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सोहराबुद्दीन-तुलसी एनकाउंटर : कांस्टेबल ने कहा अहमदाबाद जाने के आदेश एसएचओ को किसने दिए, मुझे नहीं पता

arln-admin by arln-admin
May 15, 2018


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गवाहों ने को पता नही कि उनके बयान भी हुए, और सीबीआई ने बना दी पूरी कहानी

मुम्बई। सोहराबुद्दीन-तुलसी एनकाउंटर केस में  मंगलवार को मुंबई की सीबीआई स्पेशल कोर्ट में तत्कालीन कॉन्सटेबल निजामुद्दीन के बयान हुए। निजामुद्दीन कोर्ट को बताया की वह 2006 में सूरजपोल थाने में कॉन्सटेबल था और हिम्मत सिंह एसएचओ थे। दिसम्बर 2006 में उसे एसएचओ ने खतरनाक मुलजिम को पेश करने अहमदाबाद लेकर जाने के आदेश दिए थे। लेकिन एसएचओ को यह आदेश किसने दिए थे, मुझे, जानकारी नहीं है। इस पर सीबीआई ने कॉन्सटेबल निजामुद्दीन को हॉस्टाइल घोषित कर दिया। इससे एक दिन पहले सोमवार को भी गुजरात कोर्ट के तत्कालीन कार्यालय अधीक्षक गिरीश भाई पटेल और सरकारी गेस्ट हाउस के कर्मचारी जगदीश प्रजापति के बयान हुए थे। उन्होंने भी कोर्ट को बताया था कि सीबीआई जो बयान पढ़कर सुना रही है, वह उन्होंने पहले कभी दिए ही नहीं थे। sohrabuddin encounter case trial

ट्रायल के दौरान एक के बाद एक गवाहों का यह कहना की ″ सीबीआई ने जो बयान लिखे हैं वह उन्होंने पहले कभी दिए ही नहीं थे या सीबीआई ने उनके बयान कभी लिए ही नहीं थे, ”  से सीबीआई की अब तक की पूरी जांच और चार्जशीट पर सवाल खड़े हो जाते हैं। महत्वपूर्ण बात यह है कि 10 से अधिक गवाह यह तक बोल चुके हैं कि सीबीआई ने उन्हें बुलाया नाम-पते पूछे और जाने को कह दिया था। लेकिन चार्जशीट में सीबीआई ने इन गवाहों के बयानों में एनकाउंटर से संबंधित कई कहानियां लिखी हुई हैं। ऐसे में यह कहानियां और बातें कहां से आए यह तो सीबीआई बता सकती है।

हम सभी आजम और तुलसी को ट्रैन से अहमदाबाद लेकर गए

जानकारी के अनुसार मंगलवार को निजामुद्दीन मुम्बई कोर्ट पहुंचे। उन्होंने बयान देते हुए कोर्ट को बताया कि दिसम्बर 2006 में एसएचओ हिम्मत सिंह के आदेश पर वह अभियुक्त आजम और तुलसी को लेकर अहमदाबाद ले जाने के लिए गए थे उदयपुर सेंट्रल जेल से वारंट पर लेकर आए थे और रेलवे स्टेशन पहुँचे थे। वहां एसएचओ हिम्मत सिंह, कॉन्सटेबल बुद्ध नारायण सहित पुलिस लाइन के 10 से 12 पुलिसकर्मियों थे। हम सभी आजम और तुलसी को ट्रैन से अहमदाबाद लेकर गए। अगले दिन सुबह अहमदाबाद सेंट्रल जेल में जमा कराया और हम सभी लोग सरकारी गेस्ट हाउस चले गए थे।

गुजरात पुलिस ने ही उन दोनों की पेशी कराई थी। इसके बाद शाम को हम सभी आजम और तुलसी को अहमदाबाद सेंट्रल जेल से लेकर उदयपुर के लिए ट्रेन से रवाना हुए और अगले दिन सुबह 7:00 बजे पहुंच गए थे।

