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सोहराबुद्दीन-तुलसी एनकाउंटर : 12 सालों में 11 मुख्य गवाह, पुलिस अधिकारी, जेलर, जज की हो चुकी है मौत….

arln-admin by arln-admin
June 24, 2018
Reading Time: 1 min read
सोहराबुद्दीन-तुलसी एनकाउंटर : 12 सालों में 11 मुख्य गवाह, पुलिस अधिकारी, जेलर, जज की हो चुकी है मौत….


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मौत जो पीछे छोड़ गई कई सवाल।

स्पेशल स्टोरी, 24 जून, (विशेष संवाददाता)। 
सोहराबुद्दीन-तुलसी एनकाउंटर से जुड़े न सिर्फ मुख्य गवाह बल्कि पुलिस अधिकारी, जज, वकील सहित 11 लोगों की इन 12 सालों में मौत हो चुकी है। इनमें अधिकतर की मौत बेहद संदिग्ध परिस्थितियों में हुई है और कुछ की मृत्यु को भले ही अचानक उपजी बीमारी का नाम दे दिया गया हो, लेकिन उनकी मौत पीछे कई सवाल छोड़ गई।

सबसे बड़ा सवाल तो आज भी ये है कि आखिरकार इन एनकाउंटर का मकसद क्या था। सीबीआई चार्जशीट अनुसार गुजरात, राजस्थान और आंध्रप्रदेश तीन राज्यों की पुलिस ने मिलकर कौसरबी और तुलसी की हत्या तो इसलिए की, कि वे सोहराबुद्दीन अपहरण-हत्या के चश्मदीद गवाह थे, लेकिन सोहराबुद्दीन को क्यों मारा, ये तथ्य 13 साल बाद भी पहेली बना हुआ है। जबकि इसकी जांच सीआईडी, देश की सर्वोच्च जांच एजेंसी सीबीआई ने सर्वोच्च न्यायालय के निर्देशन में की है और इस केस से संबंधित कई याचिकाएं हाई कोर्ट और सुप्रीम कोर्ट में सुनी जा चुकी है।

मरने वालों में कुछ गवाह तो ऐसे थे जो सीबीआई चार्जशीट में बताए घटनाक्रम की मुख्य कड़ी थे। सोहराबुद्दीन-तुलसी एनकाउंटर केस की मुम्बई में सीबीआई स्पेशल कोर्ट में दो दिन पूर्व शुक्रवार को हुई पेशी पर आए गवाह जीआरपी कांस्टेबल नटवर लाल ने कोर्ट में दिए बयानों में तुलसी के फरार होने के मामले के पहले आईओ जीआरपी इंस्पेक्टर पीएम जाधव की मृत्यु की जानकारी दी थी। उसने कोर्ट को बताया था कि तुलसी के फरार होने के अनुसंधान के दौरान ही 2007 में इंस्पेक्टर जाधव की मौत हो गयी थी।

जाधव की मृत्यु की सूचना पर ARLivenews के रिपोर्टर ने सोहराबुद्दिन-तुलसी एनकाउंटर से जुड़े मुख्य गवाहों को टटोला तो अब तक केस से सीधे तौर पर जुड़े 8 लोगों की मौत होना सामने आया है। वहीं जज लोया और उनके साथी जज व वकील की मौत पर भी कई सवाल खड़े किए जा चुके हैं। ताजुब्ब की बात है कि इनमें मुख्य गवाहों की मौतें बेहद संदेहास्पद रहीं ।

चश्मदीद गवाह कौसरबी का तो शव तक नहीं मिला :

सीबीआई चार्जशीट के अनुसार सोहराबुद्दीन एनकाउंटर के बाद गुजरात टीम को कौसरबी को इसलिए मारना पड़ा क्यों कि वह सोहराबुद्दीन की अपहरण-हत्या की पहली चश्मदीद गवाह थी। कौसरबी का शव उसके मरने के 13 वर्ष बाद भी नहीं मिला है। तुलसी का एनकाउन्टर भी उसके चश्मदीद गवाह होने के कारण हुआ था।

मौत की तारीख : 25-29 नवंबर 2005

जगह : चार्जशीट के अनुसार कौसरबी को मारा गया और इस केस के मुख्य आरोपी रहे आईपीएस डीजी बंजारा ने शव को हिम्मतनगर के पास अपने गांव इलोल ले जाकर जलाया था। 

मोहम्मद नईमुद्दीन उर्फ कलीमुद्दीन का एनकाउंटर :

