस्ट्रीशीटर है और फरार व वांछित होने से उसे कोर्ट ने स्थाई वारंटी व मफरूर घोषित किया हुआ है। गुजरात आईक्रीम मालिक सहित व्यापारियों पर फायरिंग कर अवैध वसूली करने, जानलेवा हमला सहित कई मामले उस पर दर्ज हैं, इनमें कुछ वे वह अभी भी वांछित है।

कौन आया था मुझे पता नहीं

सीआरपीएफ के हेडकांस्टेबल जसविंदर सिंह ने कोर्ट को बताया कि वह 2004 से 06 के बीच हैदराबाद के सीआरपीएफ कैंप सेंटर पर तैनात था। उस समय कौन आया, कौन गया, उसे पता नहीं है। इस पर जसविंद सिंह को भी सीबीआई ने होस्टाइल घोषित किया। गौरतलब है कि सीबीआई चार्जशीट में शामिल इसके बयानों में लिखा है कि वह सीआरपीएफ ग्रुप सेंटर हैदराबाद के गेट-3 पर तैनात था। 21 नवंबर 2005 की शाम कांस्टेबल बीके रेड्डी और निरंजन की ड्यूटी भी साथ थी। उस दिन इन-आउट रजिस्टर गेट-3 पर जो गाड़ियां आईं, उनमें एक में एसपी राजकुमार पांडियन, दूसरी गाड़ी में श्रीनिवास राव, तीसरी गाड़ी में गांधीनगर से परमार और चौथी गाड़ी में डाबी आए थे।

सीबीआई पीपी ने कहा रेड्डी और निरंजन की लोकेशन नहीं मिली है

कोर्ट में शुक्रवार को कांस्टेबल बीके रेड्डी और निरंजन के बयान भी होने थे। लेकिन ये नहीं आए। सीबीआई पीपी बीपी राजू ने कोर्ट को बताया कि ये दोनों वर्तमान में कहां तैनात हैं, इनकी लोकेशन पता नहीं चल सकी है। ऐसे में इनसे संपर्क नहीं है।

सीबीआई की चार्जशीट में सिलवेस्टर के यह बयान शामिल हैं

सीबीआई के डीएसपी डीएस डागर ने 23 जून 2010 को सिलवेस्टर के बयान लिए थे। चार्जशीट में सिलवेस्टर के बयान में लिखा है कि वह 2003 में तुलसी-सोहराबुद्दीन के संपर्क में आया था। सोहराबुद्दीन ने उसे और तुलसी को रमन पटेल और दशरथ पटेल के नवरंगपुरा स्थित पायोनियर इंफ्रास्ट्रक्चर के ऑफिस पर फायरिंग करने भेजा था, साथ ही यह हिदायत दी थी कि फायरिंग के इंस्ट्रक्शन अभय चूडाश्मा ने दिए हैं और गोली किसी के लगनी नहीं चाहिए। इस पर हम उस ऑफिस में गए, वहां रमन पटेल और दशरथ पटेल का नाम लेकर कंप्यूटर सहित इधर-उधर दो फायर किए थे और हम वहां से फरार हो गए थे।

सिलवेस्टर के सीबीआई को दिए बयान में आगे लिखा है कि हामिदलाल के कारण हमारी मार्बल ट्रेडर्स में साख गिर गई थी। हामिदलाल हत्याकांड में गिरफ्तारी के बाद मैं तुलसी के साथ जेल रहा था। तब तुलसी ने बताया था कि उसे अभय चूडाश्मा ने बुलाया था और कहा था कि पॉलीटिशियन्स का दबाव है, सोहराबुद्दीन को गिरफ्तार करना पड़ेगा, हम उसे कोई नुकसान नहीं पहुंचाएंगे। इस पर तुलसी सोहबराबुद्दीन से मिला था। हैदराबाद में कलीमुद्दीन उर्फ नैयाबुद्दीन के घर सोहराबुद्दीन के साथ 4-5 दिन रहा था। सोहराबुद्दीन, उसकी पत्नी और तुलसी के हैदराबाद से सांगली लौटते समय टीम के साथ आए एटीएस एसपी राजकुमार पांडियन, इंस्पेक्टर डाबी ने उन्हें रोका था और साथ ले गए थे। राजस्थान पुलिस तुलसी को उदयपुर ले गई थी और 4-5 दिन बाद हामिदलाल हत्याकांड में गिरफ्तार कर लिया था। तुलसी जेल में अक्सर अंदेशा जताता था कि उसका कभी भी एनकाउंटर हो सकता है, क्यों कि वह सोहराबुद्दीन-कौसरबी के अपहरण का चश्मदीद गवाह था।

Tags: sohrabuddin encountertulsi prajapatiसोहराबुद्दिन एनकाउंटर

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