सीबीआई ने बुलाया था नाम-पते और रिश्तेदारों के नाम पूछे थे : निजामुद्दीन

क्रॉस में पूछने कॉन्सटेबल निजामुद्दीन ने बताया कि आजम और तुलसी को ले जाने से पहले एसएचओ ने आमद रवानगी की थी। कब की थी यह पता नहीं।  क्रॉस में सीबीआई के बयान सम्बन्धित सवाल पूछने पर निजामुद्दीन ने  कोर्ट को बताया कि सीबीआई ने बुलाया था नाम-पते और रिश्तेदारों के नाम पूछे थे और उसके बाद जाने को कह दिया था। इसके अलावा उसके कोई बयान नहीं हुए थे।

क्रॉस में जब यह पूछा गया कि एसएचओ को अहमदाबाद जाने के आदेश किसने दिए थे, तो निजामुद्दीन ने बताया कि उसे एसएचओ हिम्मत सिंह ने आदेश दिए थे, लेकिन  एसएचओ को किसने आदेश दिए थे, उसे नहीं पता। उच्च अधिकारियों ने ही आदेश दिए होंगे। इस पर सीबीआई ने निजामुद्दीन को घोषित कर दिया। चार्जशीट में शामिल सीआरपीसी की धारा 161 के तहत हुए निजामुद्दीन बयान में लिखा है कि उसे अहमदबाद जाने के आदेश एसएचओ ने दिए थे और एसएचओ को यह आदेश एसपी दिनेश एमएन ने दिए थे। sohrabuddin encounter case trial

सीबीआई ने जो बयानों में लिखा है, वह हमने कभी बताया ही नहीं

कोर्ट में गवाह गिरीश भाई पटेल ने बताया कि वह 2006 में अहमदाबाद कोर्ट में ऑफिस अधीक्षक थे। प्रावधान है कि चार्जशीट पेश होने से पहले न्यायिक अभिरक्षा में चल रहे अभियुक्त को न्यायाधीश के सामने पेश करने की जरूरत नहीं होती है। ऐसे में 28 नवंबर 2006 को उदयपुर पुलिस आजम और तुलसी को पेशी के लिए सीधे अधीक्षक ऑफिस लाई थी, जहां मैंने अगली तारीख दे दी थी। तुलसी को न्यायाधीश के सामने पेश नहीं किया था। तुलसी या उसके वकील ने खतरा होने जैसी कोई शिकायत भी नहीं की थी।

सरकारी वकील ने पूर्व में सीआरपीसी की धारा 161 के तहत दिए बयान पढ़कर सुनाए तो गिरीश भाई ने कहा कि मुझे सीआईडी और सीबीआई दोनों ने ही बुलाया था। नाम-पता पूछकर वारंट की पहचान करवाई थी। इसके अलावा मेरे बयान हुए ही नहीं थे। मैंने तुलसी के हंगामा करने, तुलसी का खुद को खतरा बताने या उसके जज के सामने पेश होने जैसे कोई बयान नहीं दिए थे। इस पर सीबीआई ने उसे होस्टाइल घोषित कर दिया।

 मैं मैनेजर के कहने पर रजिस्टर देने गया था

अहमदाबाद के सरकारी विश्राम गृह के टेलीफोन ऑपरेटर रहे जगदीश प्रजापति ने बताया कि वह 2011 से विश्राम गृह में लगा था। वर्ष 2006 में विश्राम गृह में कार्यरत नहीं था। साल 2011 में विश्राम गृह मैनेजर ने उसे जनवरी-दिसंबर 2006 का एक रजिस्टर गांधीनगर स्थित सीबीआई ऑफिस पहुंचाने को कहा था। वह रजिस्टर सीबीआई ऑफिस लेकर गया और उसकी पावती भी ली थी। रजिस्टर में क्या था, उसे नहीं पता था। क्रॉस एग्जामिनेशन में सरकारी वकील ने उसके पिछले बयान पढ़कर सुनाए तो जगदीश ने  कहा कि ऐसा कोई बयान नहीं लिया गया था। न उसने बताया था कि रजिस्टर में क्या एंट्री है। सीबीआई ने उसे भी होस्टाइल बता दिया। sohrabuddin encounter case trial

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