मोहम्मद नईमुद्दीन सीबीआई का वह गवाह था, जो सोहराबुद्दीन, कौसरबी के हैदराबाद जाने, वहां ठहरने और हैदराबाद से निकलने के दिन को साबित कर सकता था। इसी के बयान से इनका अपहरण साबित हो सकता था। सीबीआई चार्जशीट के अनुसार सोहराबुद्दीन, पत्नी कौसरबी के साथ हैदराबाद मोहम्मद नईमुद्दीन के घर ही गए थे और लौटते समय इसी के घर से 22 नवंबर एनकाउंटर 2005 को हैदराबाद से संगीता ट्रेवल्स से रवाना हुए थे। सोहराबुद्दीन को लेकर 4 जनवरी 2018 को मुंबई कोर्ट आई नईमुद्दीन की बहन सलीमा ने बताया था कि उसने भाई नईमुद्दीन की पुलिस एनकाउंटर में मौत हो चुकी है।

मौत की तारीख : 8 अगस्त 2016

स्थान : हैदराबाद के बाहर तेलंगाना एंटी नक्सल टीम ने एनकाउंटर किया।

पवन प्रजापति का बावड़ी में शव मिला :

रेतीघाट उज्जैन निवासी पवन प्रजापति तुलसी प्रजापति का छोटा भाई था। यह वह मुख्य गवाह था, जो उदयपुर से उज्जैन जिला कोर्ट पेशी पर लाए गए तुलसी से अपनी मां के साथ मिलने गया था। सीबीआई चार्जशीट में शामिल इसके बयानों में इसने कहा था, कि वह जब तुलसी से मिलने जेल पहुंचा तो वह बहुत घबराया हुआ था और उसने बताया था कि गुजरात एटीएस ने उसे धोखे में रखकर सोहराबुद्दीन-कौसरबी का पता किया और उसके जरिए उन दोनों तक पहुंचे थे, अब गुजरात-राजस्थान पुलिस उसे कभी भी एनकाउंटर में मार सकते हैं। पवन के बहनोई दिनेश ने बताया कि पवन का शव मिलने के बाद पुलिस ने इसे सुसाइड बताया था। हालां कि आत्महत्या के कारणों का कोई खुलासा नहीं हुआ था।

मौत की तारीख : 13 सितंबर 2016

स्थान : रेतीघाट उज्जैन में कॉॅलोनी स्थित एक बावड़ी में शव मिला था।

सतीश शर्मा ह्रदयघात से मौत :

सीबीआई चार्जशीट के अनुसार यह वही गवाह था, जिसने गुजरात एटीएस टीम के लिए उस दिशा फार्म हाउस की व्यवस्था की थी, जिसमें गुजरात एटीएस ने सोहराबुद्दीन और कौसरबी को अपहरण के बाद 22 नवंबर से 25 नवंबर 2005 तक रखा था। सीआईडी चार्जशीट में शामिल सतीश शर्मा के बयानों में फार्म हाउस की व्यवस्था करने की बात आई है। इसके बयान से भी अपहरण साबित हो सकता था। हालां कि सीबीआई को 2010 में जब जांच सौंपी गई, तब तक सतीश शर्मा की ह्रदयघात से मौत हो चुकी थी। सीबीआई ने चार्जशीट में इसकी मौत का हवाला दिया है। सीबीआई ने चार्जशीट में घटनाक्रम की कड़ी से कड़ी जोड़ते हुए सतीश शर्मा की मृत्यु होने की जानकारी भी दी है।

पुलिस निरीक्षक जाधव की ह्रदयघात से मौत :

27 दिसंबर 2006 को तुलसी प्रजापति कोर्ट पेशी कर अहमदाबाद से उदयपुर ट्रेन से लौटते समय पुलिस कस्टडी से भागा था, तब पीएम जाधव अहमदाबाद के जीआरपी थाने के पुलिस इंस्पेक्टर थे। तुलसी के ट्रेन से भागने की तफ्तीश इंस्पेक्टर पीएम जाधव ने की थी। पीएम जाधव ने मौके से पुलिसकर्मियों और तुलसी के साथियों के बीच हुई फायरिंग के खाली कारटेज और मोबाइल बरामद किया था और ट्रेन की डिब्बे की एफएसएल जांच करवाई थी।
पेशी पर आए गवाह जीआरपी कांस्टेबल नटवर लाल ने कोर्ट को आईओ जीआरपी इंस्पेक्टर पीएम जाधव की मृत्यु की जानकारी दी। कोर्ट को बताया कि तुलसी के फरार होने के अनुसंधान के दौरान ही 2007 में इंस्पेक्टर जाधव की ह्रदयघात से मौत हुई थी।

उदयपुर जेलर गजेंद्र सिंह की बीमारी से मौत :

