नारायण सेवा संस्थान का 40वां दिव्यांग-निर्धन सामूहिक विवाह समारोह
उदयपुर,(एआर लाइव न्यूज)। नारायण सेवा संस्थान की ओर से 40वां दिव्यांग एवं निर्धन सामूहिक विवाह समारोह 2-3 सितंबर को होने जा रहा है। शादी की सभी रस्में और कार्यक्रम संस्थान के बड़ी स्थिति परिसर में होंगे। इस सामूहिक विवाह समारोह में 54 दिव्यांग और निर्धन जोड़े विवाहसूत्र में बंधेगे और जीवन के नए सफर की शुरूआत करेंगे। इन्हीं में कुछ जोड़े ऐसे भी हैं, जो किसी के लिए भी प्रेरणा बन सकते हैं। (narayan seva sansthan divyang nirdhan samuhik vivah samaroh)
देखने में असक्षम शैतान टीचर बनकर शिक्षा से रोशन कर रहे हैं बच्चों का जीवन
सिरोही जिले के आबूरोड निवासी शैतान के 6 साल की उम्र में अचानक नेत्रहीनता आ गई। नेत्रहीन होने के चलते उन्होंने जीवन में कई परेशानियां देखीं, लेकिन हार नहीं मानी। वर्ष 2007 में शैतान ग्रामीणों की मदद से नारायण सेवा संस्थान पहुंचे। यहां संस्थान के आवासीय विद्यालय में शैतान ने शिक्षा प्राप्त की। अब शैतान टीचर बन गए हैं और एक प्राइवेट स्कूल में शिक्षा के जरिए सैकड़ों बच्चों का जीवन रोशन कर रहे हैं।
कुछ समय पहले उनकी आबू निवासी रमीला से मुलाकात हुई। रमीला अनाथ हैं, ऐसे में उनका जीवन भी काफी मुश्किलों से बीता है। शैतान और रमीला ने एक-दूसरे को समझा और जीवनसाथी बनने का निर्णय किया। अब नारायण सेवा संस्थान के सामूहिक विवाह समारोह में दोनों का विवाह होने जा रहा है।
कभी दो कदम चलने में असमर्थ रमझू आज आत्मनिर्भर है और सोनिया बनेंगी हमसफर
बांसवाड़ा के रहने वाले रमझू 2 साल की उम्र में पोलियो का शिकार हो गए थे। नारायण सेवा संस्थान में उनका ऑपरेशन हुआ और वे कैलिपर लगाकर चलने लगे। शुरूआती दिनों में रमझू ने नारायण सेवा संस्थान में ही सफाईकर्मी का काम किया और कंप्यूटर कोर्स में दाखिला ले लिया। कम्प्यूटर कोर्स पूरा कर अब रमझू संस्थान में ही कम्प्यूटर ऑपरेटर की नौकरी कर रहे हैं। रमझू ने अपने गांव की ही सोनिया से सामूहिक विवाह समारोह में शादी करने वाले हैं।
संस्थान ने सकलांग बनाया अब करेंगे शादी
कुशलगढ़ बांसवाड़ा निवासी अनिल बचपन से एक पैर और एक हाथ से दिव्यांगता ग्रस्त थे, वहीं रंजिला बेदी भी घिसट-घिसट कर चल पाती थीं। अनिल और रंजिला की मुलाकात नारायण सेवा संस्थान में हुई, जब वे ऑपरेशन करवाने के लिए यहां आए। ऑपरेशन के बाद रंजिला कैलिपर्स लगाकर चलने लगी हैं। अनिल और रंजिला एक-दूसरे के दर्द को बखूबी समझते हैं और अब एक-दूसरे का सहारा बनने जा रहे हैं।
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