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विश्वराज सिंह मेवाड़ ने दिखाया आईना, विधानसभा में खोली पर्यटन उद्योग की पोल: बोले- पर्यटन के बाजार में नीलाम हो गया शहर

MLA Vishvaraj Singh Mewar raise issue of hill cutting on the name of tourism industry in rajasthan vidhan sabhaMLA Vishvaraj Singh Mewar raise issue of hill cutting on the name of tourism industry in rajasthan vidhan sabha

उदयपुर,(एआर लाइव न्यूज)। राजस्थान विधानसभा में जारी बजट सत्र में वन एवं पर्यावरण विभाग की अनुदान मांगों पर चर्चा के दौरान पहाड़ों की कटाई का मुद्दा गूंजा। नाथद्वारा विधायक विश्वराज सिंह मेवाड़ ने पर्यटन उद्योग के नाम पर हो रहे पहाड़ों के कत्ल की हकीकत रख सबको आईना दिखा दिया। उदयपुर में पहाड़ियों और झीलों को पहुंचाए जा रहे नुकसान पर विश्वराज सिंह मेवाड़ ने कहा पर्यटन के बाजार में नीलाम हो गया शहर, पहाड़ों का कत्ल हो रहा, नीतियों को बदलना होगा।। विश्वराज सिंह मेवाड़ ने विधानसभा में उदयपुर, कुंभलगढ़ और नाथद्वारा के पहाड़ों की अंधाधुंध हो रही कटाई की कड़वी हकीकत को सदन के सामने रखा। (MLA Vishvaraj Singh Mewar raise hill cutting issue)

विश्वराज सिंह मेवाड़ विधानसभा में बोले, आज हम देख रहे हैं सबसे ज्यादा नुकसान नए उद्योग “पर्यटन उद्योग” से हो रहा है। पर्यटन उद्योग का कथित उद्देश्य यही है, कि सुविधाएं लेकर आएं, ताकि जो लोग वहां पर आएं, वे जगह का आनंद ले सकें। लेकिन सुविधाएं लाने के नाम पर उस जगह को ही बिगाड़ देंगे तो पर्यटक क्या देखेंगे। कई बार ऐसा लगता है कि पर्यटन उद्योग के मकसद कुछ और भी हैं।

विधायक मेवाड़ बोले- आप खुद अंजादा लगा सकते हैं, जो उदयपुर तालाब, बगीचों के लिए जाना जाता था, आज आप एक साफ तालाब बताएं, एक बगीचा बताएं। शहरवासी ही तालाब से दूर हो रहे हैं, तो पर्यटक क्या आनंद लेंगे। तालाब किनारे हों, ग्रीन बेल्ट हो, फॉरेस्ट लैंड हो, नदी के किनारे हों, सब जगह होटल बन रहे हैं, मगरे (पहाड़) पर सरकारी भवन बन रहे हैं, जहां हरियाली बची हुई है वहां और होटल बन रहे हैं। उनकी सहूलियत के लिए मगरों पर रास्ते बन रहे हैं। दुनिया भर में 31 शहर वैटलेंड घोषित हैं, उदयपुर भी वेटलैंड सिटी घोषित हुआ है, लेकिन वेटलैंड के कानून मानने के लिए कोई तैयार नहीं है, तो एकीकरण का सिद्धांत कहां है, जहां सबको मिलकर पर्यावरण बचाना है। यहां तो ऐसा लगता है कि पर्यटन के बाजार में नीलाम हो गया शहर।

विश्वराज सिंह मेवाड़ ने कुंभलगढ़ की दुर्दशा पर कहा कि माउंट आबू की दुर्दशा की तरफ कुंभलगढ़ भी तेजी से बढ़ रहा है। जो जंगलों से उभरता हुआ एक किला था, अब बहुत जल्द होटलों से उभरता हुआ नजर आएगा। नाथद्वारा के हर पहाड़, मगरे पर रास्ते, मकान-होटल बन रहे हैं। मगरों का कत्ल हो रहा है। नीतियों को बदलना है।

विश्वराज बोले सेटेलाइट फोटोग्राफ साफ दिखा रहे हैं कि पिछले दशकों में जल स्त्रोत कम होते जा रहे हैं, सूखते जा रहे हैं। दक्षिण राजस्थान के लिए इंटरनेशनल जर्नल में कहा गया है कि पहाड़ियों के कटाव, मिट्टी के कटाव, झीलों के सूखने से एनवायरमेंटल स्टेटस में अलार्मिंग चेंज हो रहा है, भूजल स्तर गिर रहा है। हमें भूजल के स्तर को उंचा उठाना है। भले ही जो जलाशय सूख गए हैं वहां से भराव निकालकर पुर्नरूप में लाएं। इसके लिए नीतियों को भी बदलना होगा।

सदन में आंकड़े पेश करते हुए विश्वराज सिंह मेवाड़ ने प्रदेश में घटते जंगलों की स्थिति बतायी। उन्होंने कहा वन विभाग के अनुसार 1961 में राजस्थान का वन क्षेत्र 39420 स्क्वॉयर किलोमीटर था, जो 2020 में 32845.3 स्क्वॉयर किलोमीटर ही रह गया। यह अपने आप में वनविभाग की कार्यशैली बताता है। एकीकरण के सिद्धांत के तहत वनों को बचाना सिर्फ अकेले वन विभाग की जिम्मेदारी नहीं है, सभी विभाग को मिलकर वनों को बचाने के प्रयास करने होंगे।

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