पिछली बार यह पैंतरा सफल रहा था, बंजारा सोहराबुद्दीन केस से बरी हुए थे।
गुजरात के पूर्व आईपीसी और सरकार के भरोसेमंद रहे डीजी बंजारा ने इशरत जहान फेक एनकाउंटर केस से बरी होने के लिए एक बार फिर वही पैंतरा अपनाया है, जो उन्होंने सोहराबुद्दीन-तुलसी एनकाउंटर केस के लिए अपनाया था।
इशरत जहान केस में बंजारा ने खुद को बाहर निकालने के लिए कोर्ट में लगाई डिस्चार्ज एप्लीकेेशन में नरेन्द्र मोदी और अमित शाह को इससे जोड़ने की कोशिश की है। ऐसा ही उन्होंने 2013 में सोहराबुद्दीन एनकाउंटर में तलोजा जेल में रहते समय किया था। तब बंजारा ने जेल में दस पेज का इस्तीफा लिखकर सरकार को भेजा था और उसमें स्पष्ट लिखा था कि उन्होंने जो भी एनकाउंटर किए थे वह सरकार की पाॅलिसी के अनुरूप किए थे। ऐसे में अगर वे जेल में हैं तो वह पाॅलिसी बनाने वाली सरकार को भी जेल में होना चाहिए।
अब 5 जून 2018 :
इशरत जहान फेक एनकाउंटर केस से बरी होने के लिए 5 जून को डीजी बंजारा ने वकील के जरिए कोर्ट में डिस्चार्ज एप्लीकेशन लगवाई है। इस एप्लीकेशन के हवाले से वकील वीडी गज्जर ने बंजारा की ओर से कोर्ट में कहा कि सीबीआई जून 2004 में हुए इशरत जहान एनकाउंटर केस में तत्कालीन गुजरात मुख्यमंत्री नरेन्द्र मोदी और उनके साथी बीजेपी नेता अमित शाह को गिरफ्तार करना चाहती थी। सीबीआई ने उस समय गोपनीय तरीके से मोदी से पूछताछ भी की थी। लेकिन सीबीआई के मंसूबे पूरे नहीं हुए और वह इस केस में मोदी और शाह को गिरफ्तार नहीं कर पाई। आज मोदी इस देश के प्रधापमंत्री और अमित शाह बीजेपी राष्टीय अध्यक्ष हैं। वकील गज्जर ने कोर्ट में कहा कि इसी तरह सीबीआई ने चार्जशीट में उनके क्लाइंट बंजारा पर जो आरोप लगाए हैं, वह मनगढ़ंत है।
तब 1 सितंबर 2013 :
सोहराबुद्दीन-तुलसी एनकाउंटर केस में छह सालों से न्यायिक अभिरक्षा में रह रहे डीजी बंजारा ने सितंबर 2013 में तलोजा जेल मुंबई से अपना सरकारी सेवाओं से त्याग पत्र लिखा था और सरकार को भेजा था। इस पत्र में बंजारा ने स्पष्ट लिखा था कि उन्होंने जो भी एनकाउंटर किए, सरकार के लिए सरकारी की पाॅलिसी के तहत किए हैं। ऐसे में अगर वह और उनके साथी जेल में हैं तो सरकार को भी जेल में होना चाहिए (गौरतलब है कि तब सरकार में मुख्यमंत्री नरेन्द्र मोदी और बीजेपी नेता अमित शाह थे) । डीजी बंजारा ने आरोप लगाए थे कि उन्होंने सरकार की पाॅलिसी के तहत एनकाउंटर लिए, लेकिन सरकार ने उन्हें या अन्य अधिकारियों को बचाने के लिए कुछ नहीं किया। जब मुझे, आईपीएस राजकुमार पंड्यन और दिनेश एमएन को सीआईडी ने गिरफ्तार किया था, तो सरकार को हमारी मदद की याद नहीं आई। सरकार बस अपनी खाल बचाने में लगी है, जब केस में अमित शाह का नाम आया तो सरकार ने बड़े से बड़े वकील को कर उन्हें बचाने का प्रयास किया। इसके अलावा भी बंजारा ने सरकार पर प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष कई आरोप लगाए थे। (गौरतलब है कि इस लेटर ने इतना कमाल किया था कि दो-तीन महीने बाद ही बंजारा को वापस साबरमती जेल गुजरात षिफ्ट कर दिया गया था, जहां उन्हें काफी सुविधा हो गई थी। जबकि बाकि सभी सह ओरापी तलोजा जेल में ही थे। 2014 में इन्हें जमानत मिल गई थी और 2015 में तो केस की ट्रायल शुरू होने से पहले ही बंजारा रिहा हो गए, जिसमें वे सात साल जेल में रहे और सुप्रीम कोर्ट सहित अधिनस्थ अदालतों से कई बार जमानत आवेदन खारिज हो चुके थे) ।