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Home Mewar

पत्नी को मरने के लिए मजबूर करने वाले पति को 8 साल कारावास की सजा हुई

arln-admin by arln-admin
July 19, 2018
Reading Time: 1 min read
वकीलों ने हाईकोर्ट बैंच की मांग में भगवान गणेश और जगदीश को आंदोलन में किया शामिल


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उदयपुर के अतिरिक्त सेशन न्यायालय, महिला उत्पीड़न प्रकरण के न्यायाधीश डॉ. दुष्यंत दत्त ने महिला को आत्महत्या के लिए मजबूर कर देने के आरोप में आरोपी पति गमाना फला बारापाल निवासी भीमा पुत्र धर्मा मीणा को आठ वर्ष के कठोर कारावास और 50 हजार रुपए जुर्माने की सजा सुनाई है। जुर्माना स्वरूप जमा कराए गए 50 हजार रुपए मृतका मंजू देवी के विधिक वारिस (बच्चों) को दिए जाएंगे।

कोर्ट ने यह निर्णय सुनाते हुए फैसले में लिखा कि सामान्यतः: किसी गवाह से यह अपेक्षित नहीं होता है कि वह रटे-रटाए तौर पर बयान दे। हर गवाह के लिए न्यायालय का वातावरण सहज नहीं होता है और हर व्यक्ति में तथ्यों को याद रखने और उन्हें व्यक्त करने की क्षमता अलग-अलग होती है। ऐसे में सूक्ष्म विरोधाभास आ सकता है। न्यायालय का कर्तव्य है कि सत्य और असत्य के अपमिश्रण में से सत्य के मिश्रण को प्रथक करना। साक्ष्यों से यह प्रमाणित होता है कि अभियुक्त ने शराब पीकर लड़ाई-झगड़ा कर पत्नी मंजू से मारपीट करते हुए उसे शारीरिक और मानसिक रूप से प्रताड़ित किया, इससे परेशान होकर उसने आत्महत्या की। महिला ने परेशान जीवन को जीने से ज्यादा मरना सुलभ और आसान समझा। ऐसे अपराध में नर्मी घृणास्पद अपराध को बढ़ावा देने के समान होगा, साथ ही समाज व महिलाओं का अपमान होगा।

ऐसे में अभियुक्त भीमा मीणा को आईपीसी की धारा 306 के तहत 8 वर्ष के कठोर कारावास और 50 हजार रुपए जुर्माने की सजा सुनाई जाती है। यह 50 हजार रुपए मृतका के विधिक वारिसों को दिए जाएं।

महिला ने फांसी लगा दी थी जान

जनवरी 2017 को को खजूरी, बारापाल निवासी शांतिलाल पुत्र देवा मीणा ने गोवर्धन विलास थाने में रिपोर्ट दर्ज करवाई थी कि उसकी बहन मंजू देवी की भीमा से 15 वर्ष पूर्व शादी हुई थी और इनके चार बच्चे हैं। भीमा मंजू के साथ पिछले कई वर्षों से मारपीट-झगड़ा करता था। समाज के पंचों की दोनों पक्षों की समझाइश से महिला ने 15 वर्ष गुजार दिए, लेकिन भीमा के व्यवहार में कोई अंतर नहीं आया था। 1 जनवरी 2017 को महिला की फांसी लगाने से मौत हो गई। शांतिलाल को महिला को मार कर लटकाने का संदेह था तो उसने आरोपी भीमा के खिलाफ आईपीसी की धारा 302 के तहत हत्या के आरोप में मामला दर्ज करवाया था।

पुलिस ने जांच कर मामला आत्महत्या के लिए मजबूर करने के आरोप में आईपीसी की धारा 306 का पाया। अभियोजन पक्ष से अपर लोक अभियोजक प्रेम सिंह पंवार ने 17 गवाह और 13 दस्तावेज कोर्ट के समक्ष पेश किए। इस पर कोर्ट ने आरोपी भीमा को सजा सुनाई।

Tags: फांसीमजबूरमहिला

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