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660 ग्राम के बेबी और 27 सप्ताह में जन्में प्रीमेच्योर नवजातों ने जीती जिंदगी की जंग

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उदयपुर,(एआर लाइव न्यूज)। चिकित्सा विज्ञान में अक्सर ऐसे मामले सामने आते हैं जो न केवल डॉक्टरों के कौशल की परीक्षा लेते हैं, बल्कि आम आदमी के लिए किसी चमत्कार से कम नहीं होते। आज पेसिफिक मेडिकल कॉलेज एंड हॉस्पिटल, भीलों का बेदला के बाल रोग विभाग के एनआईसीयू वार्ड में एक ऐसा ही केस देखने को मिला, जब महीनों की कड़ी तपस्या और अत्याधुनिक देखभाल के बाद दो अत्यंत प्री-टर्म (समय से पहले जन्मे) बच्चों को अस्पताल से छुट्टी दी गई। पीएमसीएच के चेयरमेन राहुल अग्रवाल ने बताया कि यह सफलता केवल मशीनों की नहीं, बल्कि पीएमसीएच के पीआईसीयू और एनआईसीयू इंचार्ज डॉ. पुनीत जैन की पूरी चिकित्सकीय एवं नर्सिंग टीम, मानवीय संवेदना और कभी हार न मानने वाले जज्बे की है। udaipur pmch doctors team save premature baby life with advanced treatment and team work

पहला मामला अत्यंत चुनौतीपूर्ण और भावनात्मक था। 40 वर्षीय महिला जिनकी प्रेग्नेंसी हिस्ट्री बहुत ही डिफिकल्ट होने से उनकी कोई संतान नहीं थी, उन्होंने 10 अक्टूबर 2025 को एक शिशु को जन्म दिया। उनकी यह डिलीवरी भी सामान्य नहीं थी। बच्चा मात्र 30 सप्ताह (लगभग 7 महीने) की गर्भावस्था में पैदा हुआ था। जन्म के समय इस बच्चे का वजन केवल 660 ग्राम था। चिकित्सा की दुनिया में इतने कम वजन वाले बच्चे को बचाना एक भारी चुनौती मानी जाती है, क्योंकि ऐसे बच्चों के अंग पूरी तरह विकसित नहीं होते हैं और संक्रमण का खतरा बहुत अधिक होता है। लेकिन डॉक्टरों और नर्सिंग स्टाफ ने हार नहीं मानी।

डॉ. पुनीत जैन और उनकी टीम की देखरेख में बच्चा पूरे 104 दिनों तक एनआईसीयू में रहा। आज 104 दिनों के संघर्ष और देखभाल के बाद, बच्चा पूरी तरह स्वस्थ है और उसका वजन बढ़कर 1.790 किलोग्राम हो गया है। उस मां के लिए, जिसने अपने पिछले कई प्रयासों में निराशा हाथ लगने के बाद उम्मीद छोड़ दी थी, यह बच्चा किसी ईश्वरीय वरदान से कम नहीं है।

दूसरे मामले में भी डॉक्टरों ने अद्भुत कौशल का परिचय दिया। 2 दिसंबर 2025 को जन्मे इस बच्चे की गर्भावस्था की अवधि केवल 27 सप्ताह थी। इतने कम समय में जन्म लेने वाले बच्चों के फेफड़े और अन्य महत्वपूर्ण अंग बहुत नाजुक होते हैं। जन्म के समय बच्चे का वजन 1.18 किलोग्राम था। एनआईसीयू में 51 दिनों तक चले विशेष उपचार और निगरानी के बाद, आज यह बच्चा भी पूरी तरह स्थिर और स्वस्थ है। डिस्चार्ज के समय बच्चे का वजन 1.840 किलोग्राम है, जो उसके स्वस्थ विकास का संकेत है।

सफलता के पीछे समर्पित टीम : इन दोनों बच्चों की जान बचाने के पीछे एक मजबूत संस्थागत सहयोग और एक समर्पित टीम का अथक परिश्रम है। डॉ. पुनीत जैन ने इस सफलता का श्रेय अपनी पूरी टीम को दिया, जिसमें डॉ. सन्नी मालवीय, डॉ. धारा पटेल, डॉ. सविता और सीनियर व जूनियर रेजिडेंट डॉक्टर्स शामिल हैं। विशेष रूप से नर्सिंग स्टॉफ की भूमिका को इसमें रीढ़ की हड्डी माना गया है। डॉ. जैन ने कहा कि स्टॉफ की राउंड द क्लॉक निगरानी और मां जैसी देखभाल के बिना यह संभव नहीं था। इन नन्हे बच्चों को हर पल विशेष ध्यान की जरूरत थी, जिसे नर्सिंग टीम ने बखूबी निभाया। इसके साथ ही प्रसूति रोग विभाग और एनेस्थीसिया विभाग का भी विशेष योगदान रहा, जिन्होंने माताओं की उत्कृष्ट देखभाल की और सुरक्षित प्रसव सुनिश्चित कियाए जिससे बाल रोग विशेषज्ञों को आगे का इलाज करने का अवसर मिला।

डिसक्लेमर: एआर लाइव न्यूज (AR Live News) से मिलते-जुलते नामों से रहें सावधान, उनका एआर लाइव न्यूज से कोई संबंध नहीं है। एआर लाइव न्यूज के संबंध में कोई भी बात करने के लिए पत्रकार लकी जैन (9887071584) और पत्रकार देवेन्द्र शर्मा (9672982063) ही अधिकृत हैं।

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