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उदयपुर में आईटीसी मेमेंटोज होटल-रिसोर्ट प्रोपर्टी में बड़े घोटाले की आशंका, जांच शुरू

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उदयपुर,(एआर लाइव न्यूज)। उदयपुर के कैलाशपुरी पंचायत के राया गांव और राजसमंद के गोड़च पंचायत की बीच सीमा पर स्थित आईटीसी ग्रुप द्वारा संचालित मेमेंटोज होटल एंड रिसोर्ट (ITC Mementos udaipur) के जिम्मेदारों को नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) द्वारा नोटिस दिए जाने के बाद अब एक और बड़ा खुलासा हुआ है। 50 एकड़ में फैले मेमेंटोज होटल एंड रिसोर्ट प्रोपर्टी को बगैर स्टाम्प ड्यूटी चुकाए शुद्धिपत्र की आड़ में एक जॉइंट वेंचर कंपनी से अन्य दो कंपनियों के नाम ट्रांसफर किया गया था। इस तरह राज्य सरकार को करोड़ों के राजस्व की हानि होने का अंदेशा है।

राज्य सरकार के पंजीयन एवं मुद्रांक विभाग ने इस पूरे मामले की जांच शुरू कर दी है। आरोप इसलिए और गंभीर हो जाते हैं, क्यों कि अन्य दो कंपनियों को ट्रांसफर की गयी संपत्ति पर इसके निदेशकों ने राष्ट्रीयकृत बैंक से करोड़ों का लोन तक ले लिया। एनजीटी से लेकर, अन्य सभी मुद्दों और दस्तावेजों को देखा जाए तो सवाल यह है कि भविष्य में अगर यह कंपनी किसी बड़े विवाद या कानूनी कार्रवाई में फंसती है, तो इन्हें दिए गए करोड़ों के लोन की वसूली कैसे होगी.? मामले की तह तक जाएं तो क्या इस मामले में करोड़ों रूपए की मनी लॉड्रिंग, भ्रष्टाचार और टैक्स चोरी का खुलासा हो सकता..? सवाल है कि क्या प्रवर्तन निदेशालय इसकी जांच करेगा.? क्या सीबीआई एसीबी मामले की तह तब पहुंचेगा.?

इन सब के बीच सवाल बार-बार यही खड़ा होता है कि क्या कंपनी और इसके निदेशकों को कोई राजनीतिक संरक्षण मिल रहा है.? अधिकारियों ने भले ही शिकायत मिलने पर मामले में जांच शुरू कर दी हो, लेकिन इस संबंध में स्पष्ट जांच करने, कार्यवाही करने और यहां तक कि स्पष्ट रूप से बात करने से भी अधिकारी-कर्मचारी बच रहे हैं।

क्या कहता है नियम

हाईकोर्ट के वरिष्ठ अधिवक्ता ने बताया कि शुद्धिपत्र में पक्षकारों के नाम नहीं बदले जा सकते हैं, इसमें सिर्फ छोटी-मोटी क्लेरिकल मिस्टेक ठीक की जाती है। अगर किसी ने शुद्धिपत्र के नाम से पक्षकारों के नाम ही बदले हैं, तो यह पूरी तरह गलत है। जो दस्तावेज नियमों के तहत नहीं बनाए गए हैं, वह अवैध माने जाएंगे।

यह है मामला

पंजीयन एवं मुद्रांक विभाग से प्राप्त दस्तावेजों के अनुसार आज जिस प्रोपर्टी पर आईटीसी ग्रुप द्वारा मेमेंटोज होटल-रिसोर्ट संचालित किया जा रहा है, उसके भूखंड की खरीद 2015 में हुई थी। मार्च 2015 में एचजीएडीपीएल-वीएलपीएल जेवी कंपनी (पेन कार्ड- AABAH0599K) ने अलग-अलग खातेदारों से यह रिहायशी जमीन खरीदी थी। आईटीसी के अनुसार मेमेंटोज होटल एंड रिसोर्ट करीब 50 एकड़ (करीब 21 लाख वर्ग फीट) क्षेत्र में फैला हुआ है। होटल-रिसोर्ट के लिए भूखंड खरीदने के बाद इस पर निर्माण शुरू हुआ और 2019 तक काफी निर्माणकार्य पूरा भी हो गया। यह संपत्ति मार्च 2015 से मई 2019 तक तो यह भूखंड एचजीएडीपीएल-वीएलपीएल जेवी कंपनी के नाम ही रहता है।

लेकिन अचानक एचजीएडीपीएल-वीएलपीएल (जे.वी) (पेन कार्ड- AABAH0599K ) के निदेशकों द्वारा मई 2019 में 500-500 रूपए के स्टाम्प पर एक शुद्धिपत्र उप पंजीयक कार्यालय देलवाड़ा में पेश किया जाता है। जिसमें यह कहा जाता है कि खातेदारों से खरीदी गयी संपत्ति के विक्रय पत्र में टाईपिंग भूलवश द्वितीय पक्ष क्रेता कंपनी का नाम एचजीएडीपीएल-वीएलपीएल (जे.वी) लिखा गया था, जबकि एचजीएडीपीएल-वीएलपीएल का पूरा नाम एचजी एसरेज डवलपर्स प्राईवेट लिमिटेड और वेलेंसिया लीजर प्राइवेट लिमिटेड पढ़ा जाए।

