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तस्वीरों में देखे प्रयागराज महाकुंभ मेला-2025 की भव्यता

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प्रयागराज,(एआर लाइव न्यूज)। प्रयागराज में चल रहा महाकुंभ मेले पूरी भव्यता लिए नजर आ रहा है। भारतीय संस्कृति में कुंभ मेले का अपना एक महत्व है। कुम्‍भ मेला धार्मिक-आध्यात्मिक अनुष्ठानों का एक भव्य आयोजन है, जिसमें संगम, स्नान उन सभी अनुष्ठानों में सबसे महत्त्वपूर्ण है। प्रयागराज में 12 साल बाद महाकुंभ आयोजित हो रहा है।(Prayagraj Maha Kumbh Mela 2025)

45 दिनों तक चलने महाकुंभ मेले में भाग लेने के लिए त्रिवेणी संगम पर, लाखों तीर्थयात्री एक साथ आते हैं। संगम स्नान के अलावा तीर्थयात्री पवित्र नदी के किनारे पूजा में भी शामिल होते हैं और विभिन्न साधुओं और संतों के मार्गदर्शन में ज्ञानवर्धक प्रवचनों में सक्रिय रूप से भाग लेते हैं।(Prayagraj Maha Kumbh Mela 2025)

कुम्भ मेला मकर संक्रांति जब सूर्य मकर राशि में प्रवेश करता है, के शुभ अवसर अथवा पौष पूर्णिमा से प्रारम्भ होता है। कुम्‍भ मेला की सम्पूर्ण अवधि के दौरान पवित्र जल में स्नान करना पवित्र माना जाता है, किन्तु कुछ विशिष्ट तिथियां हैं जो विशेष महत्त्व रखती हैं। इन तिथियों पर विभिन्न अखाड़ों के संत अपने शिष्यों के साथ भव्य जुलूस निकालते है। वे एक भव्य अनुष्ठान में भाग लेते हैं, जिसे शाही स्नान भी कहा जाता है, जो कुम्‍भ मेले के शुभारम्भ का प्रतीक है।

शाही स्नान कुम्‍भ मेले का मुख्य आकर्षण है, जिसके लिए विशेष प्रबन्‍ध किये जाते हैं। शाही स्नान के अवसर पर लोगों को शाही स्नान करने वाले साधु संतो के पुण्य कर्मों एवं और गहन ज्ञान का आशीर्वाद प्राप्त होता है। पौण पूर्णिमा पर शुरू हुए महाकुंभ मेले में पहला शाही स्नान 14 जनवरी 2025 को मकर संक्राति पर हुआ था।

मौनी अमावस्या का विशेष धार्मिक महत्त्व है क्योंकि ऐसा माना जाता है कि इस दिन पवित्र नदी में स्नान करने के लिए ग्रहों की स्थिति सर्वथा अनुकूल होती है। तीर्थ यात्रियों की विशाल मंडली मौनी अमावस्या के दिन कुम्भ मेले में आती है और इस दिन को आध्यात्मिक शक्ति तथा शुद्धीकरण का महत्त्वपूर्ण दिन बनाती है।

हिन्दू पौराणिक कथाओं के अनुसार वसंत पंचमी ऋतुओं में परिवर्तन तथा ज्ञान की अधिष्ठात्री देवी भगवती सरस्वती के आविर्भाव के उत्सव का प्रतीक है। इस पवित्र उत्सव को मनाने के लिए कल्पवासी पीले रंग के वस्त्र धारण करते हैं। इस दिन पवित्र नदी में स्नानए दान तथा पूजन का विशेष महत्त्व है।

माघी पूर्णिमा को माघ मास का अंतिम दिन माना जाता है। इस दिन पवित्र जल में स्नान तथा वस्त्र और गोदान दैहिक तथा दैविक सभी कष्टों का निवारण करता है। माना जाता है कि माघ पूर्णिमा के दिन देवतागण पृथ्वी लोक में भ्रमण के लिए आते हैं।

पुराणों के अनुसार इसी दिन भगवान शिव का पार्वती जी से विवाह संपन्न हुआ था। यह कुम्भ का अन्तिम स्नान पर्व है। इस दिन पवित्र जल में स्नान करने के पश्चात् बिल्वपत्र, धतूरा, आक के फूल, चंदन, अक्षत, ईख की गंडेरियों सुगंधित द्रव्य, मधु, नवनीत, दूध तथा गंगाजल द्वारा शिवलिंग की पूजा एवं अभिषेक करने से विशेष फल की प्राप्ति होती है।

डिसक्लेमर: एआर लाइव न्यूज (AR Live News) से मिलते-जुलते नामों से रहें सावधान, उनका एआर लाइव न्यूज से कोई संबंध नहीं है। एआर लाइव न्यूज के संबंध में कोई भी बात करने के लिए पत्रकार लकी जैन (9887071584) और पत्रकार देवेन्द्र शर्मा (9672982063) ही अधिकृत हैं।

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