गवाह के बयान के बगैर बचाव पक्ष की सहमति से एग्जीबिट हुई एफएसएल जांच की रिपोर्ट्स।

सोहराबुद्दीन-तुलसी एनकाउंटर केस में बुधवार मुंबई में सीबीआई की स्पेशल कोर्ट में मेडिकल डाॅक्टर मनीष भाई सुवेरा, एफएसएल साइंटिस्ट जीबी बाघेला और एएस प्रजापति के बयान हुए।
2006 में सिविल हाॅस्पिटल के मेडिकल ऑफीसर रहे डॉ. मनीष भाई सुवेरा ने कोर्ट को बताया कि 27 दिसंबर 2006 शाम 4.15 बजे हिम्मतनगर जीआरपी पुलिस दो लोगों को लेकर आई थी और उनके नाम युद्धवीर सिंह और करतार सिंह बताए थे। जीआरपी पुलिस आंख की जांच की तहरीर लेकर आई थी और कहा कि तड़के 3 बजे इनके आंख में मिर्च डाली गई है। मैंने दोनों की आंखों की जांच की और आंखों के सर्जन के पास भी भेजा। जांच रिपोर्ट में आया था कि उनकी आंख में कोई भी फॉरन पार्टिकल (मिर्च पाउडर) नहीं पाया गया था। उनकी आंख में जलन थी, जिस पर उन्हें एक आई ड्रॉप दिया था। सीबीआई ने एक बार बयान लिए थे, तब इस रिपोर्ट की ऑरिजनल कॉपी उन्हें दे दी थी।
क्रॉस में बचाव पक्ष के वकील के पूछने पर डॉ. सुवेरा ने बताया कि चिली पाउडर का बॉटनिकल नेम कैप्सीकम एनम है और यह एक ऑर्गेनिक पॉइजन होता है। इसका सबसे अच्छा उपचार सादा पानी से आंख धोना है। सादा पानी से आंख धोई जाए तो मिर्च पाउडर निकल जाता है। हां यह बात भी सही है कि मिर्च पाउडर निकलने के बावजूद आंखों में 13-14 घंटे तक जलन रहती है। गौरतलब है कि तुलसी को पेशी से लेकर आने वाली पुलिस टीम ने यह बताया था कि 27 दिसम्बर तड़के 3 बजे तुलसी अपने साथियों के सहयोग से पुलिसकर्मियों की आंखों में मिर्च पाउडर डाल कर ट्रैन के डिब्बे से फरार हुआ था।
ट्रेन के डिब्बे में हुए फायर नारायण सिंह की रिवॉल्वर से हुए थे
गांधीनगर के एफएसएल साइंटिस्ट जीबी बाघेला ने कोर्ट को बताया कि उन्होंने ट्रेन के डिब्बे से मिले आर्टिकल और डिब्बे का निरीक्षण-जांच की थी। जीआरपी पुलिस ने मौके पर बुलाया था। डिब्बे के अंदर मिली चली हुई गोली और जीआरपी को नारायण सिंह की रिवॉल्वर से जो चार खाली कार्टेज प्राप्त हुए थे, इनकी जांच की गई, तो पाया गया कि यह सभी नारायण सिंह की रिवॉल्वर से चले थे। वहीं एक थ्री-नॉट-थ्री राइफल का कार्टेज भी मौके से मिला था, यह कांस्टेबल दलपत सिंह की राइफल से मैच हुआ था।
कोर्ट में एग्जीबिट हुई रिपोर्ट्स : ट्रेन के डिब्बे से मिला लाल पाउडर मिर्च ही थी
: सीबीआई स्पेशल पीपी बीपी राजू ने ट्रेन के डिब्बा जिससे तुलसी फरार हुआ था, उसमें पड़े लाल रंग के पाउडर की एफएसएल रिपोर्ट पेश की। पीपी बीपी राजू ने कोर्ट को बताया कि इस एफएसएल जांच में वह लाल पाउडर कैप्सीकम एनम (मिर्च पाउडर) पाया गया है। बचाव पक्ष के वकीलों की ओर से कोई आपत्ति नहीं होने से यह रिपाेर्ट संबंधित गवाह के बयान के बगैर कोर्ट में एग्जीबिट कर ली गई।
: एफएसएल साइंटिस्ट एएस प्रजापति ने तुलसी एनकाउंटर के समय मौके से जब्त ब्लड सैंपल, मिट्टी, बुलेट मार्क, बुलेट के खाली कार्टेज, मोर्चरी से जब्त हुए तुलसी के पेंट,शर्ट, जैकेट सहित अन्य कपड़ों सहित अन्य आर्टिकल का एग्जामिन किया था। इन सभी रिपोर्ट्स पर हुए इनके हस्ताक्षर की इन्होंने कोर्ट में पहचान की। इसके बाद ये सभी रिपोर्ट बचाव पक्ष की सहमति के साथ कोर्ट में एग्जीबिट हुईं।
: कोर्ट में पीपी बीपी राजू ने फॉरेंसिक साइंस निदेशालय के डीएनए डिवीजन के साइंटिस्ट टीडी शाह से संबंधित मिट्टी, ब्लड सैंपल, तुलसी के कपड़े, बुलेट्स सहित अन्य रिपोर्ट भी पेश की। उन्होंने कोर्ट को बताया कि रिपोर्ट्स के अनुसार इन सभी आर्टिकल से मिला खून तुलसी के खून से मिलान खाता है। यह रिपोर्ट्स भी टीडी शाह के बयान के बगैर ही बुधवार को बचाव पक्ष की सहमति के साथ कोर्ट में एग्जीबिट हुईं।


