- प्रदेश में गत माह 14 जिलों की गांव-ढाणियों से गिरफ्तार हुए 633 साइबर ठगों से हुआ खुलासा
- राजस्थान पुलिस का ऑपरेशन एंटी-वायरस ने किए कई चौंकाने वाले खुलासे
उदयपुर,(एआर लाइव न्यूज)। साइबर अपराध, ऑनलाइन ठगी के मामले आम लोग ही नहीं, बल्कि पुलिस के लिए भी एक सिरदर्द बन चुके हैं, साइबर ठग इतने शातिर हैं कि पुलिस ठगी के एक तरीके का तोड़ निकालती है, तो ठग तब तक दूसरा तरीका ले आते हैं। साइबर ठगी के मामलों में पिछले दिनों प्रदेश स्तर पर शुरू हुए ऑपरेशन एंटी वायरस के तहत हुई कार्रवाई में एक बड़ा खुलासा हुआ है, ये साइबर ठग राजस्थान के कई छोटे गांव-ढाणियों में बैठकर ऑनलाइन ठगी को अंजाम दे रहे हैं। ये गिरोह न सिर्फ प्रदेश बल्कि इंटरनेशलन लेवल पर भी लोगों के खातों को खाली कर रहे हैं। online fraud cases in rajasthan
गृह विभाग से प्राप्त आंकड़ों के अनुसार पुलिस ने बीते महीने 10 जुलाई से 31 जुलाई तक ऑपरेशन एंटीवायरस चलाया और 18 जिलों में बड़े स्तर पर छापेमारी की। इनमें प्रदेश के 14 जिलों में स्थित अलग-अलग गांव-ढाणियों से छापेमारी कर 633 साइबर ठगों को गिरफ्तार किया है। इन साइबर ठगों से पुलिस ने 1 करोड़ से अधिक की राशि जब्त की है। जबकि 7 जिलों से फरार हुए 226 साइबर ठगों की पुलिस तलाश कर रही है। ऑपरेशन एंटी वायरस में हुई गिरफ्तारियां प्रदेश में अब तक साइबर अपराध के खिलाफ हुई कार्रवाइयों में सबसे बड़ी है।
साइबर ठगों के ठिकानों का हुआ खुलासा
आंकड़ों के अनुसार पुलिस टीम ने ऑपरेशन एंटी वायरस के बीस दिनों में सबसे ज्यादा 478 ठग डीग जिले से पकड़े और इनके द्वारा ठगी गयी 37 लाख 82 हजार राशि बरामद की है। डीग में पुलिस ने साइबर अपराध के 62 जगहों को चिह्नित भी कर लिया है। इसके अलावा अलवर से 55, भिवाड़ी से 37, चूरू से 25, करौली से 10, डीडवाना-कुचामन से 10, बारां से 5, पाली, भरतपुर से 3-3, अमजेर, गंगापुर सिटी से 2-2 और भीलवाड़ा, डूंगरपुर, सीकर से 1-1 साइबर ठग को ऑपरेशन एंटीवायरस के तहत कार्रवाई कर धरदबोचा है। शाहपुरा में ऑनलाइन ठगी में लिप्त 35 अपराधिक लोगों के ठिकानों पर छापेमारी कर पुलिस ने उन्हें चिह्नित तो कर लिया है, लेकिन ये साइबर ठग अभी फरार हैं, इस प्रकार इन 18 जिलों में हुई छापेमार कार्रवाई के बाद पुलिस चिह्नित हुए 226 साइबर ठगों की तलाश कर रही है।
राजस्थान की गांव-ढाणियों में संचालित हो रहे ऑनलाइन ठगी के गिरोह
राजस्थान के गांव-ढाणियों में बैठकर साइबर ठगी करने वाले ये बदमाश इतने शातिर हैं कि ठगी के लिए इंटरनेशनल कॉल या वीपीएन नेट का इस्तेमाल करते हैं, ताकि पुलिस को इनकी लोकेशन का पता नहीं चल सकेए यहां तक कि ये ठग कॉल करते समय ऐसी तकनीक का उपयोग करते हैं कि शिकार के मोबाइल स्क्रीन पर किसी सरकारी विभाग का नंबर ही फ्लैश होता दिखायी दे।
प्रदेश में ऑनलाइन ठगी के गढ़ बने ये गांव
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