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सोहराबुद्दीन-तुलसी एनकाउंटर : मेडिकल ज्यूरिस्ट ने कहा इंस्पेक्टर आशीष को तीन-चार फीट दूरी से मारी गई थी गोली

arln-admin by arln-admin
July 2, 2018
Reading Time: 1 min read
सोहराबुद्दीन-तुलसी एनकाउंटर : 12 सालों में 11 मुख्य गवाह, पुलिस अधिकारी, जेलर, जज की हो चुकी है मौत….


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मेडिकल ज्यूरिस्ट के बयान में चार्जशीट थ्योरी “आशीष ने खुद के मारी थी गोली” की नहीं हुई पुष्टि।

उदयपुर. साेहराबुद्दीन-तुलसी एनकाउंटर केस में सोमवार को मुंबई की सीबीआई स्पेशल कोर्ट में तुलसी का पोस्टमार्टम और इंस्पेक्टर आशीष पंड्या का मेडिकल एग्जामिन करने वाले डॉ. राकेश पटेल, तुलसी के समय जेल रहे कैदी निसार हुसैन और भीलवाड़ा के तत्कालीन एसआई त्रिलोक सिंह के बयान हुए।

उन्होंने बताया कि 28 दिसंबर 2006 को सुबह करीब साढ़े पांच बजे हॉस्पिटल में तुलसी प्रजापति और आशीष पंड्या को लाया गया था। एग्जामिन करने पर पाया गया था कि तुलसी की मौत हो चुकी है। वहीं आशीष पंड्या के गोली लगी थी। इनके कपड़ों सहित अन्य की एफएसएल जांच करवाई थी, जिसकी रिपोर्ट में आया कि आशीष के कपड़ों पर कोई गनपाउडर नहीं था, ऐसे में वह खुद को खुद गोली नहीं मार सकता। उसे 3 से 4 फीट दूरी से गोली मारी गई थी। डॉक्टर ने बयान दिए कि उसने सबसे पहले जो ओपीनियन दी थी वह अंदाजे से दी थी, तब तक एफएसएल रिपोर्ट नहीं आई थी। एफएसएल रिपोर्ट प्राप्त होने के बाद फर्दर ओपीनियन दी थी। इन बयानों के बाद सीबीआई की पेश चार्जशीट की यह जानकारी कि आशीष पांड्या ने खुदके गोली मारी थी कि पुष्टि नहीं हो सकी।

जेल के कैदी ने कहा तुलसी के लिए नहीं लिखा कोई लेटर

2005-07 के बीच जेल में दुष्कर्म मामले में सजा काट रहे कैदी नासिर हुसैन ने कोर्ट में बयान दिए कि उसके बैरक में उसका सहअभियुक्त हनीफ था। जेल में वह कोई अंकल नाम के कैदी को नहीं जानता था और न ही तुलसी को जानता था। नासिर ने कहा कि वह 12वीं तक ही पढ़ा-लिखा है, हिंदी तो पढ़ना-लिखना जाता है, लेकिन अंग्रेजी थोड़ी-थोड़ी ही लिखनी आती है। ऐसे में उसने तुलसी के लिए कोई लेटर नहीं लिखा था और न ही वह तुलसी को जानता था। सीबीआई ने मेरे कभी कोई बयान भी नहीं लिए। इस पर सीबीआई ने उसे होस्टाइल घोषित किया।

तुलसी को पकड़ने आई टीम ने भीलवाड़ा में पुलिस को नहीं दी थी जानकारी

भीलवाड़ा के तत्कालीन एसआई त्रिलोक सिंह ने कोर्ट को बताया कि तुलसी को पकड़ने के लिए उदयपुर से आई पुलिस टीम ने भीलवाड़ा में संबंधित प्रतापनगर थाना पर कोई सूचना नहीं दी थी। त्रिलोक सिंह ने कहा तुलसी की गिरफ्तारी के समय वह भीलवाड़ा के प्रतापनगर थाने में पोस्टेड नहीं था। सीबीआई ने 2011 में 25 से 30 नवंबर 2005 का थाने का रोजनामचा रिकॉर्ड मांगा था। जो मैंने सीबीआई को उपलब्ध करवाया था। तब सीबीआई ने पूछा था कि इसमें उदयपुर पुलिस की एंट्री है क्या, तो मैंने रोजनामचे के आधार पर बताया था कि कहीं भी उदयपुर पुलिस के भीलवाड़ा आने से संबंधित कोई जानकारी इसमें नहीं लिखी है।

Tags: encountersohrabuddinसोहराबुद्दिन एनकाउंटर

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