सीबीआई ने तुलसी के लिए व्यापारियों से उगाही करने वाला बताकर गिरफ्तार करने की धमकी दे कुछ दस्तावेजों पर जबरन साइन करवाए थे।
उदयपुर. सोहराबुद्दीन-तुलसी एनकाउंटर केस में गुरुवार को मुंबई की सीबीआई स्पेशल कोर्ट में तुलसी का जेल साथी रहा शराफत उर्फ कालू के बयान हुए। शराफत ने कोर्ट काे बताया कि वह 2004 में नीमच जेल ले जाते समय एक बार पुलिस कस्टडी से फरार हुआ था। 2006 में पुलिस ने दोबारा गिरफ्तार कर जेल भेजा। इस बार सिलवेस्टर, आजम, रफीम के साथ तुलसी से भी मुलाकात हुई। तुलसी मुझसे अक्सर जेल में मेरे भागने की स्टोरी, हथकड़ी खोलने के तरीके, गार्ड के व्यवहार के बारे में पूछा करता था। इसके बाद मुझे भैरूगढ़, उज्जैन जेल ट्रांसफर कर दिया था।
सीबीआई की ओर से पीपी बीपी राजू के पूछने पर शराफत ने कोर्ट को बताया कि सीबीआई ने मुझे पूछताछ के लिए 8-10 बार बुलाया था। सीबीआई के एक सरदार अधिकारी मुझे मुंबई लेकर गए थे। वहां वे मुझे सीबीआई ने बड़े अफसरों के पास ले गए थे। सीबीआई अफसरों ने मुझे धमकाया था कि वे मुझे तुलसी के लिए व्यापारियों से उगाही करने वाला तुलसी का साथी बताकर गिरफ्तार कर लेंगे। गिरफ्तारी से बचना है तो दस्तावेजों पर साइन करने होंगे। गिरफ्तारी से बचने के लिए मैंने दस्तावेजों पर साइन किए थे। उनमें क्या लिखा था, मुझे यह तक नहीं बताया गया था। सीबीआई ने शराफत के बयानों के बाद उसे होस्टाइल घोषित कर दिया।
तुलसी जेल में बॉस जैसे रहता था
कोर्ट में वकील वहाब खान की अनुपस्थिति में आराेपी पक्ष के सीआई अब्दुल रहमान ने खुद जिरह की और गवाह से क्रॉस में प्रश्न किए। प्रश्न पूछने पर शराफत ने कोर्ट को बताया कि वह सूरजपोल का हिस्ट्रीशीटर है। उसके खिलाफ चोरी, नकबजनी, लूट, डकैती, जानलेवा हमला, हत्या, आर्म्स एक्ट, एनडीपीएस एक्ट के तहत कई मामलों में चालान हो चुका है और 32-33 मुकदमें दर्ज हैं। जेल में तुलसी काफी खर्चा करता था और बॉस की तरह रहता था। इसलिए मैं भी उसके लिए पानी भरने सहित अन्य निजी काम करता था। बातचीत में वह मुझसे मेरे पू्र्व में भागने की कहानी पूछता रहता था। सीबीआई ने मुझसे पूछताछ तो की थी, लेकिन मेरे कोई बयान नहीं लिए और न ही मुझे कभी कोई बयान पढ़कर सुनाए।
मैं कभी मौके पर नहीं गया, सीबीआई ने होस्टाइल किया
: कोर्ट में तुलसी के एनकाउंटर के समय मौके पर खड़ी पुलिस जीप के बने पंचनामा के गवाह महेश अग्रवाल ने कोर्ट को बताया कि मेरी अंबाजी बस स्टैंड के पास पान की दुकान है। पुलिस अक्सर कई मामलों में पंचनामा के गवाह के रूप में दस्तावेजों पर मेरे साइन करवाती है। मैं किसी मौके पर नहीं गया था। पुलिस ने मेरी दुकान पर आकर कागजों पर साइन करवाए थे। पुलिस अक्सर मेरे दस्तावेजों पर साइन करवाती थी, तो उस दिन किन दस्तावेजों पर साइन करवाए थे, पता नहीं।
: 11 अप्रेल 2007 को सीआईडी ने जांच के दौरान मौके पर एनकाउंटर सीन रीक्रिएट किया था। इस सीन रीक्रिएशन के पंच गवाह सोमा भाई बंजारा ने कोर्ट को बताया कि वह कभी किसी मौके पर नहीं गया। वह धर्मशाला के बाहर बैठा था। इस दौरान पुलिस आई थी और उसके कुछ दस्तावेजों पर साइन करवाए थे। सीबीआई ने दोनों को ही होस्टाइल घोषित किया।



