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सोहराबुद्दिन-तुलसी एनकाउंटर : मुम्बई हाइकोर्ट में होगा दिनेश एमएन के भविष्य का फैंसला…

arln-admin by arln-admin
July 13, 2018
Reading Time: 1 min read
सोहराबुद्दिन-तुलसी एनकाउंटर : मुम्बई हाइकोर्ट में होगा दिनेश एमएन के भविष्य का फैंसला…


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हाई कोर्ट में दिनेश एमएन के बरी होने के आदेश के खिलाफ लगी याचिका पर सुनवाई पूरी हुई।

सोहराबुद्दीन-तुलसी एनकाउंटर केस में मुंबई हाईकोर्ट में आईपीएस दिनेश एमएन और आरके पंड्यन के बरी होने के आदेश के खिलाफ लगी एप्लीकेशन पर सुनवाई पूरी हो गई है। गुरुवार को डीजी बंजारा से संबंधित एप्लीकेशन पर भी सुनवाई शुरू हुई।

मुंबई सेशन कोर्ट ने अगस्त 2017 में आईपीएस दिनेश एमएन को साक्ष्यों के अभाव और अभियोजन स्वीकृति नहीं मिलने पर सीआरपीसी की धारा 227 और 197 के तहत मामले से बरी कर दिया था। जिसके खिलाफ  सोहराबुद्दीन के भाई रुबाबुद्दीन ने हाईकोर्ट में अपील की थी।

: हाइकोर्ट में रुबाबुद्दीन के वकील गौतम तिवारी ने सीबीआई की चार्जशीट के तथ्य पढ़कर सुनाए। हाईकोर्ट को वकील ने गुजरात और राजस्थान पुलिस की संयुक्त टीम के सोहराबुद्दीन और कौसरबी दोनों का तुलसी के साथ अपहरण करने, 26 नवंबर 2005 को सोहराबुद्दीन के एनकाउंटर के बाद कौसरबी को भी मार देने, इनके अपहरण का चश्मदीद गवाह तुलसी को तीन दिन अवैध हिरासत में रखने और एक वर्ष बाद उसका भी एनकाउंटर कर देने का घटनाक्रम बताया। इसके सपोर्ट में तत्कालीन डीएसपी सुधीर जोशी, इंस्पेक्टर भंवर सिंह हाड़ा, रणविजय सिंह और हिम्मत सिंह के सीआरपीसी की धारा 161 के बयान पढ़कर सुनाए। गौरतलब है कि इनके धारा 164 के बयान भी हुए थे।

दिनेश एमएन के वकील के तर्क

इसके जवाब में दिनेश एमएन के वकील ने हाईकोर्ट में तर्क रखा कि दिनेश एमएन आईजी की अनुमति से अहमदाबाद गए थे। तुलसी हामिदलाल हत्याकांड में वांछित था, तो पुलिस ने उसे 29 नवंबर 2005 को मुखबीर की सूचना पर भीलवाड़ा से गिरफ्तार किया था। इसके सपोर्ट में वकील ने भीलवाड़ा के मकान मालिक कोमल झा, चंदन झा और मुन्नी झा के चार्जशीट में शामिल बयान पढ़कर सुनाए और 164 के बयानों की कॉपी भी कोर्ट में प्रेषित की। जिसमें इन्होंने बताया है कि तुलसी 15 दिन से भीलवाड़ा में था और पुलिस ने उसे 29 को गिरफ्तार किया था। वकील ने सुधीर जोशी, भंवर सिंह हाड़ा और रणविजय सिंह के सीअाईडी और सीबीआई को पहली बार में दिए बयान पढ़कर सुनाए, जिसमें इन्होंने गिरफ्तारी 29 नवंबर बताई थी। भीलवाड़ा जाने से पहले सुधीर जोशी द्वारा 29 नवंबर को रोजनामचे में डाली गई रपट, टीम की 29 नंवबर को की गई आमद-रवानगी के दस्तावेज, तुलसी की फर्द गिरफ्तारी और चार्जशीट के दस्तावेज भी वकील ने कोर्ट में पेश किए। वकील ने यह तर्क भी रखा कि तुलसी को अहमदाबाद से पकड़ा होता तो पहले वहाँ की पुलिस उसे गिरफ्तार बताती, क्यों कि तुलसी अहमदाबाद में भी वांछित था।

तुलसी एनकाउंटर को लेकर वकील ने तर्क रखे कि दिनेश एमएन ने कोई स्पेशल टीम गठित नहीं की थी। मुल्जिम को पेशी पर ले जाने के लिए पुलिसकर्मियों की ड्यूटी लगाने का काम एसपी नहीं पुलिस लाइन का हवलदार मेजर करता है। जाब्ता लाइन में कम था तो हवलदार मेजर ने नजदीकी थाने से जाब्ता मंगवाया था। यह सामान्य और रूटीन प्रक्रिया है। इस संबंध में वकील ने गोस्वारा भी पेश किया। आजम अंबामाता में स्कूटर चोरी में वांछित था, तो उसे उसमें गिरफ्तार किया था।

गौरतलब है कि मुंबई सेशन कोर्ट ने आईपीएस दिनेश एमएन, गुजरात आईपीएस राजकुमार पांड्यन, डीजी बंजारा, डीएसपी नरेंद्र अमीन और उदयपुर कॉन्स्टेबल दलपत सिंह को अलग अलग तारीखों में ट्रायल शुरू होने से पहले ही साक्ष्यों के अभाव और अभियोजन स्वीकृति नहीं मिलने पर सीआरपीसी की धारा 227 और 197 के तहत मामले से बरी कर दिया था। तीनो आईपीएस के बरी होने के आदेश के खिलाफ रुबाबुद्दीन ने और डीएसपी व कांस्टेबल के बरी होने के आदेश के खिलाफ सीबीआई ने हाई कोर्ट में अपील की थी। इधर मामले में आरोपी बनाए गए 22 पुलिसकर्मियों सहित अन्य पर सेशन कोर्ट मुम्बई में ट्रायल नवंबर 2017 से चल रही है।

Tags: encountersohrabuddintulsiएनकाउंटरतुलसीसोहराबुद्दिन

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