
एनआईए के विशेष लोक अभियोजक ललन प्रसाद ने बताया कि अदालत ने उमर सिद्दीकी, अजहरुद्दीन कुरैशी, हैदर अली, मुजीबुल्लाह अंसारी और इम्तियाज अंसारी को बोधगया में श्रृंखलाबद्ध विस्फोट के मामले में उम्रकैद की सजा सुनाई है। इसके अलावा इन सभी पर 40-40 हजार रुपये का अर्थदंड भी लगाया गया है। सभी आरोपी फिलहाल पटना के बेउर जेल में बंद हैं।
7 जुलाई, 2013 की सुबह महाबोधि मंदिर में एक के बाद एक धमाके हुए थे, आतंकवादियों ने मंदिर के अंदर और बाहर कुल 13 बम लगाए गए थे। इसमें से 10 बमों में विस्फोट हुआ, इन विस्फोटों में एक तिब्बती बौद्धभिक्षु और म्यांमार के तीर्थयात्री घायल हो गए थे। तीन जिंदा बम बरामद किए गए थे जिन्हें बाद में निष्क्रिय कर दिया गया था।
एनआईए ने बोधगया विस्फोट के मामले में करीब 90 गवाहों को अदालत में पेश किया और 11 मई, 2018 को दोनों पक्षों की ओर से बहस पूरी होने के बाद अदालत ने 25 मई तक के लिए अपना फैसला सुरक्षित रख लिया था। इसके बाद 25 मई को पांचों आरोपियों को दोषी करार दिया गया था ।
बौद्धभिक्षुओं ने कहा कि उन्हें 2013 से फैसले का इंतजार था और दोषियों को उम्रकैद की सजा सुनाए जाने के बाद ज्ञानस्थली में विश्वशांति की कामना के साथ प्रार्थनासभा का आयोजन किया गया ।
बौद्धभिक्षुओं ने बोधगया स्थित विभिन्न देशी-विदेशी महाविहारों में प्रार्थना और पूजा की गई। और प्रार्थना की कि भविष्य में ऐसी घटना न केवल इस जगह, बल्कि कहीं नहीं हो ।
बांग्लादेशी महाविहार के प्रभारी भंते प्रियपाल ने बताया बोधगया के अंतर्राष्ट्रीय साधना केंद्र में विशेष प्रार्थनासभा का आयोजन किया गया, जिसमें दुनियाभर में शांति की स्थापना की कामना की गई।
वहीं महाबोधि मंदिर के गर्भगृह में भगवान बुद्ध की प्रतिमा के समक्ष विश्वशांति के लिए प्रार्थना की गई ।

