उदयपुर के डॉ. अरविंदर सिंह ने रेलवे से मांगा ₹6.20 लाख का मुआवजा : ट्रैन का सफर तो दूर दिव्यांगों के लिए रेलवे स्टेशन के टिकट काउंटर से ट्रेन में चढ़ने तक का सफर ही बेहद जोखिमभरा
उदयपुर, एआर लाइव न्यूज। उदयपुर रेलवे स्टेशन पर दिव्यांग यात्रियों के लिए आवश्यक सुविधाओं के अभाव का मामला अब जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग (उपभोक्ता न्यायालय) पहुंच गया है। आयोग ने उदयपुर के अर्थ डायग्नोस्टिक सेंटर के सीईओ डॉ.अरविंदर सिंह की याचिका पर उत्तर पश्चिम रेलवे, जयपुर मुख्यालय के महाप्रबंधक तथा अजमेर मंडल के रेल प्रबंधक को नोटिस जारी करते हुए आगामी 27 अगस्त को स्वयं अथवा अधिकृत प्रतिनिधि के माध्यम से उपस्थित होकर जवाब प्रस्तुत करने के निर्देश दिए हैं। | Udaipur Railway Disabled Facilities Case | dr arvinder singh news
आयोग ने स्पष्ट किया है कि निर्धारित तिथि पर जवाब प्रस्तुत नहीं करने की स्थिति में एकपक्षीय कार्रवाई की जा सकती है। अगली सुनवाई 27 अगस्त को होगी। Udaipur Consumer court issues notice North Western Railway disabled-facilities on Dr. Arvinder Singh plea
दिव्यांग यात्री को ट्रेन तक पहुंचने में हुई परेशानी
याचिकाकर्ता डॉ. अरविंदर सिंह ने बताया कि वे 50 प्रतिशत पोलियोग्रस्त दिव्यांग हैं और आवागमन के लिए व्हीलचेयर एवं रैंप जैसी सुविधाओं पर निर्भर रहते हैं। 14 मार्च 2026 को उन्हें कैलिपर मरम्मत के लिए तत्काल जयपुर जाना था। इसके लिए वे उदयपुर सिटी रेलवे स्टेशन पहुंचे, लेकिन वहां दिव्यांग यात्रियों के लिए आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध नहीं मिलीं।
उनके अनुसार स्टेशन परिसर में दिव्यांगों के लिए आरक्षित पार्किंग, अलग टिकट काउंटर, व्हीलचेयर सुविधा तथा प्लेटफॉर्म तक सुगम पहुंच की व्यवस्था नहीं थी। लंबी कतारों और पूछताछ काउंटर बंद होने के कारण उन्हें भारी परेशानी का सामना करना पड़ा। अंततः उन्होंने 412 रुपये का टिकट ऑनलाइन बुक किया। | North Western Railway (NWR)
ट्रेन में चढ़ना भी नहीं हुआ संभव
डॉ. सिंह ने याचिका में बताया कि प्लेटफॉर्म तक पहुंचने के बाद भी उन्हें ट्रेन में चढ़ने के लिए किसी प्रकार का रैंप या सहायता उपलब्ध नहीं कराई गई। कोच की ऊंची सीढ़ियों के कारण उनके लिए ट्रेन में चढ़ना जोखिमपूर्ण था। ट्रैन में चढ़ने के लिए वहां कोई अस्थायी रैंप तक उपलब्ध नहीं था। वे मौजूदा परिस्थितियों में ट्रैन में चढ़ने का प्रयास करते तो उन्हें गंभीर चोट लग सकती थी। ऐसे में टिकट खरीदने के बावजूद ट्रेन से यात्रा नहीं कर सके और मजबूरन निजी वाहन से जयपुर जाना पड़ा। | Dr. Arvinder Singh
रेलवे पर संवैधानिक अधिकारों के हनन और कानून के उल्लंघन का आरोप
याचिका में कहा गया है कि दिव्यांगजन अधिकार अधिनियम-2016 के तहत रेलवे सहित सभी सार्वजनिक परिवहन सेवाओं में दिव्यांगों के लिए सुगम अवसंरचना उपलब्ध कराना अनिवार्य है। इसमें रैंप, लिफ्ट, व्हीलचेयर, विशेष टिकट काउंटर और आरक्षित पार्किंग जैसी सुविधाएं शामिल हैं। संविधान के अनुच्छेद 14 और 21 में दिव्यांगों को समानता और गरिमापूर्ण जीवन का अधिकार प्राप्त है।
डॉ. सिंह ने आरोप लगाया है कि रेलवे प्रशासन कानूनी दायित्वों के निर्वहन में विफल रहा, रेलवे ने न सिर्फ दिव्यांगों के संवैधानिक अधिकारों का हनन किया है, बल्कि दिव्यांगजन अधिकार अधिनियम, उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम, भारतीय रेलवे नीति और सुप्रीम कोर्ट के आदेशों का भी उल्लंघन किया है।
डॉ अरविंदर सिंह ने कहा वे भारतीय रेल से सफर तब कर पाते जब टिकट काउंटर से लेकर ट्रेन में चढ़ने तक का सफर उनके लिए संभव होता। लेकिन टिकट काउंटर से ट्रेन तक का सफर बतौर दिव्यांग उनके लिए बेहद असुविधाजनक, कष्टदायक और अपमानजनक था। रेलवे स्टेशन जाकर ऐसा लगा जैसे भारतीय रेल की सुविधा दिव्यांगों के लिए है ही नहीं।
₹6.20 लाख मुआवजे की मांग
डॉ. अरविंदर सिंह ने उत्तर पश्चिम रेलवे से कुल 6 लाख 20 हजार 412 रुपये के मुआवजे की मांग की है। इसमें—
- मानसिक पीड़ा एवं अपमान के लिए – ₹5 लाख
- आर्थिक नुकसान के लिए – ₹1 लाख
- मुकदमे का खर्च – ₹20 हजार
- टिकट राशि – ₹412 शामिल है।
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