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खूंखार पैंथर पकड़ा गया: 40 वनकर्मियों की टीम, 21 ट्रैप कैमरे और 6 पिंजरों के बाद हमलावर आया शिकंजे में

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उदयपुर, एआर लाइव न्यूज। उदयपुर शहर से सटे उमरड़ा क्षेत्र में एक वृद्ध की जान लेने और चार लोगों को घायल करने वाले खूंखार पैंथर को आखिरकार वन विभाग ने शनिवार 29 अगस्त की अलसुबह पकड़ लिया। पैंथर के पकड़े जाने के बाद वन विभाग के अधिकारियों और पिछले तीन दिनों से दहशत के कारण स्कूल परिसर में शरण लिए 7-8 परिवारों के करीब 35 लोगों ने राहत की सांस ली है। | udaipur umarda panther attack | attacking panther captured

इस हमलावर पैंथर को पकड़ने के लिए वन विभाग की करीब 40 सदस्यीय टीम ने लगातार तीन दिन और रात जंगल में निगरानी अभियान चलाया। करीब 200 हेक्टेयर क्षेत्र में पैंथर की गतिविधियों पर नजर रखने के लिए 21 डिजिटल ट्रैप कैमरे लगाए गए, जबकि अलग-अलग स्थानों पर 6 पिंजरे लगाए गए थे।

वन विभाग के उत्तर मंडल के डीएफओ डी.के. तिवारी ने बताया कि पैंथर के हमले में एक ग्रामीण की मौत हो चुकी थी, जबकि चार अन्य लोग घायल हुए थे। ऐसे में हमलावर पैंथर को जल्द पकड़ना बेहद जरूरी हो गया था। उन्होंने कहा कि यदि पैंथर इस क्षेत्र से निकलकर किसी दूसरे इलाके में पहुंच जाता तो वहां भी लोगों के लिए गंभीर खतरा पैदा हो सकता था। इसलिए वन विभाग की टीम ने तत्काल और व्यापक स्तर पर अभियान चलाया।

वन विभाग की टीम ने जंगल में पैंथर के पगमार्क के आधार पर उसकी गतिविधियों का पता लगाया। ट्रैप कैमरों में कैद हो रहे पैंथर के मूवमेंट और उसके व्यवहार का लगातार अध्ययन किया गया। इसके आधार पर वन विभाग ने अपनी रणनीति में बदलाव किया और पिंजरों की लोकेशन भी बदली।

सज्जनगढ़ बायोलॉजिकल पार्क के डॉक्टर डॉ. हिमांशु व्यास ने बताया कि उमरड़ा क्षेत्र से पकड़े गए पैंथर को फिलहाल बायोलॉजिकल पार्क में रखा गया है। प्रथम दृष्टया यह वही पैंथर प्रतीत हो रहा है, जिसने क्षेत्र में ग्रामीणों पर हमला किया था।

हालांकि इसकी वैज्ञानिक पुष्टि के लिए पैंथर के डीएनए सैंपल जांच के लिए आईवीआरआई, देहरादून भेजे जाएंगे। जांच रिपोर्ट आने के बाद यह स्पष्ट हो सकेगा कि पकड़ा गया पैंथर वही हमलावर वन्यजीव है या नहीं।

पैंथर की लगातार गतिविधियों और हमलों को देखते हुए उसके मूवमेंट वाले क्षेत्र में रहने वाले 7-8 परिवारों को सुरक्षा के लिए स्कूल परिसर में शिफ्ट किया गया था। प्रशासन की मदद से वहां उनके भोजन और पानी सहित अन्य आवश्यक व्यवस्थाएं की गईं।

करीब 35 लोग पिछले तीन दिनों से अपने घरों से दूर स्कूल परिसर में रह रहे थे। पैंथर के पकड़े जाने के बाद इन परिवारों ने राहत महसूस की है, हालांकि वन विभाग ने अभी उन्हें तुरंत घर लौटने की अनुमति नहीं दी है।

डीएफओ डी.के. तिवारी के अनुसार वन विभाग की टीम लगातार पैंथर की गतिविधियों पर नजर रख रही थी। 26 और 27 अगस्त की रात पैंथर पिंजरे के पास तक पहुंचा था, लेकिन वह उसमें प्रवेश किए बिना वापस लौट गया।

इसके बाद वन विभाग ने ट्रैप कैमरों से मिले मूवमेंट और पैंथर के व्यवहार का विश्लेषण कर रणनीति बदली। पिंजरों की लोकेशन में बदलाव किया गया और आखिरकार 29 अगस्त की अलसुबह हमलावर पैंथर पिंजरे में फंस गया।

वन विभाग ने पैंथर को पकड़ने के बावजूद उमरड़ा और आसपास के जंगल क्षेत्र में निगरानी जारी रखने का फैसला किया है।

डीएफओ डी.के. तिवारी ने कहा कि अगले दो से तीन दिनों तक क्षेत्र की लगातार मॉनिटरिंग की जाएगी। जब वन विभाग पूरी तरह आश्वस्त हो जाएगा कि इलाके में किसी अन्य पैंथर की असामान्य गतिविधि या लोगों के लिए कोई खतरा नहीं है, तभी स्कूल परिसर में रह रहे परिवारों को वापस अपने घर जाने की अनुमति दी जाएगी।

वन विभाग के इस अभियान में 40 वनकर्मियों की लगातार मेहनत, 21 ट्रैप कैमरों से मिली जानकारी और पिंजरों की रणनीतिक लोकेशन ने अहम भूमिका निभाई। समय रहते पैंथर के पकड़े जाने से उमरड़ा क्षेत्र के ग्रामीणों पर मंडरा रहा बड़ा खतरा फिलहाल टल गया है।

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