सोहराबुद्दीन के भाई नयाबुद्दीन ने हाईकोर्ट के फैसले को सुप्रीम कोर्ट में दी चुनौती : केस में राजस्थान और गुजरात के 21 पुलिसकर्मियों सहित 22 आरोपियों को हाईकोर्ट ने 7 मई 2026 को बरी किया था
मुंबई,एआर लाइव न्यूज। करीब दो दशक पुराने सोहराबुद्दीन शेख एनकाउंटर केस (Sohrabuddin encounter case) में कानूनी लड़ाई एक बार फिर सुप्रीम कोर्ट पहुंच गई है। सोहराबुद्दीन शेख के छोटे भाई नयाबुद्दीन शेख ने बॉम्बे हाईकोर्ट के उस फैसले को चुनौती देते हुए सर्वोच्च अदालत में याचिका दायर की है, जिसमें 22 आरोपियों को बरी किए जाने के सीबीआई स्पेशल कोर्ट (मुंबई) के फैसले को बरकरार रखा गया था। नयाबुद्दीन शेख की सुप्रीम कोर्ट में याचिका के बाद मामले में एक नया कानूनी चरण शुरू हो गया है।
इस मामले में ट्रायल फेस कर बरी हुए 22 आरोपियों में राजस्थान पुलिस के उदयपुर में एडि.एसपी अब्दुल रहमान (तत्कालीन इंस्पेक्टर), डूंगरपुर कोतवाली थानाधिकारी हिमांशु सिंह (तत्कालीन एसआई), बासवाड़ा में थानाधिकारी श्याम सिंह (तत्कालीन एसआई) सहित अधिनस्थ पुलिसकर्मी उदयपुर पुलिस डीएसटी एएसआई करतार सिंह, युदवीर सिंह (सेवानिवृत) और नारायण सिंह (निधन हो चुका है) सहित गुजरात पुलिस के 15 पुलिसकर्मी शामिल हैं।
क्या है पूरा मामला?
23 नंवबर 2005 को राजस्थान और गुजरात पुलिस ने संयुक्त ऑपरेशन कर वांछित अपराधी सोहराबुद्दीन शेख को एनकाउंटर में मार गिराया था, जबकि सोहराबुद्दीन के साथी तुलसी का भी एक साल बाद दिसंबर 2006 में एनकाउंटर हुआ था। सीबीआई ने मामले की जांच की थी और इसे फर्जी एनकाउंटर मानते हुए गुजरात के तत्कालीन गृहमंत्री अमित शाह (वर्तमान केन्द्रीय गृह मंत्री), राजस्थान के तत्कालीन गृहमंत्री गुलाबचंद कटारिया (वर्तमान पंजाब के राज्यपाल) सहित आंध्रप्रदेश, राजस्थान और गुजरात के आईपीएस अधिकारी, पुलिसकर्मी और उद्योगपतियों सहित 38 लोगों को आरोपी मानते हुए चार्जशीट दाखिल की थी।
वर्ष 2014 के बाद गृहमंत्री अमित शाह, गुलाबचंद कटारिया, आरके मार्बल के मालिक विमल पाटनी, गुजरात के आईपीएस डीजी बंजारा, राजकुमार पांडियन, अभय चूडास्मा, विपुल अग्रवाल, दिनेश एमएन सहित 16 आरोपियों को केस में ट्रायल शुरू होने से पहले ही कोर्ट द्वारा डिस्चार्ज कर दिया गया था। मतलब इन 16 आरोपियों पर तो कोर्ट ने आरोप माना ही नहीं था और इन्हें आरोपमुक्त कर दिया था। ऐसे में एनकाउंटर टीम में शामिल 21 पुलिसकर्मियों सहित 22 आरोपियों ने मामले में ट्रायल फेस की थी।
22 आरोपियों को क्यों किया गया बरी?
मुंबई की विशेष सीबीआई अदालत ने दिसंबर 2018 में सभी आरोपियों को बरी कर दिया था। अदालत का कहना था कि अभियोजन पक्ष ऐसा साक्ष्य पेश नहीं कर पाया, जिससे हत्या और कथित साजिश में आरोपियों की भूमिका साबित हो सके।
सोहराबुद्दीन के भाइयों रुबाबुद्दीन और नयाबुद्दीन ने इस फैसले को बॉम्बे हाईकोर्ट में चुनौती दी थी। अप्रैल 2019 में दायर अपील पर सुनवाई के बाद हाईकोर्ट ने 7 मई को निचली अदालत के फैसले में हस्तक्षेप करने से इनकार कर, 21 पुलिसकर्मियों सहित 22 आरोपियों को बरी कर दिया था।
हाईकोर्ट ने क्या कहा था?
हाईकोर्ट ने फैसले में कहा था कि अभियोजन (सीबीआई) का मामला मुख्य रूप से परिस्थितिजन्य साक्ष्यों पर आधारित था, लेकिन इन परिस्थितियों को जोड़ने वाली कड़ी में कई कमजोरियां थीं। अभियोजन पक्ष आरोपों या षडयंत्र की साजिश को साबित नहीं कर पाया।
सीबीआई ने भी नहीं की अपील
इस मामले की जांच करने वाली सीबीआई ने हाईकोर्ट के समक्ष कहा था कि वह आरोपियों को बरी किए जाने के फैसले को स्वीकार करती है और उसके खिलाफ अपील नहीं करेगी।
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