उदयपुर. उदयसागर झील के पास पनवाड़ी वनखंड में जिंक पंप हाउस से सटी पहाड़ी पर रविवार दोपहर अचानक आग लग गई। घास और झाड़ियां घनी होने से आग कुछ ही देर में पहाड़ी के बड़े हिस्से में फैल गई। सूचना पर वनकर्मियों ने बचाव कार्य शुरू ताे किया है, लेकिन इस आग से यहां रहने वाले कई देशी और प्रवासी पक्षियों, जंतुओं और विभिन्न प्रजाति के सांपों के जीवन पर संकट आ गया है। (udaipur wild life in danger due to land mafia)
आग की सूचना पर घायल जीवों को बचाने के उद्देश्य से पक्षी-पर्यावरण प्रेमी देवेन्द्र मिस्त्री, सुनील दुबे अौर कनिष्क कोठारी मौके पर गए। डीएफओ ओपी शर्मा ने बताया कि सूचना मिलने पर वनकर्मियों को अाग बुझाने आैर बचाव कार्य के लिए भेजा है। पर्यावरण प्रेमी सुनील दुबे ने कहा कि उदयपुर की पहाड़ियों की जैव विविधता को बचाना है तो सरकार को आग पर नियंत्रण के तरीकों के लिए भी बजट तय कर प्रयास करने होंगे। नहीं तो धीरे-धीरे कर सभी पहाड़ियों से जंगल खत्म हो जाएंगे। सरकार को एेसे प्लेन खरीदने चाहिए, जिनकी मदद से उन पहाड़ियों पर पानी का छिड़काव किया जाए, जहां हर वर्ष आग लगने की घटनाएं होती हैं और वहां बड़े स्तर पर वन्यजीवों का हैबिटॉट है।
पक्षियों और जीव-जंतुओं का है बड़ा हैबिटॉट
पक्षी विशेषज्ञ देवेन्द्र मिस्त्री ने बताया कि उदयसागर से लगा होने के कारण यह पहाड़ी बड़े ईगल, गुग्गू, इंडियन आउल, ब्राउन फिशर आउल, कई प्रकार के तीतर, स्टॉर्क, आईबीज सहित कई बड़े बगुले और स्थानीय और प्रवासी पक्षियों का बड़ा आवास है। यहां बड़ी संख्या में बिज्जू, सेही, खरगोश, झाऊ चूहा, जरख, तेंदुआ, गोह सहित कई वन्य जीव भी हैं। यह कठार तक जाने वाला अच्छा कोरिडोर भी है, जहां कई प्रकार की विशेष वनस्पतियां हैं। आग की चपेट में आने से कई वनस्पतियां जलकर राख हो गई हैं और पक्षियों, वन्यजीवों के जीवन पर संकट है।
आशंका : पहाड़ी और जंगल खत्म करने की साजिश
पर्यावरण प्रेमियों ने बताया कि इस पहाड़ी पर पिछले कुछ सालों से हर वर्ष आग लग रही है। इस क्षेत्र में भू-माफिया और होटल उद्यमियों की नजर है। इस तरह से पहाड़ियों पर जो आग लग रही है वह प्राकृतिक नहीं है। संदेह है कि इस पहाड़ी और क्षेत्र को कन्वर्ट कराने के लिए भू-माफियाओं इस पर आग लगवाते हों। ताकि पांच-सात वर्षों में यहां पर जंगल और वन्यजीव बिलकुल खत्म हो जाएं और बाद में इसे कन्वर्ट करवाकर यहां होटलें खड़ी की जा सकें या पट्टे काटे जा सकें।