ताजुब्ब की बात तो यह है कि पंजीयन एवं मुद्रांक विभाग ने भी बिना तथ्यों को देखे संपत्ति एचजीएडीपीएल-वीएलपीएल जेवी कंपनी (पेन कार्ड- AABAH0599K) से दो कंपनियों एचजी एसरेज डवलपर्स प्राईवेट लिमिटेड (पेन कार्ड- AADCH2745P) और वेलेंसिया लीजर प्राइवेट लिमिटेड (पेन कार्ड- AAECV6949A) के नाम बगैर स्टाम्प ड्यूटी के ट्रांसफर कर दी।

शुद्धिपत्र में नहीं बताया कि तीनों कंपनियों के पैन कार्ड और पंजीकरण तारीख अलग हैं

टाईपिंग एरर बताकर निदेशकों ने द्वितीय पक्षकार की कंपनियों के नाम मतलब खरीदने वाली पार्टी के नाम भी बदल दिए। दस्तावेजों में निदेशकों ने इस बात के तथ्य को उजागर नहीं किया कि “एचजीएडीपीएल-वीएलपीएल, एचजी एसरेज डवलपर्स प्राईवेट लिमिटेड और वेलेंसिया लीजर प्राइवेट लिमिटेड तीनों का पंजीकरण अलग-अलग तारीख और साल में हुआ, इनके पैन कार्ड अलग-अलग हैं। यहां तक कि एचजीएडीपीएल-वीएलपीएल जेवी का जीएसटी नंबर भी अलग है और यह रेगुलर काम कर रही है, जिसका जीएसटी फाइल हो रहा है।”

सवाल यही उठता है कि जब तीनों कंपनियों के नाम सरकारी दस्तावेजों में अलग-अलग पंजीकृत हैं, तो एक कंपनी दो कंपनियों की फुल फॉर्म कैसे हो सकती है। वरिष्ठ चार्टर्ड एकाउंटेंट ने बताया कि आयकर नियमों के तहत अगर पेन कार्ड अलग-अलग हैं तो तीनों को अलग-अलग माना जाएगा। ऐसे में एक कंपनी दो कंपनियों की फुल फॉर्म नहीं हो सकती है।

विभाग ने शुरू की जांच

इस तरह एचजीएडीपीएल-वीएलपीएल जेवी कंपनी के निदेशकों ने करोड़ों की स्टाम्प ड्यूटी को चुकाए बगैर ही 500-500 रूपए के स्टाम्प पर शुद्धिपत्र के जरिए यह संपत्ति एचजी ऐसरेज डवलपर्स और वेलेंसिया लीजर प्राईवेट कंपनियों दो कंपनियों के नाम कर दी। विभाग में हुई एक शिकायत के बाद उच्च अधिकारियों का ध्यान इस ओर गया तो पंजीयन एवं मुद्रांक विभाग ने इस पर जांच शुरू कर दी है

चूंकि एक कंपनी से अन्य दो कंपनियों को संपत्ति 2019 में ट्रांसफर हुई, तो स्टाम्प ड्यूटी की वैल्यूशन 2019 में रही डीएलसी रेट/रजिस्ट्री रेट (जो भी ज्यादा हो) के अनुसार होगी। 2019 तक होटल-रिसोर्ट का ज्यादातर निर्माण हो चुका था, तो उसकी वैल्युशन अलग से जुड़ेगी। ऐसे में संभावना जताई जा रही है कि स्टाम्प ड्यूटी, उस ब्याज और पैनल्टी की वसूली करोड़ों में निकल सकती है।

अधिकारियों का क्या कहना है इस मामले में

डीआईजी के ध्यान में पूरा मामला है, इस मामले में मैं उन्हीं से बात कर अपडेट लूंगा, अभी पूरी स्थिति मेरे सामने स्पष्ट नहीं है, तो अभी मैं इस बारे में कुछ नहीं कह सकता। शुद्धिपत्र के बारे में भी मामले की पूरी जानकारी लेने के बाद ही कुछ कह सकता हूं। : शरद मेहरा, आईजी स्टाम्प

इस मामले में आगे क्या कार्यवाही की जा सकती है, हमारे विभाग का लॉ ऑफिसर तय करेगा। यह एक तकनीकी मामला है। सामान्यतः शुद्धिपत्र में नाम करेक्शन, प्रोपर्टी डिटेलिंग करेक्शन अलाउड हैं। यह एक अलग और तकनीकी मामला है। इस संबंध में आईजी सर ने भी लेटर भेजकर रूल की जानकारी दी है, रूल के अनुसार एग्जामिन करने का प्रोसेस चल रहा है। : कृष्णपाल सिंह चौहान, डीआईजी स्टाम्प, उदयपुर

संपत्ति को शुद्धिपत्र के जरिए एक कंपनी से अन्य दो कम्पनी में ट्रांसफर करने के मामले में हमने कम्पनी को नोटिस जारी किए है। नोटिस के अगेंस्ट इन्होंने कोई रिप्लाई जमा नहीं करवाया। इस संबंध में रेफरेंस डीआईजी ऑफिस भेज दिया गया है। अब रेफरेंस कार्यवाही की सुनवाई डीआईजी ऑफिस में ही होगी। : हुकम कुंवर, तहसीलदार, देलवाड़ा तहसील

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