18वें ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में प्रधानमंत्री ने उद्घाटन सत्र ‘Inclusive Global Governance and Strengthening’ को किया संबोधित
नई दिल्ली,एआर लाइव न्यूज। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 18वें ब्रिक्स शिखर सम्मेलन के ‘Inclusive Global Governance and Strengthening’ सत्र में वैश्विक शासन व्यवस्था में व्यापक सुधार की जरूरत पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि Global South आज वैश्विक संकटों की front row में है, लेकिन decision-making की back row में है। ऐसे में मौजूदा ‘pyramid of privilege’ को ‘platform of partnership’ में बदलना जरूरी है। | BRICS Summit 2026
प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत की ब्रिक्स अध्यक्षता people-centric और humanity first approach पर आधारित रही है। Resilience, Innovation, Cooperation और Sustainability को प्राथमिकता देते हुए ब्रिक्स सहयोग को आम लोगों से जोड़ने पर विशेष ध्यान दिया गया। भारत की अध्यक्षता के दौरान 350 से अधिक बैठकों का आयोजन और करीब 30 शहरों में प्रतिनिधिमंडलों की मेजबानी की गई।
चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग, रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन, ईरान के राष्ट्रपति डॉ. मसूद पेज़ेश्कियान, आबू धाबी के क्राउन प्रिंस शेख खालिद बिन मोहम्मद, वियतनाम के प्रधानमंत्री ले. मिन्ह हंग, मलेशिया के प्रधानमंत्री दातो सेरी अनवर बिन इब्राहिम, इथियोपिया के प्रधानमंत्री डॉ. अबी अहमद अली, इंडोनेशियाई राष्ट्रपति प्रबोवो सुबियांतो सहित अन्य ब्रिक्स देशों के लीडर्स नई दिल्ली में भारत मंडपम में 12 और 13 सितंबर को हो रहे 18वें ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में हिस्सा ले रहे हैं।
ब्रिक्स के अगले 20 वर्षों के लिए महत्वाकांक्षी एजेंडा
पीएम मोदी ने कहा कि ब्रिक्स अपनी स्थापना के 20 वर्ष पूरे कर रहा है और अब यह उसके ‘coming of age’ का समय है। उन्होंने ब्रिक्स की एकता और सहमति को वैश्विक मंच पर ठोस परिणामों में बदलने की जरूरत बताई।
उन्होंने BRICS Continuity and Implementation Mechanism का प्रस्ताव रखा। इसके तहत Troika के माध्यम से पहलों और निर्णयों के प्रभावी follow-up की व्यवस्था की जा सकती है। साथ ही एक सुरक्षित digital repository बनाने का सुझाव दिया गया, जिसमें प्रत्येक निर्णय के साथ nodal point, समय-सीमा और implementation status दर्ज हो।
Global Governance Reform के लिए 10 प्रस्तावों का रोडमैप
प्रधानमंत्री ने अगली Summit तक BRICS Reform Roadmap तैयार करने का प्रस्ताव रखा। इसके लिए उन्होंने तीन प्रमुख क्षेत्रों—Representation, Responsiveness और Rule-making—पर ध्यान केंद्रित करने की बात कही।
Representation के तहत उन्होंने UN Security Council में सुधार को अब और टालने की जरूरत नहीं होने की बात कही। इसके अलावा वैश्विक वित्तीय संस्थानों में voting power, leadership positions और policy priorities को मौजूदा आर्थिक वास्तविकताओं के अनुरूप बनाने पर जोर दिया।
Responsiveness के तहत वैश्विक संस्थानों की collective response capacity को तेज, प्रभावी और अंतिम व्यक्ति तक पहुंचाने की जरूरत बताई। इसी क्रम में प्रधानमंत्री ने Seafarers Emergency Support Network बनाने का सुझाव दिया, जिसके जरिए distress alerts, medical assistance, परिवारों को सूचना और evacuation में सहयोग किया जा सके।
AI और नई तकनीकों में Global South की भूमिका
Rule-making के तहत पीएम मोदी ने कहा कि AI, cyberspace, outer space, biotechnology और critical technologies जैसे क्षेत्रों में भविष्य के वैश्विक नियम तय किए जा रहे हैं। Global South को केवल rule-taker नहीं, बल्कि rule-shaper बनाने की जरूरत है।
उन्होंने ब्रिक्स के माध्यम से Global South के युवा diplomats और policymakers को negotiation skills, practical training और legal expertise देने का प्रस्ताव रखा। भारत ने इस पहल में नेतृत्व करने की तत्परता भी जताई।
प्रधानमंत्री ने कहा कि यदि भविष्य साझा है तो उसके निर्माण का अधिकार भी साझा होना चाहिए। उन्होंने ब्रिक्स के 20वें वर्ष के संकल्प को “From voice to impact. From privilege to partnership.” के रूप में सामने रखा।
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