11 अप्रेल को सीबीआई ने 2009 से 2012 तक उदयपुर सेंट्रल जेल में रहे जेलर रामअवतार को कोर्ट में बयान के लिए बुलाया था। इनके बयान के बाद कोर्ट ने सीबीआई से  कहा था कि आपने इन्हें क्यों बुलाया, 2006 में जब तुलसी जेल में था, उस समय के जेलर को बुलाना चाहिए था। इस पर रामअवतार ने जानकारी दी थी कि उनकी बीमारी से मौत हो चुकी थी। जेलर रामअवतार ही यह बता सकते थे कि तुलसी से मिलने जेल में गुजरात-राजस्थान पुलिस के कौन अधिकारी आए थे।

निरीक्षक विजेंद्र व्यास की बीमारी से मौत :

हामिदलाल हत्याकांड जिसमें तुलसी को उदयपुर पुलिस ने गिरफ्तार किया गया था, इस हत्याकांड के प्रथम जांच अधिकारी तत्कालीन हाथीपोल थानाधिकारी विजेंद्र कुमार व्यास थे। उदयपुर पुलिस अधिकारियों ने बताया कि इनकी मृत्यु हो चुकी है। इनकी मृत्यु से अनभिज्ञ सीबीआई ने 10 मई तो इनके बयान करवाने की तारीख भी ले ली थी ।

न्यायाधीश बीएच लोया की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत :

सीबीआई की विशेष अदालत के जज थे और सोहराबुद्दीन एनकाउंटर केस की सुनवाई कर रहे थे। बीएच लोया की मौत 1 दिसंबर 2014 को नागपुर में संदिग्ध परिस्थितियों में हुई थी। जिस पर पिछले दिनों कई सवाल भी खड़े किए गए। इनकी संदिग्ध मौत की जांच की लगातार अलग-अलग स्तरों पर मांग की जा रही है।

सेवानिवृत न्यायाधीश प्रकाश थोम्बर और वकील श्रीकांत खंडालकर :

यह दोनों न्यायाधीश बीएच लोया के भरोसेमंद माने जाते थे। इसी वर्ष 31 जनवरी को कांग्रेस नेता कपिल सिब्बल, सलमान खुर्शीद, एआईसीसी के लीगल डिपार्टमेंट अध्यक्ष विवेक तंखा, वकील सतीश यूइके और आरटीआई एक्टिविस्ट सूर्यकांत ने प्रेस काॅन्फ्रेंस ली थी और आरोप लगाया था कि बीएच लोया ने सोहराबुद्दीन एनकाउंटर से संबंधित कुछ बातें नजदीकी प्रकाश थोम्बर और वकील खंडालकर से साझा की थीं। इसके बाद इनकी मौत भी संदिग्ध परिस्थितियों में हुई, जिसकी जांच होनी चाहिए।

: वकील श्रीकांत खंडालकर का नवंबर 2015 को नागपुर जिला कोर्ट परिसर में मौत के दो दिन बाद शव मिला था। दावा किया गया था कि वकील खंडालकर की मौत कोर्ट भवन के आठवें माले से नीचे गिरने से हुई थी।

: पूर्व न्यायाधीश प्रकाश थोम्बर की मई 2016 में ट्रेन की बोगी में मौत हुई थी। दावा किया गया था कि इनकी मौत बर्थ से नीचे गिरने से मौत हुई थी।

सीबीआई के अधिकारी और इनका पक्ष

इन्होंने की थी मामले की जांच : सीबीआई के डीआईजी कंडा स्वामी, एसपी अमिताभ ठाकुर के निर्देशन में इंस्पेक्टर एनएस राजू, विश्वास मीणा सहित अन्य कई अधिकारियों ने जांच की है। वर्तमान में केस के जांच अधिकारी विश्वास मीणा हैं अौर सरकारी वकील बी.पी राजू सीबीआई की ओर से केस लड़ रहे हैं।

सीबीआई का कहना : मुकदमें से जुड़े मुख्य गवाह नईमुद्दीन, पवन प्रजापति सहित अन्य की मृत्यु होने से केस कमजोर हुआ है। सोहराबुद्दीन-तुलसी दोनों के एनकाउंटर के घटनाक्रम को साबित करना मुश्किल होगा। रही बात गवाहों की सुरक्षा की, तो कोई मांग करता है, हम उसे सुरक्षा उपलब्ध करवाते हैं। (सीबीआई अधिकारी ने नाम नहीं लिखने की शर्त पर बताया)

Tags: गवाहों की मौतजज लोयातुलसीसोहराबुद्दिनसोहराबुद्दिन एनकाउंटर

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